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सीजेआई का आह्वान: महिला वकील न्यायपालिका में 50 फीसदी आरक्षण के लिए उठाएं आवाज, मैं हूं साथ

Sun, 26 Sep 2021 08:12 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sun, 26 Sep 2021 08:12 PM IST
सार

सीजेआई रमण ने कहा कि यह हजारों सालों के दमन का मामला है और महिलाएं आरक्षण की हकदार हैं।
 

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CJIs call to women lawyers: shout with anger and demand 50 per cent reservation in judiciary, my total support with you
सीजेआई एनवी रमण - फोटो : ANI

विस्तार

देश की न्यायपालिका में बड़े बदलाव के प्रयासों में जुटे सीजेआई एनवी रमण रविवार को महिला वकीलों के समर्थन में खुलकर सामने आए। उन्होंने महिला वकीलों से आह्वान किया कि वे न्यायपालिका में 50 फीसदी आरक्षण की अपनी मांग को जोरदार ढंग से उठाएं। सीजेआई ने यह भी आश्वस्त किया कि उन्हें उनका पूरा समर्थन है।

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सुप्रीम कोर्ट में नौ नवनियुक्त न्यायाधीशों के शीर्ष कोर्ट की महिला वकीलों द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में सीजेआई ने यह अहम बात कही। सीजेआई रमण ने कहा, 'मैं नहीं चाहता कि आप रोएं, लेकिन आप गुस्से से चिल्लाएं और मांग करें कि हम 50 फीसदी आरक्षण चाहते हैं।' सीजेआई ने कहा कि यह हजारों सालों से महिलाओं के दमन का मामला है और महिलाएं आरक्षण की हकदार हैं। 
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लॉ स्कूलों में हो महिला आरक्षण
चीफ जस्टिस ने कहा, 'यह अधिकार का मामला है, दया का नहीं। मैं देश के लॉ स्कूलों में महिलाओं के लिए निश्चित मात्रा में आरक्षण की मांग का भी समर्थन करता हूं, ताकि वे न्यायपालिका में आ सकें'।  हाल ही में जिन नौ जजों को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया है, उनमें तीन महिला जज शामिल हैं। सीजेआई रमण ने कहा कि उन्होंने कार्ल मार्क्स के नारे 'दुनिया के मजदूरों एक हो जाओ, तुम्हारे पास खोने के लिए अपनी जंजीरों के अलावा कुछ नहीं है,' में संशोधन किया है।
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इस मौके पर वह कहना चाहते हैं कि 'दुनिया की महिलाएं एकजुट हो जाओ, तुम्हारे पास खोने के लिए अपनी जंजीरों के अलावा कुछ नहीं है'। यही समय है जब हमें न्यायपालिका में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण की मांग करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह दुखद है कि कुछ चीजें बहुत देरी से महसूस की गईं, लेकिन वह बहुत खुश होंगे, जब यह लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा।

आप समाज के लिए रोल मॉडल हैं
जस्टिस रणम ने कहा, 'मेरी सभी बहनों और आप सभी ने समाज के लोगों और महिलाओं के लिए अपवाद पेश किया है। चाहे युवा पुरुष हों या महिलाएं आपको रोल मॉडल के रूप में देख रहे हैं। आपकी सफलता की कहानियां उन्हें प्रेरित करेंगी और हम उम्मीद करते हैं कि अधिक महिलाएं इस पेशे में शामिल होंगी और हम जल्द ही 50 प्रतिशत के लक्ष्य को प्राप्त करेंगे। मैं आपके द्वारा की गई सभी पहलों का हृदय से समर्थन करता हूं और जब तक मैं यहां हूं, मैं आपकी पहल का समर्थन करूंगा।'


अभी 30 फीसदी से कम हैं महिला न्यायाधीश
सीजेआई ने कहा कि बीती रात ओडिशा से लौटने के बाद मैंने न्यायिक तंत्र के बारे में कुछ सूचनाएं संकलित कीं। पूरे देश व अधीनस्थ न्यायालयों में 30 फीसदी से भी कम महिलाएं हैं। हाईकोर्टों में महिला जजों की संख्या 11.5 फीसदी हैै और सुप्रीम कोर्ट के 33 जजों में चार महिलाएं हैं, यह करीब 11 या 2 फीसदी होता है।

17 लाख वकीलों में सिर्फ 15 फीसदी महिलाएं
उन्होंने यह भी कहा कि देश के 17 लाख वकीलों में से सिर्फ 15 फीसदी महिलाएं हैं और राज्यों की बार काउंसिलों में सिर्फ 2 फीसदी महिला प्रतिनिधि हैं।

औपनिवेशिक युग के कानूनों से 70 साल नुकसान हुआ: जस्टिस नरसिम्हा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जस्टिस पी एस नरसिम्हा ने कहा कि भारत को औपनिवेशिक युग के कानूनों और उनकी व्याख्या के कारण 70 साल से अधिक समय तक नुकसान उठाना पड़ा। इन कानूनों को उपनिवेशवाद से मुक्त करना जजों का संवैधानिक मिशन है। जस्टिस नरसिम्हा 2027 में देश के प्रधान न्यायाधीश बनने वाले हैं। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति बी वी नागरत्न से पदभार ग्रहण करना उनके लिए एक बड़ा सम्मान होगा, जो भारत की पहली महिला सीजेआई बनेंगी।

महिला जज की नियुक्ति से लैंगिक समानता बढ़ेगी: जस्टिस नागरत्न
इसी कार्यक्रम में जस्टिस बी वी नागरत्न ने कहा कि न्यायपालिका में महिला जजों के उच्च पदों पर आने से लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा। इससे महिलाओं व पुरुषों की भूमिका को लेकर दृष्टिकोण भी बदलेगा और लैंगिक रूढ़िवादिता खत्म होगी। जस्टिस नागरत्न 2027 में देश की पहली महिला सीजेआई बनने वाली हैं।

दशहरे के बाद शुरू हो सकती है कोर्ट रूम सुनवाई: प्रधान न्यायाधीश

देश के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमण ने रविवार को कहा कि उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट में पूरी क्षमता के साथ कोर्ट रूम सुनवाई दशहरे की छुट्टियां खत्म होने के बाद हो सकती है। जजों को अदालतें पूरी तरह खोलने में कोई आपत्ति नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की महिला वकीलों द्वारा प्रधान न्यायाधीश एवं सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों का अभिनंदन करने के लिए आयोजित समारोह में न्यायमूर्ति रमण ने कहा, ‘मुझे कोई आपत्ति नहीं है।

यहां तक कि मैं तो महामारी के दौरान भी इसके लिए तैयार था।’ सुप्रीम कोर्ट में अभी मिश्रित व्यवस्था के तहत सुनवाई हो रही है। जो वकील शारीरिक रूप से कोर्ट आना चाहते हैं, उन्हें अनुमति दी जाती है और जो ऑनलाइन उपस्थित होना चाहते हैं, उन्हें वही सुविधा दी जाती है।

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