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सीजेआई बोबडे ने कहा, कोविड के बाद अदालतों में बढ़ेगी लंबित मामलों की संख्या

Sat, 12 Sep 2020 08:17 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sat, 12 Sep 2020 08:17 PM IST
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CJI SA Bobde says there will be flood of pending cases post covid mediation needs to be emphasized
मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे - फोटो : ट्विटर

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसए बोबडे ने शनिवार को कहा कि कोविड-19 महामारी के चलते अदालतों में ‘बड़ी संख्या में मामले लंबित’ हो जाएंगे। उन्होंने कहा, इसलिए उनमें से बहुत सारे मामलों के समाधान के लिए मध्यस्थता पर ज्यादा बल देना होगा। प्रधान न्यायाधीश ने मानसिक स्वास्थ्य पर बल देने की जरूरत बताई और इस ‘अप्रिय पूर्वानुमान’ का जिक्र किया कि कोविड संकट के बाद आत्महत्या की व्यापक प्रवृति आ सकती है।

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उन्होंने एक डिजिटल कार्यक्रम में कहा, ‘यह कोविड महामारी हमारे सामने मामलों का पहाड़ खड़ा करने जा रही है। मुझे कोई रास्ता नहीं दिखाई देता। हमें मामलों में फैसला करना होगा।’ इस डिजिटल कार्यक्रम में बोबडे ने शीर्ष अदालत के पूर्व शीर्ष न्यायाधीश आर भानुमति द्वारा लिखी गयी पुस्तक ‘ज्यूडिशियरी, जजेज एंड एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ जस्टिस’ का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि वह मानते हैं कि यह ऐसा वक्त है जब कई मामलों का समाधान करने के लिए मध्यस्थता, वाद पूर्व और वाद पश्चात मध्यस्थता पर बल देने की जरूरत है। 
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उन्होंने कहा, ‘मैं यह नहीं कह रहा कि हर मामला मध्यस्थता से निस्तारित किया जा सकता है लेकिन जब महामारी हटेगी और लॉकडाउन हटाया जाएगा तब हमारे सामने मामलों की बाढ़ आएगी। ऐसे में यदि हम विस्तृत प्रक्रिया का पालन करेंगे तो हमें नहीं पता कि कैसे हम उनका निर्णय करेंगे, यह ऐसी चीज है, जिसपर हम सभी को सोचना होगा।’
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इस मौके पर सर्वोच्च न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश के बाद वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन वी रमना ने कहा, ‘दूरी बनाकर रखना न्यायाधीशों पर ही निर्भर करता है। न्यायाधीश अपने बचाव में कुछ भी बोलने से संयम बरतते हैं और इन दिनों वे आलोचना के लिए आसान निशाना समझे जा रहे हैं। सोशल मीडिया एवं प्रौद्योगिकी के विस्तार से यह विषय और जटिल हो गया है। न्यायाधीश चटखारेदार चर्चा और मानहानिकारक सोशल मीडिया पोस्ट के शिकार होते जा रहे हैं।’


मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा उठाते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि इस पर गंभीर रूप से ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि आत्महत्या की व्यापक प्रवृति का ‘अप्रिय पूर्वानुमान’ है। उन्होंने कहा, ‘मैं इसमें यकीन नहीं करता हूं और आशा करता कि ऐसा न हो।’

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