{"_id":"5b3f8c574f1c1bc0248b4c74","slug":"china-and-india-confused-over-iran-us-oil-war","type":"story","status":"publish","title_hn":"महंगा तेल या फिर ट्रंप? भारत और चीन इन दोनों में किसे चुनेंगे","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
महंगा तेल या फिर ट्रंप? भारत और चीन इन दोनों में किसे चुनेंगे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 07 Jul 2018 03:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत और चीन इस समय कच्चे तेल को लेकर बेहद ही मुश्किल परिस्थिति में फंसे हुए हैं। भारत-चीन इसपर निर्णय नहीं ले पा रहे हैं कि वह ट्रंप के फैसले को माने या फिर तेल के बढ़ते दामों की मार सहें।
विज्ञापन
दरअसल अमेरिका ने ईरान को अपने तेल का निर्यात नहीं करने की चेतावनी दी है। मालूम हो कि अमेरिका ने पिछले हफ्ते ही भारत समेत अन्य देशों को ईरान से तेल आयात नहीं करने की चेतावनी दी थी।
विज्ञापन
वहीं चीन और भारत बीते तीन महीने से हर दिन करीब 14 लाख बैरल क्रूड ऑइल का आयात किया है। भारत चीन के बाद ईरान से कच्चा तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। ऐसे में चीन और भारत के सामने यह सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो गई है कि वह किस ओर कदम बढ़ाए।
विज्ञापन
ईरान ने अप्रैल 2017 और जनवरी 2018 (2017-18 वित्त वर्ष के पहले 10 महीने) के दौरान 18.4 मिलियन टन कच्चा तेल निर्यात किया था। अमेरिका चीन और भारत समेत सभी देशों पर ईरान से तेल खरीद पूरी तरह से रोकने का दबाव बना रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका आगे भी इसी तरह ईरान पर यह प्रतिबंध जारी रखता है तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ओपेक देशों से तेल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए लगातार दबाव बना रहा है। खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि सऊदी अरब जल्द से जल्द तेल उत्पादन बढ़ाने की ओर कदम उठाए।
कच्चा तेल निर्धारित करेगा व्यापार युद्ध आगे बढ़ेगा या नहीं
इस साल अमेरिका ने औसतन 534000 बैरल प्रति दिन के हिसाब से चीन को कच्चे तेल निर्यात किया है। लेकिन जिस तरह से अमेरिका द्वारा वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाए जा रहे हैं और चीन भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है तो ऐसे में चीन के पास विकल्प है कि वह ईरान से तेल का निर्यात बढ़ा दे और अमेरिका को कुछ हदतक दरकिनार कर दे। अगर ऐसा होता है तो व्यापार युद्ध एक कदम और आगे बढ़ सकता है।