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ग्लोबल टिपिंग प्वाइंट रिपोर्ट की चेतावनी: जलवायु ने लांघी विनाशकारी सीमा, प्रकृति का संतुलन बिगड़ने का खतरा

Fri, 17 Oct 2025 05:13 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Fri, 17 Oct 2025 05:13 AM IST
सार

कोरल रीफ्स, अमेजन और ध्रुवीय हिमखंडों का नुकसान केवल पर्यावरणीय नहीं बल्कि आर्थिक तबाही भी है। वैश्विक मत्स्य-उद्योग, पर्यटन और तटीय संरक्षण पर इसका असर अरबों डॉलर का होगा। समुद्र-स्तर वृद्धि से मुंबई, कोलकाता, न्यूयॉर्क और शंघाई जैसे शहरों को गंभीर खतरा है।

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Climate crossed devastating threshold, threatening to upset balance of nature, warns Global Tipping report
कोरल रीफ्स - फोटो : Hittarth Raval

विस्तार

विश्व के 160 जलवायु वैज्ञानिकों की ऐतिहासिक ग्लोबल टिपिंग प्वाइंट रिपोर्ट 2025 ने पृथ्वी के भविष्य को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार पृथ्वी अब नई वास्तविकता में प्रवेश कर चुकी है। एक ऐसा दौर जब जलवायु परिवर्तन ने अपना पहला विनाशकारी टिपिंग प्वाइंट पार कर लिया है। यह बिंदु है उष्णकटिबंधीय समुद्रों में स्थित कोरल रीफ्स (मूंगे की चट्टानों) की सामूहिक मृत्यु जो अब लगभग अपरिवर्तनीय स्थिति में पहुंच चुकी है।

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वैज्ञानिकों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक तापमान लगभग 1.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि कोरल रीफ्स की सहनशील सीमा 1.2 डिग्री सेल्सियस थी यानी यह सीमा पार हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार पृथ्वी के कई प्रमुख जलवायु तंत्र अपने टिपिंग प्वाइंट के करीब हैं यानी वह स्थिति जिसके बाद इनका संतुलन वापस नहीं लौट सकता। ग्रीनलैंड और पश्चिम अंटार्कटिका की हिम चादरें (पोलर आइस शीट्स) पिघलने से समुद्र-स्तर स्थायी रूप से कई मीटर तक बढ़ सकता है, जिससे तटीय शहरों और द्वीपीय देशों को भारी खतरा होगा। अमेजन वर्षावन में लगातार बढ़ते तापमान और जंगलों की कटाई से यह सवाना के घास के मैदान में बदल सकती है, जिससे पृथ्वी की कार्बन अवशोषण क्षमता घटेगी और जलवायु परिवर्तन और तेज होगा। अटलांटिक मेरीडियोनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन (एएमओसी)  जिसमें शक्तिशाली गल्फ स्ट्रीम भी शामिल है पृथ्वी की जलवायु प्रणाली का एक प्रमुख इंजन है। यदि यह महासागरीय प्रवाह रुक जाता है तो यूरोप भीषण ठंड की चपेट में आ जाएगा, विश्वभर के मानसून तंत्र असंतुलित हो जाएंगे और वैश्विक कृषि उत्पादकता में भारी गिरावट दर्ज होगी।
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कोरल रीफ्स की मृत्यु पहला टिपिंग प्वाइंट
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 से महासागर रिकॉर्ड स्तर तक गर्म हो रहे हैं, जिससे दुनिया के 80% से अधिक कोरल रीफ्स प्रभावित हो चुके हैं। यह पृथ्वी का पहला ऐसा पारिस्थितिक तंत्र है जिसने अपने अस्तित्व की सीमा लांघ दी है। वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड यूके के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार माइक बैरेट ने कहा हमने कोरल रीफ्स को उनकी सहनशीलता से बहुत आगे धकेल दिया है। अगर तापमान वृद्धि नहीं रोकी गई तो भविष्य में ‘एक्सटेंसिव रीफ्स’ जैसी कोई चीज बचेगी ही नहीं। इन प्रवाल भित्तियों का विनाश न केवल समुद्री जीवन के लिए बल्कि मानव समाज के लिए भी घातक साबित होगा, क्योंकि ये खाद्य सुरक्षा, मत्स्य उद्योग, पर्यटन और तटीय रक्षा के प्रमुख आधार हैं। एक्सटेंसिव रीफ्स का अर्थ है विस्तृत या बड़े क्षेत्र में फैली हुई मूंगे की चट्टानें। ये समुद्र की सतह के नीचे फैले विशाल पारिस्थितिक तंत्र होते हैं, जहां कोरल, मछलियां और अन्य समुद्री जीव मिलकर एक जटिल जैव विविधता बनाते हैं। यह समुद्र के भीतर फैला हुआ जीवित पारिस्थितिक तंत्र है जो बहुत बड़े क्षेत्र को घेरता है।
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 डोमिनो इफेक्ट : एक संकट से उपजेगा दूसरा
रिपोर्ट चेतावनी देती है कि एक बार जब कोई जलवायु तंत्र अपना टिपिंग प्वाइंट पार कर लेता है, तो यह अन्य प्रणालियों को भी असंतुलित कर सकता है  इसे वैज्ञानिकों ने डोमिनो इफेक्ट कहा है। उदाहरणस्वरूप अगर हिमचादरें तेजी से पिघलती हैं तो यह महासागरीय धाराओं को प्रभावित करेगा जो आगे चलकर यूरोप, अमेरिका और एशिया के मौसम चक्र को बदल देगा।

आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव
कोरल रीफ्स, अमेजन और ध्रुवीय हिमखंडों का नुकसान केवल पर्यावरणीय नहीं बल्कि आर्थिक तबाही भी है। वैश्विक मत्स्य-उद्योग, पर्यटन और तटीय संरक्षण पर इसका असर अरबों डॉलर का होगा। समुद्र-स्तर वृद्धि से मुंबई, कोलकाता, न्यूयॉर्क और शंघाई जैसे शहरों को गंभीर खतरा है। हालांकि रिपोर्ट पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। इसमें यह भी बताया गया है कि सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी तकनीक और हीट पंप जैसे क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। अब स्वच्छ ऊर्जा कई जगह पारंपरिक ईंधनों से सस्ती हो चुकी है यानी सकारात्मक सामाजिक टर्निंग प्वाइंट संभव हैं।


मानवता के सामने निर्णायक क्षण रिपोर्ट का अंतिम संदेश स्पष्ट है
अगर अब भी निर्णायक कदम नहीं उठाए गए तो अमेजन वर्षावन, हिमचादरें और महासागरीय धाराएं भी समाप्त हो सकती हैं और मानवता एक वास्तविक प्रलयंकारी युग में प्रवेश कर जाएगी। वैज्ञानिक समुदाय ने विश्व नेतृत्व से आग्रह किया है कि वे पृथ्वी को धीरे-धीरे मरती हुई स्थिति से निकालने के लिए तुरंत सामूहिक और विज्ञान-आधारित कदम उठाएं। ग्लोबल टिपिंग प्वाइंट रिपोर्ट 2025 न केवल एक चेतावनी है, बल्कि एक आख़िरी अवसर भी। पृथ्वी का पारिस्थितिक संतुलन पहले से कहीं अधिक नाजुक स्थिति में है। अब समय है कि विश्व एकजुट होकर तापमान वृद्धि को सीमित करने, प्रदूषण घटाने और हरित ऊर्जा को बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए  क्योंकि समय अब वास्तव में खत्म हो रहा है।

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