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जलवायु परिवर्तन : विशेषज्ञों ने दी चेतावनी, जानलेवा गर्म हवाओं का घर बन रहा है भारत

Fri, 06 Mar 2020 05:48 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 06 Mar 2020 05:48 AM IST
सार

साइंस जर्नल ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ में प्रकाशित इस शोध में उन फैक्टरों को पहचाना गया है, जो भारत में भीषण मौसमी घटनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं। शोध में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) से दैनिक अधिकतम तापमान के डाटासेट का उपयोग करते हुए 1951 से 1975 और 1976 से 2018 के बीच देश में ऐसे भीषण गर्म मौसमी प्रभावों की आवृत्ति और तीव्रता में परिवर्तन का आकलन किया गया। 

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Climate Change : India is becoming the home of deadly hot winds
जलवायु परिवर्तन - फोटो : पेक्सेल्स

विस्तार

पश्चिमी यूरोप में 2003 में व रूस में 2010 के दौरान करीब 1000 लोगों की जान लेने वाली तथा फसलों को झुलसा देने वाली गर्म हवाओं का कहर भारत में भी लगातार झेलना पड़ सकता है। एक शोध के दौरान दावा किया गया है कि ऐसी जानलेवा गर्म हवाओं का चलना भारत में एक सामान्य मौसम का हिस्सा बन सकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो भारत जानलेवा गर्म हवाओं का घर बन रहा है।

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एक साइंस जर्नल ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ में प्रकाशित इस शोध में उन फैक्टरों को पहचाना गया है, जो भारत में भीषण मौसमी घटनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं। शोध में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) से दैनिक अधिकतम तापमान के डाटासेट का उपयोग करते हुए 1951 से 1975 और 1976 से 2018 के बीच देश में ऐसे भीषण गर्म मौसमी प्रभावों की आवृत्ति और तीव्रता में परिवर्तन का आकलन किया गया। 
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पुणे के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (आईआईटीएम) समेत कई वैज्ञानिकों के समूह ने पूरे भारत के करीब 395 क्वालिटी कंट्रोल स्टेशनों से जुटाए गए इस डाटासेट का विश्लेषण करते हुए देश में भीषण गर्मी के लिए जिम्मेदार मैकेनिज्म की खोज की। आईआईटीएम के वैज्ञानिक और शोध के मुख्य लेखक मनीष कुमार जोशी ने कहा, विश्लेषण के परिणाम से जानकारी मिली कि गंगा के मैदानी क्षेत्र को छोड़कर समूचे भारत में गर्म दिनों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।

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25 फीसदी बढ़ चुके हैं भीषण गर्मी वाले दिन

शोधकर्ताओं का कहना है कि गंगा मैदानों को छोड़कर देश के तकरीबन समूचे हिस्से में 1976 से 2018 तक अप्रैल से जून तक के सीजन में भीषण जानलेवा गर्मी वाले दिनों की संख्या औसतन 10 आंकी गई है। उन्होंने कहा कि 1951 से 1975 के बीच भीषण गर्मी वाले दिनों की संख्या में यह करीब 25 फीसदी की बढ़ोतरी है।

उत्तर भारत से है इस गर्मी का जुड़ाव

शोधकर्ताओं के मुताबिक, भीषण गर्मी वाले दिनों में बढ़ोतरी उत्तर भारत के ऊपर बने असामान्य उच्च दबाव वाली वायुमंडलीय प्रणाली का नतीजा है। इससे बने दबाव के कारण एडियाबैटिक कंप्रेशन (स्थिरोष्म संपीड़न) की प्रक्रिया के चलते वायुमंडलीय तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। जोशी के मुताबिक, इसके चलते आसमान में बादलों का कवच घटता है, जिससे सौर विकिरण की ज्यादा मात्रा सतह पर पहुंचकर भारतीय भूमि के तापमान को और ज्यादा गर्म कर रही है।

पूरे देश में घट रही मिट्टी की नमी

वैज्ञानिकों ने शोध में यह भी पाया है कि पूरे देश में सतह की मिट्टी की नमी का स्तर खतरनाक गति से कम हुआ है। उनका मानना है कि इसने भी भीषण गर्मी को बढ़ाने में अपना योगदान दिया है। जोशी ने कहा, मिट्टी की नमी वाष्पीकरण के जरिये सौर विकिरण के थोड़े से प्रभाव को बेकार कर देती है। इसकी कमी के चलते विकिरण का पूरा असर भूमि के तापमान पर हो रहा है।

ज्यादा सिंचाई के चलते बचे हुए हैं गंगा के मैदान

जोशी के मुताबिक, गंगा नदी के आसपास के मैदानी क्षेत्र विश्व में सबसे ज्यादा सिंचाई वाले जोन हैं। यहां पर्याप्त हरियाली, जल निकायों से वाष्पीकरण की दर और पौधों से वाष्पोत्सर्जन भरपूर मात्रा में होता है। इसके चलते इस क्षेत्र में भीषण गर्मी का प्रभाव किसी हद तक नियंत्रित हो जाता है।

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