नागरिकता विधेयक के साथ राज्यसभा में गरजे शाह, विपक्ष अंतरात्मा से करे सवाल
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उच्च सदन में नागरिकता संशोधन बिल पर हुई तीखी बहस और विपक्ष के तीखे हमलों का गृहमंत्री अमित शाह ने उसी अंदाज में दिया। विरोधियों को उन्होंने बंद कमरे में आत्मा से सवाल पूछने की नसीहत दी। गृहमंत्री ने कहा, जो दल आजादी के बाद सत्ता में रहे वह रात में कमरे में अंधेरा कर अपनी आत्मा से संवाद करें।
शाह ने कहा, अगर देश का बंटवारा धर्म के आधार पर नहीं होता और बाद के सत्ता में आए दलों ने सरकार बचाने के बदले समाधान की जिम्मेदारी निभाई होती तो बिल लाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने कहा, विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने ध्यान बंटाने के लिए बिल लाने का आरोप लगाया है। यह सही नहीं है। चुनाव साढ़े चार साल बाद आने हैं।
उन्होंने कहा कि पहले कार्यकाल के पहले ही साल में हम इस बिल को लाए थे। हम ध्यान बंटाने और सिर्फ अपनी सत्ता बचाने के लिए नहीं देश में सुधार और समाधान के लिए चुनौती स्वीकार करने के लिए यहां आए हैं। चुनावी राजनीति हम अपने दम पर करते हैं। अपने नेता की छवि के सहारे जीतते हैं।
शाह ने कहा, संविधान की जानकारी उनको भी है। इसमें अनुच्छेद 14 या समानता के अधिकार का कहीं उल्लंघन नहीं हुआ है। हम मानवीयता के आधार पर ऐसे करोड़ों लोगों को न्याय देना चाहते हैं जो धार्मिक प्रताड़ना के कारण सात दशक बाद भी शरणार्थी हैं।
शाह ने कहा कि कई बार नागरिकता कानून में संशोधन हुआ है। श्रीलंका के लिए, युगांडा के लिए, बांग्लादेश के लिए अलग-अलग। तात्कालिक परिस्थिति के मद्देनजर ऐसा किया गया। तब हमने कोई सवाल नहीं उठाए। मगर मैं पूछना चाहता हूं कि तीन देशों के शरणार्थियों के लिए यही कोशिश क्यों नहीं हुई। तीनों इस्लामिक देश हैं। इन देशों में मुसलमानों पर अत्याचार नहीं हुए। जबकि हिंदू, सिख सहित छह अल्पसंख्यक प्रताड़ना के शिकार हुए।
राज्यसभा में शाह के बिल पेश करते समय राज्यसभा टीवी ने थोड़ी देर के लिए कार्यवाही का सीधा प्रसारण रोक दिया। जब शाह ने कहा, भाजपा सरकार असम के लोगों का संरक्षण करेगी तो विपक्ष की बेंच से एक सांसद बीच में बोलने लगे। इस पर सभापति वेंकैया नायडू ने उन्हें सदन की कार्यवाही बाधित नहीं करने की चेतावनी दी। कहा, कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं जाएगा और न ही इसे दिखाया जाना चाहिए।
दरअसल, गृह मंत्री असम समझौते की धारा-6 के तहत गठित समिति की रिपोर्ट पर चर्चा कर रहे थे, तभी एक सांसद की आवाज आई, ‘यह भ्रामक है...’ सभापति ने शाह को बीच में टोकने वाले विपक्षी सांसद से कहा, आपका व्यवहार सही नहीं है। यह आचरण गलत है, कृपया बैठ जाइए। यह रिकॉर्ड पर नहीं जाएगा। 20-22 सेकंड तक रुकने के बाद सदन की कार्यवाही का दोबारा सीधा प्रसारण शुरू हुआ।
विपक्ष के भ्रम को दूर करें सांसद : मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा संसदीय दल की बैठक में कहा, विपक्ष इस बारे में भ्रम फैला रहा है। सत्र खत्म होने के बाद सांसद अपने अपने क्षेत्र में लोगों को बिल के बारे में सही जानकारी दें। उन्हें बताएं कि यह बिल किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। बताएं कि यह नागरिकता कानून में संशोधन की जरूरत क्यों है। इस दौरान पीएम ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने सहित कई अहम मुद्दों पर विपक्ष के विरोध की भी याद दिलाई।
मुस्लिम भारतीय नागरिक थे... हमेशा बने रहेंगे : सरकार
बिल वैध, सरकार कर रही है इंसाफ
बिल संविधान के अनुसार और वैध है। कश्मीर में शरणार्थियों को कैंप तक नहीं मिले थे, नागरिकता तो बहुत दूर की बात है। सरकार ऐसे लोगों के साथ इंसाफ कर रही है।
- रविशंकर प्रसाद, विधिमंत्री
जदयू ने कहा, 'सी' से आगे 'डी' भी है
यहां एनआरसी की बात हो रही है लेकिन 'सी' के आगे 'डी' भी होता है, हमारे लिए 'डी' का मतलब डेवलेपमेंट है। हमारे लिए 'नेशनल रजिस्टर ऑफ डेवलपमेंट' है। एनडीए सरकार ने एक कलम से एक बार में 2460 मदरसे बनाए।
- रामचंद्र प्रसाद सिंह, जदयू
'तुष्टीकरण के चलते कुछ दल कर रहे विरोध'
भारत ने हमेशा सभी धर्मों के लोगों को स्वीकार किया है। कुछ दल तुष्टीकरण के चलते बिल का विरोध कर रहे हैं। केवल वोट बैंक के लिए तथ्यों को गलत तरीके से पेश न करें।
- भूपेंद्र यादव, भाजपा
'श्रीलंकाई तमिलों को मिलेगी नागरिकता'
जयललिता ने श्रीलंका से आए तमिलों को दोहरी नागरिकता देने की बात कही थी, वह शुरुआत से ही उनके हक की लड़ाई लड़ रही थीं। यही कारण है कि पार्टी इस बिल का समर्थन कर रही है।
- विजिला सत्यानंत, अन्नाद्रमुक
'पड़ोसी देशों के हिंदू आखिर कहां गए'
पड़ोसी देशों में रहने वाले हिंदू अल्पसंख्यकों की संख्या लगातार कम होती रही। आखिर कहां गए वे? हमें उनका संरक्षण करने की आवश्यकता है।
- सरोज पांडेय, भाजपा
'श्रीलंका के तमिलों का ध्यान भी रखें'
हमारा रुख वही है जो लोकसभा में था। हम बिल का समर्थन कर रहे हैं लेकिन चाहते हैं कि कुछ संशोधन हो जैसे श्रीलंका के तमिलों को भारत में बसने की राह आसान की जाए।
- प्रसन्ना आचार्य, बीजेडी
मुस्लिम अब देश में ही दोयम दर्जे के नागरिक : विपक्ष
कोर्ट में गिर जाएगा बिल : चिदंबरम
मुझे पूरा यकीन है कि ये बिल अदालत में नहीं टिकेगा। मेरे सवाल हैं कि आपने तीन देशों को ही क्यों चुना, बाकी को क्यों छोड़ा? आपने छह धर्मों को ही क्यों चुना? सिर्फ ईसाई को क्यों शामिल किया भूटान के ईसाई, श्रीलंका के हिंदुओं को क्यों बाहर रखा?
- पी चिदंबरम, कांग्रेस
'...तो दुखी होते गांधी'
सावरकर ने घोषणा की थी कि जिन्ना के द्विराष्ट्रवाद के सिद्धांत से मुझे आपत्ति नहीं है। सरकार गांधी व पटेल का सिर्फ नाम न लें, गांधी का नाम सिर्फ विज्ञापन के लिए नहीं लें। अगर वे आज होते तो पीएम से मिलकर दुखी होते।
- आनंद शर्मा, कांग्रेस
धर्मों के चुनाव का आधार क्या : आजाद
जिन धर्मों का चुनाव किया गया, उसका आधार क्या है। श्रीलंका के हिंदू व भूटान के ईसाई क्यों शामिल नहीं हैं? अगर बिल सबको पसंद है, तो असम और त्रिपुरा में हालात क्यों बिगड़े?
- गुलाम नबी आजाद, नेता विपक्ष
'स्वर्णाक्षरों में जिन्ना की कब्र पर लिखा जाएगा'
यह बिल बंगाली लोगों के साथ भेदभाव की साजिश है। पीएम मोदी ने कहा था कि यह बिल स्वर्णाक्षरों में दर्ज होगा। कहां स्वर्णाक्षरों में दर्ज होगा... पाकिस्तान के राष्ट्रपिता जिन्ना की कब्र पर?
-डेरेक ओ ब्रायन, तृणमूल कांग्रेस
बधाई, लेकिन समर्थन नहीं : बसपा
अल्पसंख्यकों के बारे में सरकार ने सोचा, बधाई। लेकिन हम विधेयक का समर्थन नहीं कर रहे हैं। यह अनुच्छेद 14, 15, 21 का उल्लंघन करता है।
- सतीश चंद मिश्रा, बसपा
'जिस स्कूल में आप पढ़ते हैं, हम वहां के हेडमास्टर'
हमें किसी से देशभक्ति का प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। जिस स्कूल में आप पढ़ते हैं, वहां के हम हेडमास्टर हैं। अगर पाकिस्तान की भाषा पसंद नहीं है तो उसे खत्म कर दो।
- संजय राउत, शिवसेना
बिल अल्पसंख्यकों को बर्बाद कर देगा : देवगौड़ा
नागरिकता संशोधन बिल असांविधानिक और अल्पसंख्यकों को बर्बाद करने वाला है। बिल संविधान के मूल अधिकारों और धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के खिलाफ है। ऐसे बिल का समर्थन नहीं कर सकता जो देश में अशांति फैलाए।
- एचडी देवगौड़ा, पूर्व प्रधानमंत्री
इनर लाइन परमिट मणिपुर-कोहिमा में भी
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इनर लाइन परमिट को मणिपुर में विस्तार करने की अनुमति बुधवार को दे दी। गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में दो दिन पहले इसकी घोषणा की थी। यह परमिट पहले अरुणाचल, नगालैँड, मिजोरम के लिए था। अब मणिपुर चौथा राज्य हो गया है जहां विशेष परमिट की आवश्यकता होगी। परमिट मिलने के बाद ही बाहरी लोग इन राज्यों में कुछ समय के लिए प्रवेश कर सकते हैं। इसके अलावा नगालैंड सरकार ने दीमापुर जिले के लिए भी परमिट का विस्तार कर दिया है। अब तक राज्य का यह जिला इस दायरे में शामिल नहीं था।
पूर्वोत्तर को कई राहत
गृहमंत्री अमित शाह ने दोहराया कि पूर्वोत्तर के राज्यों को बिल में कई राहत दी गई है। मसलन संविधान की छठी अनुसूची वाले क्षेत्र, इनर और इनर परमिट वाले राज्यों में बिल के प्रावधान लागू नहीं होगे। शाह ने कहा, हम असम समझौते का पूरी तरह पालन करेंगे। असम की संस्कृति की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है और हम इसे पूरा करेंगे।
विरोध में आईपीएस का इस्तीफा
बिल के विरोध में महाराष्ट्र कैडर के आईपीएस और मुंबई के आईजी अब्दुल रहमान ने बुधवार रात इस्तीफा दे दिया। उन्होंने ट्वीट किया, बिल संविधान और देश के धार्मिक बहुलवाद के खिलाफ है। मैं नौकरी छोड़ रहा हूं और कल से कार्यालय नहीं जाऊंगा।