चीन की दादागीरी, उत्तराखंड में घुसपैठ से पहले की थी हवाई रेकी
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चीन की दादागीरी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उत्तराखंड के बाराहोटी में घुसपैठ से पहले उसने हवाई रेकी की थी। उत्तराखंड के चमोली जिले के इस इलाके में चीन के एयरक्राफ्ट ने उड़ान भरी थी। इलाके में चीन का अतिक्रमण माना जाता है। चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी इलाके में सैन्य प्रशिक्षण भी आयोजित करती रहती है।
चीन के लड़ाकू विमान से रेकी करते वक्त इलाके की तस्वीरें भी ली थीं। बताया जाता है कि पीएलए का एयरक्राफ्ट सिंथेटिक अपर्चर रडार (एसएआर) से लैस है। एसएआर के जरिए यह किसी भी मौसम या रात में हाई-रेजॉल्यूशन तस्वीरें ले सकता है।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इस साल की शुरुआत में चीन का टुपोलोवटू 153एम एयरक्राफ्ट उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा से सटे इलाके में रेकी कर चुका है।
कब मिलेगा चीन को जवाब?
चीन के द्वारा इस्तेमाल किया गया विमान सोवियत संघ की तकनीक पर आधारित है और रडार से बचने के लिए 60 हजार फुट की ऊंचाई तक उड़ सकता है। अमूमन यह विमान 40 हजार फुट की ऊंचाई पर उड़ता है। इतनी ऊंचाई से विमान साफ तस्वीरें ले सकता है और अन्य जानकारियां जुटाने में भी सक्षम है।
सूत्रों की मानें तो पिछले तीन में महीने में चीन के लड़ाकू विमान भारत के इलाके में कई बार घुसपैठ कर चुके हैं। चीन की इस करतूत की जानकारी विदेशी खुफिया एजेंसी के जानकारी साझा करने के बाद सामने आई।
सूत्रों का यह भी कहना है कि पिछले महीने इलाके में तैनात भारतीय बलों की टीम को चीनी सेना ने जाने के लिए कहा था। बताया जा रहा है कि चीनी सेना की 20-25 टुकड़ियां बाराहोती इलाके में गश्त कर चुकी हैं।