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छोटे बच्चों का टीकाकरण: एनटीएजीआई ने स्वास्थ्य संस्थाओं से मांगे कोविड प्रतिरक्षा पर आंकड़े, समीक्षा के बाद तय होगा वैक्सीनेशन शेड्यूल

Wed, 11 May 2022 03:56 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 11 May 2022 03:56 PM IST
सार

एनटीएजीआई से जुड़े सूत्र ने कहा कि स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) चंडीगढ़ सहित विभिन्न संस्थाओं ने पहले ही युवा बच्चों में संक्रमण और प्रतिरक्षा के स्तर को समझने के लिए अध्ययन किए हैं। अब हम उन विश्लेषणों को देखना चाहते हैं। अगली बैठक में इस बात पर भी जोर दिया जाएगा कि आबादी में उच्च टीकाकरण की दर को और अधिक कैसे बढ़ाया जा सकता है...

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child vaccination: For the vaccination of young children, the government and institutions have started preparation on its level
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

देश में छोटे बच्चों के लिए वैक्सीनेशन का रास्ता साफ हो सके, इसके लिए सरकार और संस्थाओं ने अपने स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) ने बच्चों के वैक्सीनेशन पर राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) सहित सार्वजनिक क्षेत्र की विभिन्न संस्थाओं से कोविड-19 के खिलाफ युवा बच्चों में मौजूद प्रतिरक्षा पर विश्लेषण आंकड़े देने को कहा है। दरअसल, एनटीएजीआई इस मसले पर अगले हफ्ते एक अहम बैठक करने जा रही है।

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एनटीएजीआई के एक वरिष्ठ सदस्य ने अमर उजाला से कहा कि हम अगले हफ्ते होने वाली बैठक में बच्चों के टीकाकरण संबंधी मुद्दों पर चर्चा करने और फिलहाल भारत में उपलब्ध बच्चों के तीन टीकों पर आंकड़ों की समीक्षा करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, उससे पहले हमने संस्थाओं से कहा है कि वे ओमिक्रोन की वजह से आई तीसरी लहर में व्यापक तौर पर इससे प्रभावित हुए युवा बच्चों की प्रतिरक्षा पर अपने विश्लेषणों को भी प्रस्तुत करें।    

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भारत में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर के दौरान काफी बच्चे वायरस के संपर्क में आए थे। इस दौरान अधिकांश बच्चे संक्रमित भी हुए थे। अनुमान है कि बड़े स्तर पर बच्चे पहले ही वयस्कों के जरिए कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। इसलिए राष्ट्रीय टीकाकरण मिशन का विस्तार करने से पहले वैक्सीनेशन पॉलिसी का का थिंक टैंक प्रतिरक्षा के स्तर को समझना चाहता है। वह इसे जीवकोषीय स्तर (स्मृति कोशिकाओं) के साथ-साथ भारतीय बच्चों में मौजूद रोग प्रतिकारक के माध्यम से भी जानना चाहता है।

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एनटीएजीआई से जुड़े सूत्र ने कहा कि स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) चंडीगढ़ सहित विभिन्न संस्थाओं ने पहले ही युवा बच्चों में संक्रमण और प्रतिरक्षा के स्तर को समझने के लिए अध्ययन किए हैं। अब हम उन विश्लेषणों को देखना चाहते हैं। अगली बैठक में इस बात पर भी जोर दिया जाएगा कि आबादी में उच्च टीकाकरण की दर को और अधिक कैसे बढ़ाया जा सकता है।  

 

इधर, बच्चों पर तीसरी लहर का असर समझने के लिए राज्य भी स्वतंत्र रूप से सीरो सर्वेक्षण करा रहे हैं। जबकि अप्रैल के अंतिम हफ्ते में भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने 5 से 12 वर्ष के बच्चों के लिए कोर्बेवैक्स (बायोलॉजिकल ई) और कोवाक्सिन (भारत बायोटेक) के आपात इस्तेमाल को मंजूरी दी थी। जबकि जायडस लाइफ साइंस के जायको वी-डी को 12 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लिए इस्तेमाल को मंजूरी दी गई थी।

युवा बच्चों का टीकाकरण है जरूरी  

बाल चिकित्सकों का कहना है कि भले ही बच्चों में कोविड-19 अपेक्षाकृत कम खतरनाक है, लेकिन दूसरी और तीसरी लहर के दौरान कुछ मामले 10 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों में देखने में मिले थे। कई राज्यों में मल्टी सिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम और लंबी अवधि के कोविड मामले पाए गए थे। आज भी युवा बच्चों में कोविड-19 को कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। 5-12 वर्ष के आयु वर्ग में कई सारी मौतों और गंभीर मामलों पर विचार करते हुए बहुत सारे देशों ने इस आयु समूह का टीकाकरण आरंभ कर दिया है। कोर्बेवैक्स एक प्रोटीन सबयूनिट टीका है, जिसे हेपेटाइटिस बी की तरह अच्छी तरह से स्थापित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर निर्मित किया गया है। हेपेटाइटिस बी टीके का लाइसेंस पांच वर्ष और उससे अधिक उम्र के लिए दिया गया है और कोवाक्सिन का लाइसेंस छह वर्ष और उससे अधिक उम्र के आयु समूहों के लिए दिया गया है। दोनों ही टीकों का इस्तेमाल पहले से ही बच्चों के लिए किया जा रहा है।

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