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भारत और चीन के बीच बढ़ेगा व्यापार, कम होगी आयात-निर्यात की बढ़ती खाई

Mon, 26 Mar 2018 05:59 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 26 Mar 2018 05:59 PM IST
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China and india discuss ways to boost trade says Commerce and Industry Minister Suresh Prabhu 
- फोटो : SELF

चीन ने सोमवार को दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा (आयात और निर्यात के बीच अंतर) पर भारत की चिंताओं को दूर करने का वादा किया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी।

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सोमवार को संयुक्त आर्थिक समूह की बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के विभिन्न विकल्पों पर बातचीत हुई। भारत और चीन के बीच निवेश को कैसे प्रभावी रूप से बढ़ाया जाए इस पर गहन चर्चा हुई। इस बैठक में चीनी वाणिज्य मंत्री झोंग शान और भारतीय केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने हिस्सा लिया।
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बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते गुरुवार को चीन के खिलाफ व्यापार गोपनीयता और तकनीकी की चोरी के लिए आर्थिक दंड के रूप में 60 अरब डॉलर के वार्षिक शुल्क का ऐलान किया था। 
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ट्रंप प्रशासन का मानना है कि चीन ने अमेरिकी कंपनियों की अरबों की कमाई को लूट और हजारों नौकरियों को खत्म कर दिया। ट्रंप ने व्हाइट हाउस के राजनयिक कक्ष में चीन पर लगाए गए शुल्क की घोषणा के दौरान कहा, 'जैसे के साथ तैसा। यानि अगर वह हमसे वसूलेंगे, तो हम भी ऐसा ही करेंगे।' ट्रंप के इस कदम को लेकर वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ने की आशंका है।

दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते आर्थिक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ ट्रंप का यह अब तक का सबसे आक्रामक कदम होगा। व्हाइट हाउस प्रवक्ता राज शाह के मुताबिक ये प्रतिबंध अमेरिकी बौद्धिक संपदा की चोरी के मामले में लगाए जा रहे हैं।

आरोप है कि अमेरिकी कंपनियों को चीन अपनी सरकारी कंपनियों के साथ बौद्धिक संपदा साझा करने के लिए मजबूर कर रहा है। इससे निपटने को चीन के साथ होने वाले स्टील व एल्युमीनियम आयात पर 100 से ज्यादा श्रेणियों में चीनी निवेश को अमेरिका प्रतिबंधित करेगा। इनमें जूते व कपड़े से लेकर इलेक्ट्रॉनिक आयटम तक सारे सामान शामिल हैं। 

चीन की महत्वाकांक्षी औद्योगिक नीति को रोकने के लिए चीनी निवेश पर प्रतिबंध लगाने के लिए ट्रंप अपने वित्त मंत्रालय को निर्देश देंगे। इस आक्रामक कदम का मकसद बौद्धिक संपदा और मोबाइल तकनीकी जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों पर नियंत्रण करना है।


अपने चुनावी अभियान में ट्रंप ने चीन को आर्थिक दुश्मन करार देते हुए चीन को अमेरिकी नीतियों का इतना फायदा उठाने वाला देश बताया था जितना इतिहास में किसी ने नहीं उठाया। ट्रंप यह जानने के बावजूद यह कार्रवाई कर रहे हैं कि उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए उन्हें चीनी समर्थन की जरूरत है।

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