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LAC Dispute: चीन की पूर्वी लद्दाख क्षेत्र पर बुरी नजर, मजबूत रणनीतिक उपस्थिति के लिए बढ़ा रहा सैन्य ताकत

Thu, 26 Jan 2023 10:30 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Thu, 26 Jan 2023 10:30 PM IST
सार

आईपीएस अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए नोट में कहा गया है कि चीन की वन बेल्ट वन रोड (OBOR) या चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) परियोजना को देखते हुए भारत की सीमा रक्षा रणनीति को भविष्य के लिए आर्थिक प्रोत्साहन के साथ एक नया अर्थ और उद्देश्य दिया जाना चाहिए। 

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China aggressively building army to dominate in eastern ladakh sector for strong strategic need Border Tourism
सांकेतिक तस्वीर (फाइल फोटो) - फोटो : पीआरओ

विस्तार

चीन पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में मजबूत आर्थिक और सामरिक मौजूदगी चाहता है। यही वजह है कि चीन अधिक क्षेत्रों पर दावा करने के लिए भारत की ओर बिना बाड़ वाले स्थानों पर हावी होने के लिए आक्रामक रूप से अपनी सैन्य ताकत का विस्तार कर रहा है। यह बातें पिछले सप्ताह दिल्ली में हुई डीजीपी और आईजीपी की बैठक में प्रस्तुत किए गए नोट में कही गई हैं।

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आईपीएस अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए नोट में कहा गया है कि चीन की वन बेल्ट वन रोड (OBOR) या चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) परियोजना को देखते हुए भारत की सीमा रक्षा रणनीति को भविष्य के लिए आर्थिक प्रोत्साहन के साथ एक नया अर्थ और उद्देश्य दिया जाना चाहिए। नोट में सुझाव दिया गया है कि रणनीति क्षेत्र-विशिष्ट होनी चाहिए, जैसे- तुरतुक या सियाचिन सेक्टर और दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) या डेपसांग के मैदानी क्षेत्रों में सीमा पर्यटन को तेजी से बढ़ावा दिया जा सकता है।
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काराकोरम दर्रे को घरेलू पर्यटकों के लिए खोलने का सुझाव
नोट में कहा गया कि दौलत बेग ओल्डी में काराकोरम दर्रे को घरेलू पर्यटकों के लिए खोलने से विचारों में दूरदर्शिता आएगी, जिसका भारत के रेशम मार्ग के इतिहास से प्राचीन संबंध है। यह भी सुझाव दिया गया है कि 1930 के दशक के प्रसिद्ध दर्रे पर अभियानों को फिर से शुरू किया जा सकता है और ट्रेकिंग व लंबी पैदल यात्रा के क्षेत्रों को सीमित तरीके से खोला जा सकता है।
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नोट में कहा गया है कि चीन पूर्वी सीमा क्षेत्र में आक्रामक रूप से सैन्य ढांचे का निर्माण कर रहा है ताकि वह भारत की ओर पेट्रोलिंग पॉइंट्स (पीपी) द्वारा चिन्हित गैर-बाड़ वाले क्षेत्रों पर हावी हो सके और वर्चस्व के लिए क्षेत्र पर अपना दावा कर सके।

लद्दाख में तैनात एक अधिकारी ने नोट में लिखा है कि बातचीत के दौरान एक वरिष्ठ सैन्यकर्मी (अग्रिम मोर्चे पर तैनात) ने उनसे कहा कि अगर भारत 400 मीटर पीछे हटकर चार साल के लिए चीनी सेना के साथ शांति समझौता कर सकता है तो यह बेहतर होगा। यह नोट उन रिपोर्ट्स के बीच आया है, जिसमें दावा किया गया है कि प्रतिबंध या गश्त न करने के कारण 65 पेट्रोलिंग पॉइंट्स (पीपी) में से 26 पीपी में भारतीय सुरक्षा बलों की उपस्थिति खत्म हो गई है।

नोट में यह भी कहा गया है कि चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना ने पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में सड़क और सैन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए चीनी सेना पीएलए को एक बड़ा उद्देश्य दिया है, जो चीनी उत्पादकों को मध्य एशियाई बाजार और पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह से जोड़ने वाली सीपीईसी परियोजना में भी मदद करेगा।


डीजीपी बैठक में प्रस्तुत लेखों को वेबसाइट से हटाया गया 
सूत्रों ने बताया कि देशभर के पुलिस महानिदेशकों और पुलिस महानिरीक्षकों की बैठक में जमा किए गए लेखों के सार-संग्रह को आधिकारिक वेबसाइट से हटा दिया गया है। यह लेख भारतीय पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर डाले गए थे। लेखों में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया गया था, जिसमें भारत-चीन सीमा पर स्थिति, अग्रिम क्षेत्रों में चीन का आक्रामक व्यवहार, मुस्लिम युवाओं के बीच कट्टरवाद राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती जैसे मुद्दे शामिल थे। सूत्रों ने कहा कि अब डीजीपी बैठक 2022 से संबंधित सभी लेख हटा दिए गए हैं। हालांकि, 2021 में हुई बैठक से संबंधित लेख वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। वेबसाइट से लेखों को हटाने का कोई कारण नहीं बताया गया है।
 

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