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जलवायु परिवर्तन का असर: केला उत्पादन पर संकट के बादल, 2080 तक नष्ट हो जाएंगे दो तिहाई क्षेत्र

Wed, 14 May 2025 09:04 PM IST
राहुल कुमार अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: राहुल कुमार Updated Wed, 14 May 2025 09:04 PM IST
सार

अंतरराष्ट्रीय संस्था क्रिश्चन ऐड की नई रिपोर्ट 'गोइंग बनानाजः हाउ क्लाइमेट चेंज थ्रेट्स द वर्ल्ड फेवरेट फ्रूट' के मुताबिक,  जलवायु परिवर्तन दुनिया के पसंदीदा फल केला के लिए किस तरह खतरा बनता जा रहा है। रिपोर्ट बताती है कि कैसे सर्वोत्तम केले उगाने वाले 60 फीसदी क्षेत्र बढ़ते तापमान के कारण खतरे में हैं। पढ़ें नया शोध.....

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climate change: Banana production in danger, two-thirds of area will be destroyed by 2080
केला उगाने वाले क्षेत्रों पर जलवायु संकट - फोटो : adobe stock

विस्तार

दुनियाभर में लोकप्रिय फल केला के उत्पादन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्था क्रिश्चन ऐड की एक शोध से पता चला है कि दक्षिण अफ्रीका और कैरेबियाई द्वीप समूह में जलवायु परिवर्तन के कारण 60 फीसदी यानि दो तिहाई केला उत्पादन क्षेत्र नष्ट हो सकता है। केला उगाने वाले क्षेत्र में जलवायु संकट के कारण दुनिया में केले की उपलब्धता कम हो जाएगी।

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अंतरराष्ट्रीय संस्था क्रिश्चन ऐड की नई रिपोर्ट 'गोइंग बनानाजः हाउ क्लाइमेट चेंज थ्रेट्स द वर्ल्ड फेवरेट फ्रूट' कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन दुनिया के पसंदीदा फल केला के लिए किस तरह खतरा बनता जा रहा है। रिपोर्ट बताती है कि कैसे सर्वोत्तम केले उगाने वाले 60 फीसदी क्षेत्र बढ़ते तापमान के कारण खतरे में हैं। दुनिया में दक्षिण अमेरिका और कैरेबियाई द्वीप समूह क्षेत्र में 80 फीसदी केला का उत्पादन होता है। 
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अनुमान है कि दुनिया के सुपरमार्केट में आपूर्ति किया जाने वाला 80 फीसदी केला वहीं से आता है। लेकिन बदलते मौसम, बढ़ते तापमान और जलवायु संबंधी कीड़े ग्वाटेमाला, कोस्टा रिका और कोलंबिया जैसे केला उगाने वाले देशों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसकी वजह से 2080 तक उस क्षेत्र में केले उगाने वाले 60 फीसदी सबसे उपयुक्त क्षेत्र खत्म हो सकते हैं। इस शोध के आधार पर क्रिश्चन ऐड संस्था ने जलवायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार देशों से आग्रह किया है कि  ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और सबसे जहरीले रसायनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए निर्णायक कार्रवाई करें। वहीं, निष्पक्ष, स्थिर और स्वस्थ खाद्य प्रणालियों में बदलाव के लिए वित्तपोषण के दायित्व को पूरा करें।
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केला पसंदीदा फल ही नहीं भोजन का भी हिस्सा है
क्रिश्चियन एड के निदेशक ओसाई ओजीघो ने कहा कि केला न केवल दुनिया का पसंदीदा फल हैं, बल्कि लाखों लोगों के लिए एक आवश्यक भोजन भी हैं। इसलिए इस महत्वपूर्ण फसल के लिए मानव निर्मित जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न खतरे के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है। कई लोगों के लिए, केला सिर्फ रात के खाने के बाद का एक मजेदार नाश्ता नहीं है, बल्कि यह उनके आहार का मुख्य हिस्सा है और जीवित रहने के लिए आवश्यक है। यह गेहूं, चावल और मक्का के बाद वैश्विक स्तर पर चौथी सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल है। 400 मिलियन से अधिक लोग यानि 15 से 27 प्रतिशत अपने दैनिक कैलोरी के लिए केले पर निर्भर हैं। इसलिए हमें इस महत्वपूर्ण फल की पैदावार के लिए जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न खतरे के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है क्योंकि जलवायु संकट से लोगों का जीवन और आजीविका पहले से ही संकट में है।

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