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कोरोना टीकाकरण: 44 करोड़ बच्चों को दिया जाना है टीका, बीमार को पहले, स्वस्थ की बारी बाद में

Mon, 04 Oct 2021 05:55 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 04 Oct 2021 05:55 AM IST
सार

बच्चों के टीकों के विकल्प पर डॉ. अरोड़ा ने कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा बनाया जा रहा कोवोवैक्स आने वाले हफ्तों में उपलब्ध हो सकता है।

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Children suffering from other diseases will also be given priority in vaccination
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

देश में बच्चों के कोविड-19 टीकाकरण में ऐसे बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो किन्हीं अन्य बीमारियों से भी ग्रस्त हैं। राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा ने बताया कि यह बच्चे चाहे किसी भी गंभीर बीमारी से पीड़ित हों, उन्हें तुरंत कोरोना वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता दिलवाना जरूरी है। इन बच्चों के बाद बाकी स्वस्थ बच्चों का टीकाकरण होगा।

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डॉ. अरोड़ा ने बताया, इन हाई-रिस्क बच्चों की पहचान के लिए प्रयास हो रहे हैं। इस श्रेणी में ऐसे बच्चों को रखा गया है जिनके संक्रमित होने पर गंभीर रूप से बीमार पड़ने और अस्पताल में भर्ती होने की आशंका है। इसके लिए अगले दो हफ्ते में प्राथमिकता सूची बनाई जाएगी।
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उल्लेखनीय है कि पिछले महीने भारतीय औषधि महानियंत्रक ने 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों व वयस्कों के लिए डीएनए आधारित जायडस कैडिला टीके के आपात उपयोग की अनुमति दी थी। इसे लेकर सरकार व कंपनी में बातचीत हो रही है और इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में उपलब्ध करवाने का इंतजार हो रहा है।
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टीके के संयुक्त परीक्षण में डब्ल्यूएचओ व एम्स को इस टीके की वजह से 18 वर्ष से कम उम्र के समूह में सिरोप्रवैलेंस 55.7 और 18 वर्ष से अधिक उम्र के समूह में 63.5 प्रतिशत मिला था। यह बिना सुई के दिया जाने वाला यह टीका अहमदाबाद में जायडस कैडिला कंपनी बना रही है।

44 करोड़ बच्चों को दिया जाना है टीका
डॉ. अरोड़ा ने कहा कि बच्चे इस वायरस के रोगवाहक हो सकते हैं, वे खुद संक्रमित नहीं होते। इसलिए उनके इर्द-गिर्द रहने वाले वयस्कों का टीकाकरण बहुत जरूरी है। यह उन्हें एक सुरक्षा घेरा देता है। देश का लक्ष्य सभी वयस्कों का टीकाकरण है, जिसके बाद 18 साल से कम उम्र के करीब 44 करोड़ बच्चों का तेजी से टीकाकरण होगा।

साल के आखिर तक और आएंगे टीके
बच्चों के टीकों के विकल्प पर डॉ. अरोड़ा ने कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा बनाया जा रहा कोवोवैक्स आने वाले हफ्तों में उपलब्ध हो सकता है। यह पांच से 17 साल के बच्चों के लिए है। कुछ और भी टीके आ सकते हैं, जिससे तीन विकल्प तक मिलेंगे।।


केंद्र व कंपनी में बातचीत अंतिम चरण में
इस बीच, कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर ने रविवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया से मिलने के बाद कहा कि बच्चों के टीके के लिए केंद्र की जायडस कैडिला कंपनी से बातचीत अंतिम चरण में है। भारत बायोटेक द्वारा तैयार की जा रही नाक से दी जाने वाली वैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण नवंबर-दिसंबर में हो सकता है।

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