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SC News: आंध्र प्रदेश की तीन राजधानियों के खिलाफ राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई से सीजेआई हुए अलग
Tue, 01 Nov 2022 08:09 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 01 Nov 2022 08:09 PM IST
सार
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने इस साल तीन मार्च को फैसला सुनाया था कि राज्य विधायिका में राजधानी को स्थानांतरित करने, विभाजित करने या विभाजित करने के लिए कोई कानून नहीं बना सकती।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई
विस्तार
भारत के मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित ने मंगलवार को हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ आंध्र प्रदेश सरकार की अपील पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें कहा गया था कि राज्य की विधायिका में राजधानी को स्थानांतरित करने, विभाजित करने या विभाजित करने के लिए कोई कानून बनाने के लिए योग्यता की कमी है। जब राज्य सरकार की याचिका सुनवाई के लिए आई, भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ को अवगत कराया गया कि न्यायमूर्ति ललित ने एक वकील के रूप में एक बार आंध्र प्रदेश के विभाजन से संबंधित मुद्दे पर कानूनी राय दी थी। सीजेआई ने कहा कि मामले को उस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिसका मैं सदस्य नहीं हूं।
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आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने इस साल तीन मार्च को फैसला सुनाया था कि राज्य विधायिका में राजधानी को स्थानांतरित करने, विभाजित करने या विभाजित करने के लिए कोई कानून नहीं बना सकती। इससे राज्य की राजधानी तीन अलग-अलग राजधानियां बनाने की मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी की योजना पर विराम लग गया। हाई कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने माना था कि राज्य सरकार और एपी कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी ने याचिकाकर्ताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया और निर्देश दिया कि राज्य 6 महीने के भीतर अमरावती राजधानी शहर और राजधानी क्षेत्र का निर्माण और विकास करे।
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उच्च न्यायालय का फैसला अमरावती क्षेत्र के पीड़ित किसानों की 63 याचिकाओं के एक समूह पर आया था। ये याचिकाएं विशाखापत्तनम को आंध्र प्रदेश की कार्यपालिका राजधानी, कुर्नूल को न्यायिक राजधानी और अमरावती को विधायी राजधानी बनाने के जगन शासन के फैसले के खिलाफ दायर की गई थीं।
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