{"_id":"5b8b991442c7924651655c0b","slug":"chidambaram-hit-backs-on-pm-modi-and-ask-about-the-number-of-loan-given-from-2014","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीएम मोदी के बयान पर चिदंबरम का पलटवार, मांगा 2014 के बाद दिए कर्ज का हिसाब","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
पीएम मोदी के बयान पर चिदंबरम का पलटवार, मांगा 2014 के बाद दिए कर्ज का हिसाब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 02 Sep 2018 02:09 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संयुक्त प्रगतिशील संगठन के शासनकाल में दिए गए कर्ज पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने रविवार को पूछा कि राजग सरकार को यह बताना चाहिए कि उनके समय में दिए गए कितने ऋण डूब गए। कांग्रेस नेता ने इस संबंध में कई ट्वीट किए।
विज्ञापन
उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, 'मई 2014 के बाद कितना कर्ज दिया गया और उनमें से कितनी राशि डूब (नॉन पर्फोर्मिंग एसेट्स) गई। चिदंबरम ने कहा कि यह सवाल संसद में पूछा गया लेकिन अब तक इस पर कोई जवाब नहीं आया है।'
विज्ञापन
शनिवार को प्रधानमंत्री ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस नीत पूर्ववर्ती संप्रग सरकार को एनपीए के लिये जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा कि 12 बड़े डिफॉल्टरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। इन पर 1.75 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है और उन्हें 2014 से पहले यह कर्ज दिया गया था। मोदी ने कहा था कि 27 अन्य बड़े डिफॉल्टरों पर भी कार्रवाई की जाएगी। उनपर तकरीबन एक लाख करोड़ रुपये का बकाया है।
विज्ञापन
चिदंबरम ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जब कहते हैं कि संप्रग सरकार के समय दिए गए कर्ज डूब गए, इस बात को अगर सही मान भी लिया जाए तो उनमें से कितने कर्जों का मौजूदा राजग सरकार के कार्यकाल में नवीकरण किया गया और उनमें से कितने को रॉल ओवर (वित्तीय करारनामे की शर्तों पर पुन: समझौता करना) (मतलब एवरग्रीनिंग) किया गया। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, 'उन कर्जों को वापस क्यों नहीं लिया गया? उन कर्जों को एवरग्रीन क्यों किया गया।' एवरग्रीन ऋण ऐसा कर्ज होता है जिसमें एक खास अवधि के भीतर मूलधन का भुगतान करने की जरूरत नहीं होती है।'