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सीमा विवाद के बीच वायुसेना के हेलीकॉप्टरों के इंजन को तैयारी करेगी चीनी स्वामित्व वाली कंपनी
Thu, 08 Oct 2020 03:30 PM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Thu, 08 Oct 2020 03:30 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Social media
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भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर तनाव अपने चरम पर हैं। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों से लेकर वित्तीय रिश्तों तक में खटास आ गई है। सरकार ने चीनी कंपनियों को दिए गए कई परियोजनाओं को उनसे वापस ले लिया है। वहीं, चीनी स्वामित्व वाली 'मोटर सिच' नाम की एक यूक्रेनी कंपनी ने भारतीय वायुसेना के साथ अनुबंध किया है। इस अनुबंध के तहत 'मोटर सिच' वायुसेना के फ्रंटलाइन एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों के ओवरहाल इंजन को तैयार करेगी।
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वायुसेना का कहना है कि इस अनुबंध के लिए 'मोटर सिच' की तरफ से सबसे कम बोली लगाई गई थी, जिस कारण उसके साथ करार किया गया है। यह फैसला काफी हैरानी भरा नजर आता है, क्योंकि हाल ही में भारत सरकार ने देश में चीनी एप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके अलावा चीन से होने वाले निवेश के नियमों को राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कड़ा कर दिया था।
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यूक्रेनी एयरोस्पेस कंपनी 'मोटर सिच' हेलीकॉप्टर और हवाई जहाज इंजन बनाने के मामले में दुनिया के अग्रणी निर्माताओं में से एक है। हालांकि, कंपनी की उन्नत सैन्य तकनीक को हासिल करने के लिए चीन की तरफ से इसकी बड़ी हिस्सेदारी खरीदने का प्रयास किया गया था, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया था। विरोध के स्वर अमेरिका और यूक्रेन की तरफ से उठे थे।
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इस साल अगस्त में सामने आई रॉयटर्स की एक खबर के अनुसार, चीनी निवेशकों ने 'बीजिंग स्काईरिजोन एविएशन' के माध्यम से कई विदेशी कंपनियों के जरिए 'मोटर सिच' की लगभग 80 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की है।
सूत्रों ने बताया, रक्षा मंत्रालय भारतीय वायुसेना के एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों के लिए 'मोटर सिच' के वीके-2500-3 इंजनों की ओवरहॉलिंग को लेकर कंपनी को अनुबंध देने को तैयार है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि जिस रूसी कंपनी से इन हेलिकॉप्टरों को खरीदा गया था, उसने भारतीय वायुसेना को पत्र लिखकर बताया था कि रूसी प्रसाशन ने 'मोटर सिच' का लाइसेंस वापस ले लिया है। इसके बाद भी यह अनुबंध किया जा रहा है।
भारत को वी5 हेलीकॉप्टर की आपूर्ति करने वाली रूसी हेलीकॉप्टर कंपनी ने 28 सितंबर, 2020 को भारतीय वायुसेना को पत्र लिखा था। इस पत्र में कहा गया कि वह अपने मूल उपकरण निर्माता 'जेएससी यूईसी- क्लिमोव' के माध्यम से वी5 हेलीकॉप्टरों के सभी ओवरहालिंग और भागों की आपूर्ति करने का हकदार है। पत्र में भारतीय वायुसेना को यह भी बताया गया कि रूसी संघ ने वीके 2500 इंजन के ओवरहालिंग के लिए 2018 में 'मोटर सिच' से अपने लाइसेंस वापस ले लिए थे।