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स्कूलों में सुरक्षित नहीं है बचपन

Sat, 11 Nov 2017 05:34 PM IST
amarujala.com: presented by-पूजा मेहरोत्रा
amarujala.com: presented by-पूजा मेहरोत्रा Updated Sat, 11 Nov 2017 05:34 PM IST
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childrens day indian schools are not safe for child report says every three child two are molested
बच्चे स्कूलों में सुरक्षित नहीं हैं। राजधानी सहित देश के स्कूलों से बच्चों के साथ छेड़-छाड़ और हत्याओं के ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिसने अभिभावकों  को डरा कर रख दिया है। पैरेंट्स अपने बच्चों को स्कूल भेज देते हैं उनके बाद उनकी जान सांसत में बनी रहती है कि पता नहीं कब क्या खबर आ जाए। दिल्ली एनसीआर सहित देश के कई स्कूलों से बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार, हत्या की खबरें चौंका रही हैं।    
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दिल्ली से सटे गुरुग्राम में 8 सिंतबर को सात साल के प्रद्युम्न का शव स्कूल पहुंचने के महज 15 मिनट बाद ही स्कूल के टॉयलेट में मिला था जबकि अगस्त में गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित जीडी गोयनका स्कूल में अरमान सहगल की मौत से पूरा एनसीआर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सहम गया था।
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2016 में भी वसंत कुंज स्थित रायन स्कूल इंटरनेशल के एक छात्र देवांश की मौत ने भी स्कूल में बच्चों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाया था। देवांश के साथ स्कूल में कुकर्म (अप्राकृतिक कृत्य) की भी आशंका जताई गई थी देवांश के ऐनल प्वाइंट पर रूई लगी थी जबकि देवांश का शव पानी टंकी के पास मिला था। बड़ा सवाल ये है  कि देवांश पानी टंकी के पास कैसे पहुंचा और उसके शव को टंकी से कैसे निकाला गया। 
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बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ शिक्षा की मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा की भी जरूरत होती है। लेकिन अगर पिछले कुछ दिनों में बच्चों के साथ घट रही घटनाओं पर नजर डालें तो ज्यादातर स्कूल और सरकारों ने इसपर कुछ खास ध्यान नहीं दिया है।

बच्चों के यौन शोषण के 70 फीसदी मामले सामने भी नहीं आ पाते हैं

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पिछले कुछ महीनों या सालों में बच्चों की सुरक्षा के इंतजामों की कमी के चलते कई नौनिहालों को जान से हाथ तक धोना पड़ा है। बच्चों के साथ बढ़ रहे मामलों पर राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग ने स्कूलों से जरूरी सुरक्षा इंतजाम करने की गाइड लाइन तक जारी किया है। लेकिन फिरभी देश के ज्यादातर स्कूलों में सुरक्षा का इंतजाम संतोषजनक नहीं है।

महिला एवं विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार हर 3 में से 2 बच्चे शारीरिक शोषण का शिकार हो रहे हैं

वैसे सरकार ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए नियम और कानून तो कई बनाएं हैं लेकिन सब फाइलों में ही दफन हैं। चाहें वो स्कूल में खेलकूद को लेकर नियम हो या फिर हर स्कूल में सुरक्षित स्थानों का होना। या फिर बात करें स्कूलों में बिजली से सुरक्षा व्यवस्था की। हर मामलें में निजी स्कूलों से लेकर सरकारी स्कूल तक अनदेखी का नजारा देखने को मिल रहा है। 

एक बाद एक बच्चों से स्कूलों में हो रहे कुकर्मों और शारीरिक शोषण के बाद स्कूल प्रशासन से अभिभावक डरे हुए हैं। महिला एवं विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार हर 3 में से 2 बच्चे शारीरिक शोषण का शिकार हो रहे हैं। जबकि 70 फीसदी मामले सामने भी नहीं आ पाते हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग देश के संरक्षित और सुरक्षित स्कूलों पर एक सर्वेक्षण करा रहा है।इस सर्वे में देशभर के करीब 80 हजार स्कूलों के करीब 8 लाख छात्रों से बातचीत की जाएगी। 
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