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लब आजाद हैं....के साथ हम लिखेंगे महिलाओं के स्वाभिमान की कहानी

Wed, 15 Nov 2017 02:18 PM IST
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा Updated Wed, 15 Nov 2017 02:18 PM IST
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childrens day special labazaad hain mission empowering women girl child raped and sexually abused
shamina - फोटो : social media
वर्ष 2015 में भारत में 34 हजार से ज्यादा रेप के मामले दर्ज किए गए थे, 2016 में भी महिलाओं के साथ होने वाले बलात्कार के आकंड़े इसी के आसपास ही रहे। अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो 18 से 30 साल की उम्र वाली महिलाओं के साथ बलात्कार के मामले 17000 से अधिक मामले सामने आए जिसमें 33 हजार से अधिक के मामलों में रेपिस्ट जानकार था। 
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जब किसी बच्ची या महिला के साथ रेप होता है तो दर्द से सिर्फ महिला या बच्ची ही नहीं गुजरती है बल्कि उसका पूरा परिवार उस दर्द को झेलता है। कई बार इस ट्रॉमा से परिवार वालों को मुहल्ले से लेकर गांव-शहर तक छोड़ना पड़ता है।  
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यही नहीं इंसाफ की चाह में कई बार घरबार तक बिक जाते हैं वहीं घरवालों को इतना कोर्ट का चक्कर लगाना पड़ता है कि लगी लगाई नौकरी तक छूट जाती है। ऐसे ही दर्द से जूझ रही रेप पीड़ितों को सशक्त बनाने में जुटी है पावर फाउंडेशन।  
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बलात्कार पीड़ित महिलाओं और बच्चियों को सशक्त बनाने के लिए आगे आईं हैं

childrens day special labazaad hain mission empowering women girl child raped and sexually abused
शमीना - फोटो : social media
पावर फाउंडेशन की निदेशक शमीना शफीक बलात्कार पीड़ित महिलाओं और बच्चियों को सशक्त बनाने के लिए आगे आईं हैं। वह कहती हैं जब किसी बच्ची या फिर महिला के साथ बलात्कार होता है तो सिर्फ वो दर्द से नहीं गुजरती है बल्कि पूरा परिवार गुजरता है, वो हर दिन टूटता और बिखरता है। पीड़िताओं और परिवारवालों को केस रजिस्टर करने से लेकर इंसाफ के लिए पुलिस और कोर्ट के इतने चक्कर लगाने पड़ते हैं कि वो अंदर तक टूट जाते हैं।

उन्हें लीगल सपोर्ट तक नहीं मिलता है इन बच्चियों और परिवारवार वालों को। ऐसी ही एक बच्ची को सशक्त बनाने के लिए शमीना ने पावर फाउंडेशन बनाया है और प्रोजेक्ट का नाम रखा है लब आजाद हैं....शमीना बताती हैं कि दिल्ली-एनसीआर और यूपी के दूर-दराज के क्षेत्रो से अभी तक 30 रेप विक्टिम के साथ काम कि शुरुआत की है।

शमीना इन महिलाओं और बच्चियों को आत्मनिर्भर, शसक्त बनाने और जीवनस्तर को सुधारने के लिए पढ़ाने से लेकर सिलाई बिनाई तक का काम सिखा रही हैं। शमीना बताती हैं कि हम उन रेप विक्टिम को सपोर्ट कर रहे हैं जो कमजोर वर्ग से आती हैं, जिन्हें इमोशनल सपोर्ट की जरूरत होती है लेकिन समाज उन्हें दुत्कारता है। 
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