CIC ने PoK को आजाद कराने संबंधी सूचना देने से किया इनकार
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केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने 69 साल पहले जम्मू एवं कश्मीर पर हुए पाकिस्तानी कबाली हमले के मुद्दे पर भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में दी गई शिकायत की वर्तमान स्थिति की जानकारी देने से इनकार कर दिया।
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आयोग ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। आयोग ने 1948 में दायर इस अर्जी के आधार पर पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को आजाद कराने के लिए किए जा रहे भारत सरकार के प्रयासों से संबंधित रिकार्ड की जानकारी देने से भी मना कर दिया।
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प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में दायर आरटीआई में यह मांग की गई थी। आरटीआई आवेदनकर्ता ओमप्रकाश काशीराम ने प्रधानमंत्री कार्यालय से जानकारी मांगी थी कि भारत सरकार ने 1948 से अब तक पाकिस्तान से पीओके को आजाद कराने के लिए क्या कदम उठाए हैं।
1947 में जम्मू-कश्मीर में घुसे पाकिस्तानी आतंकियों की मांगी थी जानकारियां
उन्होंने 1947 में जम्मू एवं कश्मीर में घुसे कबाली (पाकिस्तानी जनजाति) आतंकवादियों से संबंधित अन्य विस्तृत जानकारियां भी मांगी थीं। पीएमओ ने इस आरटीआई आवेदन को गृह मंत्रालय को भेज दिया और फिर इसे विदेश मंत्रालय पहुंचा दिया गया।
विदेश मंत्रालय के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी ने कहा कि इन सूचनाओं के खुलासे का देश की सुरक्षा हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। मुख्य सूचना आयुक्त आरके माथुर ने अपने आदेश में कहा कि संयुक्त राष्ट्र में 1948 में दी गई भारत की अर्जी अब भी संवेदनशील है।
विडंबना है कि एक जनवरी, 1948 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को दी गई भारत की शिकायत सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और वेबसाइट पर आसानी से देखी जा सकती है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि सूचना के अधिकार की धारा 8(1)(ए) के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारियों को देने से इनकार किया जा सकता है। आयोग ने पूरे मुद्दे को गहराई से देखने के बाद पाया कि 1948 की शिकायत अर्जी की वर्तमान स्थिति और इससे जुड़े अन्य दस्तावेज के खुलासे से राष्ट्रीय सुरक्षा हितों पर असर पड़ेगा। इसलिए यह सूचना आरटीआई की धारा 8(1)(ए) के दायरे में आ जाती है।