चिटफंड संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश, बढ़ाई गई रकम की अधिकतम सीमा
चिटफंड क्षेत्र का विकास करने और उद्योग के समक्ष आ रही अड़चनों को दूर करने के इरादे से केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने सोमवार को लोकसभा में चिटफंड संशोधन विधेयक 2019 पेश किया। इस मौके पर ठाकुर ने कहा, चिटफंड सालों से छोटे कारोबारों और गरीब वर्ग के लोगों के लिए निवेश का स्रोत रहा है लेकिन कुछ पक्षकारों ने इसमें अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई थी जिसके बाद सरकार ने एक परामर्श समूह बनाया।
ठाकुर ने कहा, 1982 के मूल कानून को चिटफंड विनियमन का उपबंध करने के लिए लाया गया था। संसदीय समिति की सिफारिश पर इसमें अब संशोधन के लिए विधेयक लाया गया है। उक्त विधेयक पिछले लोकसभा सत्र में पेश किया गया था लेकिन लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने के साथ यह निष्प्रभावी हो गया। इसमें व्यक्तियों की संकलित चिट रकम की अधिकतम सीमा को एक लाख रुपये से संशोधित करके तीन लाख करने का प्रावधान किया गया है।
ठाकुर ने कहा, चिटफंड को नकारात्मकता के साथ देखा जाता रहा है, इसलिए इसकी छवि सुधारने के लिए विधेयक में कुछ दूसरे नाम भी सुझाए गए हैं। उन्होंने कहा, चिटफंड अवैध नहीं, वैध कारोबार है। राज्य चिट की सीमा निर्धारित कर सकते हैं। विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के सप्तगिरि उलका ने कहा, यह विधेयक असंगठित क्षेत्र के लिए पर्याप्त नहीं लगता। केवल नाम बदलने से समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि इसका पूरी तरह से विनियमन जरूरी है। उलका ने कहा, पहले से जो चिटफंड हैं, वह इस विधेयक के दायरे में नहीं आएंगे।
'क्या चालू चिटफंड दायरे में आएंगे?'
उलका ने सवाल उठाया कि सरकार इस संबंध में बताए कि क्या पहले से चालू चिटफंड इस विधेयक के दायरे में आ सकते हैं। उन्होंने ओडिशा में चिटफंड के कथित घोटालों का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से इस मामले में सीबीआई जांच की स्थिति पूछी। उन्होंने कहा, चिटफंड में कथित राजनीतिक संरक्षण भी होता है इसलिए सारे अधिकार राज्य सरकार को नहीं दिए जाने चाहिए। उन्होंने विधेयक में और प्रावधान शामिल करने का सुझाव देते हुए इसे स्थाई समिति को भेजने की मांग की।
यह लोकसभा है इसे बंगाल की विधानसभा न बनाएं : स्पीकर
चिटफंड संशोधन विधेयक 2019 पर चर्चा के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आपस में उलझ रहे टीएमसी व भाजपा सांसदों को चेतावनी देते हुए कहा, ये लोकसभा है और इसे बंगाल विधानसभा न बनाएं। भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी ने आरोप लगाया कि पूरी टीएमसी चिटफंड फर्जीवाड़े में शामिल है।
टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी का नाम लिये बिना चटर्जी ने आरोप लगाया कि गरीबों का पैसा लेकर भागने वालों को मुख्यमंत्री का संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चिटफंड घोटाले की 40 फीसदी रकम दलालों के पास गई जो टीएमसी के सदस्य हैं। इस पर टीएमसी सांसद कल्यान बनर्जी भड़क गए और दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। इस पर स्पीकर ने टिप्पणी की कि लोकसभा को बंगाल विधानसभा न बनाया जाए।