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चीन ने कब्जाए दक्षिणी सागर के 250 द्वीप, भारत के लिए मुश्किल
विपिन धनकड़/अमर उजाला, मेरठ
Updated Fri, 08 Apr 2016 05:04 AM IST
सार
- दक्षिण एशिया के लिए चिंता का विषय बनी चीन की विस्तार नीति
- शोध में हुआ खुलासा, मैरीन समिट में पेश की जाएगी रिपोर्ट
- चीन के प्रभाव को कम करने में भारत-जापान नाकाम
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South China Sea
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
हिंद महासागर में चीन का दबदबा बढ़ता जा रहा है। ड्रैगन ने छोटे-बड़े 250 द्वीप अपने कब्जे में कर लिए हैं। चीन के समुद्री सीमा विस्तार और अतिक्रमण से दक्षिण एशिया के देशों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं।
भारत और जापान चीन के प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह प्रयास नाकाफी सा दिख रहा है। इन बातों का खुलासा एक शोध पत्र में हुआ है। मैरीन समिट में इसी माह इस शोध पत्र की रिपोर्ट को प्रस्तुत किया जाएगा। नेवी और अन्य सक्षम अधिकारियों के इनपुट के आधार पर यह शोध पत्र तैयार किया गया है।
मेरठ कॉलेज के डिफेंस स्टडी डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर संजय कुमार ने अपने शोध पत्र में समुद्र में चीन के बढ़ते वर्चस्व को रेखांकित किया है। अंतरराष्ट्रीय जर्नल सुरक्षा चिंतन में प्रकाशित शोध पत्र में डॉ. संजय ने कहा है कि चीन ने दक्षिणी सागर में छोटे-बड़े लगभग 250 द्वीपों पर अपना झंडा फहरा दिया है।
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अब यह द्वीप पूरी तरह से चीन के कब्जे में हैं। इन द्वीपों का कुल क्षेत्रफल 15 किमी है। कई पर पोर्ट भी बना दिए गए हैं। इस वजह से साउथ एशिया के देश भारत, इंडोनेशिया, थाईलैंड, जापान, म्यांमार और सिंगापुर चिंतित हैं। कब्जा इस प्रकार किया गया है कि यह द्वीप उक्त देशों की सीमा के चारों और हैं। ड्रैगन सुनियोजित ढंग से अपनी सीमा का विस्तार कर रहा है।
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भारत और जापान चीन के प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह प्रयास नाकाफी सा दिख रहा है। इन बातों का खुलासा एक शोध पत्र में हुआ है। मैरीन समिट में इसी माह इस शोध पत्र की रिपोर्ट को प्रस्तुत किया जाएगा। नेवी और अन्य सक्षम अधिकारियों के इनपुट के आधार पर यह शोध पत्र तैयार किया गया है।
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मेरठ कॉलेज के डिफेंस स्टडी डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर संजय कुमार ने अपने शोध पत्र में समुद्र में चीन के बढ़ते वर्चस्व को रेखांकित किया है। अंतरराष्ट्रीय जर्नल सुरक्षा चिंतन में प्रकाशित शोध पत्र में डॉ. संजय ने कहा है कि चीन ने दक्षिणी सागर में छोटे-बड़े लगभग 250 द्वीपों पर अपना झंडा फहरा दिया है।
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अब यह द्वीप पूरी तरह से चीन के कब्जे में हैं। इन द्वीपों का कुल क्षेत्रफल 15 किमी है। कई पर पोर्ट भी बना दिए गए हैं। इस वजह से साउथ एशिया के देश भारत, इंडोनेशिया, थाईलैंड, जापान, म्यांमार और सिंगापुर चिंतित हैं। कब्जा इस प्रकार किया गया है कि यह द्वीप उक्त देशों की सीमा के चारों और हैं। ड्रैगन सुनियोजित ढंग से अपनी सीमा का विस्तार कर रहा है।
द्वीपों पर कब्जे के पीछे चीन के दो बड़े मकसद
india-china
- फोटो : india-china
समुद्र के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक जहां तक देश का कब्जा है, उससे 200 मील आगे तक देश का क्षेत्र माना जाएगा। डॉ. संजय का कहना है चीन के इसमें दो बड़े हित छिपे हैं। पहला द्वीपों पर खनिजों का भंडार है। अब यह चीन की संपदा हो गए है। दूसरा भविष्य में वह पड़ोसी देशों से व्यापार में चुंगी वसूल सकता है।
दुनिया में 95 फीसदी व्यापार समुद्री मार्ग से ही होता है। साउथ एशिया के देश इससे चिंतित हैं। पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश के पोर्ट का चीन पहले से ही इस्तेमाल कर रहा है। शोध पत्र में सुझाव दिया गया है कि साउथ एशिया के देशों को द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर करना होगा। भारत और जापान के कंधों पर इसकी जिम्मेदारी है। दोनों देशों को ऐसे कदम उठाने होंगे कि साउथ एशिया के राष्ट्रों के हितों पर इसका असर न पड़े।
मुंबई में 14 से मैरीन समिट
14 से 16 अप्रैल तक मुंबई में मैरीन समिट होने जा रही है। इसमें समुद्र से जुड़े व्यापारी, निवेशक, सैन्य अधिकारी, रिसर्चर और शिक्षाविद् को बुलाया है। डॉ. संजय कुमार को भी समिट से बुलावा है। वह मैरीन समिट में शोध पत्र की रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
दुनिया में 95 फीसदी व्यापार समुद्री मार्ग से ही होता है। साउथ एशिया के देश इससे चिंतित हैं। पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश के पोर्ट का चीन पहले से ही इस्तेमाल कर रहा है। शोध पत्र में सुझाव दिया गया है कि साउथ एशिया के देशों को द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर करना होगा। भारत और जापान के कंधों पर इसकी जिम्मेदारी है। दोनों देशों को ऐसे कदम उठाने होंगे कि साउथ एशिया के राष्ट्रों के हितों पर इसका असर न पड़े।
मुंबई में 14 से मैरीन समिट
14 से 16 अप्रैल तक मुंबई में मैरीन समिट होने जा रही है। इसमें समुद्र से जुड़े व्यापारी, निवेशक, सैन्य अधिकारी, रिसर्चर और शिक्षाविद् को बुलाया है। डॉ. संजय कुमार को भी समिट से बुलावा है। वह मैरीन समिट में शोध पत्र की रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।