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बाल संरक्षण आयोग ने बेसहारा बच्चों के लिए जारी की एसओपी
Sun, 22 Nov 2020 03:17 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 22 Nov 2020 03:17 AM IST
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एनसीपीसीआर
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केंद्रीय बाल संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने बेसहारा बच्चों की देखभाल और सुरक्षा के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया विकसित की है। इसका मकसद सड़क पर रहने वाले बच्चों के लिए संरक्षण की बेहतर सुविधाएं और आसरा उपलब्ध कराना है, ताकि कोई बच्चा अपने परिवार के बिना न रहे।
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रेलवे और गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सेव द चिल्ड्रेन के सहयोग से एनसीपीसीआर ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार किया है। इसके तहत सेव द चिल्ड्रेन ने यूपी, दिल्ली, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल समेत छह राज्यों में करीब दो लाख बच्चों को मैप किया।
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इसके अलावा एनजीओ ने बच्चों के संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, स्वच्छता और शहरी विकास समेत उनके लिए चलाई जा रही तमाम कल्याणकारी योजनाओं का आकलन किया। एनसीपीसीआर के अनुसार, सड़कों पर रहने वाले बच्चों की देखभाल और संरक्षण के लिए एसओपी अपनाया गया है। इसमें देखा गया कि बच्चे की बेहतर देखभाल करने में उसका परिवार ही सबसे अधिक सक्षम है। ऐसे में आयोग का जोर परिवार के संरक्षण पर है, ताकि बच्चों को अच्छा परिवेश मिल सके।
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एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा, इन बच्चों को परिवारों के संरक्षण में रखा जाए। सबसे बड़ी चुनौती बेसहारा बच्चों को एसओपी कार्यक्रम से जोड़ना और इनके परिवारों को मजबूत करना है। एसओपी 2.0 दोनों मुद्दों को संबोधित करता है।