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Germany: जर्मन राजदूत का चीन पर निशाना, बोले- 'भारतीय सीमा पर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का उल्लंघन कर रहा ड्रैगन'
Tue, 30 Aug 2022 03:55 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 30 Aug 2022 03:55 PM IST
सार
जर्मन राजदूत ने कहा, "हम उत्तरी सीमा पर भारतीय समस्या से अवगत हैं। हमें नहीं भूलना चाहिए कि चीन का दावा है कि अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है। हम बहुत स्पष्ट रूप से मानते हैं कि यह सीमा पर उल्लंघन है और इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।"
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जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन ने सोमवार को कहा कि भारत की सीमा पर चीन अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का उल्लंघन कर रहा है और इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन साथ ही यूक्रेन पर रूसी हमले पर यूरोप के आक्रोश को भी समझने की जरूरत है। मीडिया से बातचीत में नवनियुक्त राजदूत ने अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावों को 'अपमानजनक' बताया।
राजदूत ने यूक्रेन पर रूसी हमले को पिछले सत्तर वर्षों में दुनिया में सबसे गंभीर आक्रमण करार दिया। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि भारतीय पक्ष भी अच्छी तरह से मानता है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
एकमैन ने कहा कि जब यूक्रेन संकट की बात आती है तो भारत और यूरोप हर एक लाइन पर सहमत नहीं हो सकते थे, लेकिन दोनों पक्षों की बीच समझ थी।
उन्होंने आगे कहा, "हम उत्तरी सीमा पर भारतीय समस्या से अवगत हैं। हमें नहीं भूलना चाहिए कि चीन का दावा है कि अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है। हम बहुत स्पष्ट रूप से मानते हैं कि यह सीमा पर उल्लंघन है और इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।"
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एकमैन ने कहा कि यूक्रेन और चीन के साथ सीमा पर जो रहा है, भारत को उसमें भी अंतर करना चाहिए। उन्होंने कहा, सीमा पर (भारत-चीन सीमा) जो हम देखते हैं, यह (यूक्रेन पर रूसी हमला) उससे बिल्कुल अलग है।
यूक्रेन पर भारत के रुख के बारे में राजदूत ने कहा, मुझे लगता है कि भारतीय पक्ष अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन को अच्छी तरह जानता है। राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के हालिया वोट का स्वागत किया जिससे यूक्रेन के राष्ट्रपति को वैश्विक निकाय को संबोधित करने की अनुमति मिली।
जर्मन राजदूत ने आगे कहा कि यूक्रेन पर रूसी आक्रमण जर्मनी और भारत के बीच लगातार चर्चा का विषय रहा है, इसका खाद्य और उर्जा सुरक्षा सहित कई गुना प्रभाव है।
एकमैन ने कहा कि रूस, जर्मनी के लिए उर्जा आपूर्ति के साथ खिलवाड़ कर रहा है और मॉस्को का उसके साथ 20 प्रतिशत गैस की आपूर्ति करने का अनुबंध है। पिछले कुछ दिनों से इसे बंद कर दिया गया है।
चीनी ऋण एप की जालसाजी को लेकर सरकार मूकदर्शक क्यों बनी हुई है: कांग्रेस
कांग्रेस ने मंगलवार को दावा किया कि चीनी ऋण एप की जालसाजी के कारण कई लोग आत्महत्या करने को मजबूर हुए हैं, लेकिन सरकार ने कोई उचित कार्रवाई नहीं की। पार्टी प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने सवाल किया कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले पर मूकदर्शक क्यों बने हुए हैं?
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पिछले 2 साल में चीनी ऋण एप, जिनकी संख्या लगभग 1100 हो चुकी है, उनमें से 600 अवैध हैं। 2017-2020 के बीच इन ऋण एप से डिजिटल ट्रांजेक्शन में 12 गुना की वृद्धि हुई है।’’ वल्लभ ने दावा किया, ‘‘चीनी ऋण एप के कारण देश के 52 लोग आत्महत्या कर चुके हैं।’’
उनका कहना था, ‘‘कोरोना के बाद मध्यम व निम्न आय वर्ग के परिवारों को भयंकर आर्थिक चोट लगी। एक तो उनकी नौकरी गई ऊपर से महंगाई की मार। इस दौरान रोजमर्रा के खर्च के लिए वे इन चीनी लोन एप के शिकंजे में फंस गए।’’
कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया, ‘‘इन चीनी ऋण लोन एप के द्वारा चीन के पास हवाला के जरिए 500 करोड़ रुपये भेजे गए हैं। मतलब पहले बेरोजगारी दो, फिर महंगाई दो और फिर इनसे निपटने के लिए जनता को चीनी एप से पैसा लेने के लिए बोल दो।’’
उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या जांच एजेंसियों का काम सिर्फ विपक्षी दल के नेताओं को फिजूल में परेशान करना है या इन 500 करोड़ रुपयों की भी जांच की जाएगी? क्या डिजिटल इंडिया का मतलब यह है कि भारत के लोगों का डाटा चीन की कंपनियों को प्लेट में सजाकर दे दिया जाए?’’ वल्लभ ने यह भी पूछा, ‘‘ भारत सरकार किसका इंतजार कर रही है? सरकार और मोदी जी मूकदर्शक क्यों बने हुए हैं?’’
उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद के बीते मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में कहा था कि सरकार संदिग्ध ऋण एप के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा था कि उन भारतीय लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है जिन्होंने ऐसे एप को स्थापित करने में मदद दी है।
वित्त मंत्री ने प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक सवाल का जवाब देते हुए यह भी कहा था कि ज्यादातर संदिग्ध एप एक विशेष देश से जुड़े हैं और ऋण लेने वाले कई लोगों को परेशान किया जा रहा है और इन एप के जरिए पैसे उगाहे जा रहे हैं।
मंत्री से चीनी कंपनियों से जुड़ी संदिग्ध डिजिटल ऋण एप को लेकर सवाल किया गया था जो ऋण देने में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों का पालन नहीं करते हैं।
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राजदूत ने यूक्रेन पर रूसी हमले को पिछले सत्तर वर्षों में दुनिया में सबसे गंभीर आक्रमण करार दिया। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि भारतीय पक्ष भी अच्छी तरह से मानता है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
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एकमैन ने कहा कि जब यूक्रेन संकट की बात आती है तो भारत और यूरोप हर एक लाइन पर सहमत नहीं हो सकते थे, लेकिन दोनों पक्षों की बीच समझ थी।
उन्होंने आगे कहा, "हम उत्तरी सीमा पर भारतीय समस्या से अवगत हैं। हमें नहीं भूलना चाहिए कि चीन का दावा है कि अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है। हम बहुत स्पष्ट रूप से मानते हैं कि यह सीमा पर उल्लंघन है और इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।"
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एकमैन ने कहा कि यूक्रेन और चीन के साथ सीमा पर जो रहा है, भारत को उसमें भी अंतर करना चाहिए। उन्होंने कहा, सीमा पर (भारत-चीन सीमा) जो हम देखते हैं, यह (यूक्रेन पर रूसी हमला) उससे बिल्कुल अलग है।
यूक्रेन पर भारत के रुख के बारे में राजदूत ने कहा, मुझे लगता है कि भारतीय पक्ष अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन को अच्छी तरह जानता है। राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के हालिया वोट का स्वागत किया जिससे यूक्रेन के राष्ट्रपति को वैश्विक निकाय को संबोधित करने की अनुमति मिली।
जर्मन राजदूत ने आगे कहा कि यूक्रेन पर रूसी आक्रमण जर्मनी और भारत के बीच लगातार चर्चा का विषय रहा है, इसका खाद्य और उर्जा सुरक्षा सहित कई गुना प्रभाव है।
एकमैन ने कहा कि रूस, जर्मनी के लिए उर्जा आपूर्ति के साथ खिलवाड़ कर रहा है और मॉस्को का उसके साथ 20 प्रतिशत गैस की आपूर्ति करने का अनुबंध है। पिछले कुछ दिनों से इसे बंद कर दिया गया है।
चीनी ऋण एप की जालसाजी को लेकर सरकार मूकदर्शक क्यों बनी हुई है: कांग्रेस
कांग्रेस ने मंगलवार को दावा किया कि चीनी ऋण एप की जालसाजी के कारण कई लोग आत्महत्या करने को मजबूर हुए हैं, लेकिन सरकार ने कोई उचित कार्रवाई नहीं की। पार्टी प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने सवाल किया कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले पर मूकदर्शक क्यों बने हुए हैं?
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पिछले 2 साल में चीनी ऋण एप, जिनकी संख्या लगभग 1100 हो चुकी है, उनमें से 600 अवैध हैं। 2017-2020 के बीच इन ऋण एप से डिजिटल ट्रांजेक्शन में 12 गुना की वृद्धि हुई है।’’ वल्लभ ने दावा किया, ‘‘चीनी ऋण एप के कारण देश के 52 लोग आत्महत्या कर चुके हैं।’’
उनका कहना था, ‘‘कोरोना के बाद मध्यम व निम्न आय वर्ग के परिवारों को भयंकर आर्थिक चोट लगी। एक तो उनकी नौकरी गई ऊपर से महंगाई की मार। इस दौरान रोजमर्रा के खर्च के लिए वे इन चीनी लोन एप के शिकंजे में फंस गए।’’
कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया, ‘‘इन चीनी ऋण लोन एप के द्वारा चीन के पास हवाला के जरिए 500 करोड़ रुपये भेजे गए हैं। मतलब पहले बेरोजगारी दो, फिर महंगाई दो और फिर इनसे निपटने के लिए जनता को चीनी एप से पैसा लेने के लिए बोल दो।’’
उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या जांच एजेंसियों का काम सिर्फ विपक्षी दल के नेताओं को फिजूल में परेशान करना है या इन 500 करोड़ रुपयों की भी जांच की जाएगी? क्या डिजिटल इंडिया का मतलब यह है कि भारत के लोगों का डाटा चीन की कंपनियों को प्लेट में सजाकर दे दिया जाए?’’ वल्लभ ने यह भी पूछा, ‘‘ भारत सरकार किसका इंतजार कर रही है? सरकार और मोदी जी मूकदर्शक क्यों बने हुए हैं?’’
उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद के बीते मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में कहा था कि सरकार संदिग्ध ऋण एप के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा था कि उन भारतीय लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है जिन्होंने ऐसे एप को स्थापित करने में मदद दी है।
वित्त मंत्री ने प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक सवाल का जवाब देते हुए यह भी कहा था कि ज्यादातर संदिग्ध एप एक विशेष देश से जुड़े हैं और ऋण लेने वाले कई लोगों को परेशान किया जा रहा है और इन एप के जरिए पैसे उगाहे जा रहे हैं।
मंत्री से चीनी कंपनियों से जुड़ी संदिग्ध डिजिटल ऋण एप को लेकर सवाल किया गया था जो ऋण देने में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों का पालन नहीं करते हैं।