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Child Trafficking: बाल तस्करी के शिकार बच्चों की गवाही को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्देश
Tue, 01 Feb 2022 07:34 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 01 Feb 2022 07:34 PM IST
सार
पीठ ने कहा कि उन्हें निचली अदालतों में साक्ष्य देने के लिए लंबी दूरी की यात्रा करने में तस्करी के शिकार लोगों को होने वाली मुश्किलों की चिंता है।
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Supreme court
- फोटो : Social Media
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निर्देश दिया कि बाल तस्करी के शिकार बच्चों की गवाही या तो जिला अदालत परिसर या उस जिले में जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दर्ज की जाए जहां बच्चा रहता है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने कहा कि उन्हें निचली अदालतों में साक्ष्य देने के लिए लंबी दूरी की यात्रा करने में तस्करी के शिकार लोगों को होने वाली मुश्किलों का ध्यान है।
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शीर्ष अदालत ने कहा कि मानक संचालन प्रक्रिया से संबंधित न्याय मित्र द्वारा दिए गए सुझावों को एक नियमित विशेषता के रूप में व्यवहार में लाया जाना चाहिए और प्रक्रिया को केवल कोविड-19 महामारी से प्रभावित अवधि तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। हम निर्देश देते हैं कि एसओपी का पालन सभी आपराधिक मुकदमों में किया जाना चाहिए, जिन मामलों में बाल गवाह अदालतों के नजदीक नहीं रहते हैं, उन्हें शारीरिक रूप से उन अदालतों में आने की जरूरत नहीं है। हम रिमोट पॉइंट कोऑर्डिनेटर (आरपीसी) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं कि बाल गवाहों के परीक्षण के दौरान सही अनुकूल प्रक्रियाओं का पालन किया जाए।
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राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के वकील ने कहा कि जब भी आरपीसी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बाल गवाही की जरूरत हो तो वह राशि का भुगतान करने को तैयार है। इस पर शीर्ष अदालत ने कहा कि आरपीसी को मानदेय के रूप में प्रति दिन 1500 रुपये का भुगतान किया जाएगा।
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