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Report: भारत के प्रदूषण में 40 फीसदी कटौती हुई तो उम्र में होगी दो साल की बढ़ोतरी, EPIC रिपोर्ट में बड़ा दावा

Thu, 28 Aug 2025 05:44 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Thu, 28 Aug 2025 05:44 PM IST
सार

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत अगर भारत 2026 तक प्रदूषण में 40 फीसदी की कमी लाता है, तो 130 शहरों में रहने वालों की उम्र औसतन 2 साल बढ़ सकती है। ईपीआईसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी भारत के सभी लोग डब्ल्यूएचओ मानक से ज्यादा प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहते हैं। 

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chicago university EPIC report claim on pollution reduce by fourty percent life expectancy increase two years
वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत अगर भारत 2026 तक प्रदूषण में 40 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य हासिल कर लेता है, तो देश के 130 शहरों के निवासियों की औसतन उम्र दो साल तक बढ़ सकती है। यह निष्कर्ष ऊर्जा नीति संस्थान, यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो (EPIC) की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है। इसमें कहा गया है कि अगर 2017 के स्तर से कण प्रदूषण घटाया गया तो लोगों को लंबी उम्र मिल सकती है।
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NCAP की शुरुआत साल 2019 में हुई थी। पहले लक्ष्य था कि 2017 के प्रदूषण स्तर की तुलना में 2024 तक 20-30 प्रतिशत कमी लाई जाए। लेकिन 2022 में सरकार ने इस लक्ष्य को संशोधित किया और इसे 2026 तक 40 प्रतिशत कमी के रूप में तय किया। हालांकि, प्रदर्शन के आकलन में सिर्फ पीएम10 स्तर पर ही ध्यान दिया जा रहा है।
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रिपोर्ट में क्या कहा गया
ईपीआईसी की रिपोर्ट के मुताबिक अगर यह लक्ष्य हासिल हो जाता है तो 130 शहरों के लोग 2017 के मुकाबले औसतन दो साल ज्यादा जी पाएंगे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत के सभी 1.4 अरब लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां प्रदूषण का स्तर डब्ल्यूएचओ के मानक से ज्यादा है। यहां तक कि देश के सबसे साफ क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी अगर डब्ल्यूएचओ का मानक लागू हो जाए तो औसतन 9.4 महीने ज्यादा जी सकते हैं।
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शहरों का प्रदर्शन
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 130 में से 103 शहरों ने 2024-25 में पीएम10 के स्तर में 2017-18 की तुलना में सुधार दिखाया है। इनमें से 64 शहरों ने प्रदूषण में 20 प्रतिशत से ज्यादा कमी दर्ज की, जबकि 25 शहरों ने 40 प्रतिशत से ज्यादा कमी हासिल की। इसके अलावा 22 शहरों ने राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक (एनएएक्यूएस) को पूरा किया है, जिसमें पीएम10 का सालाना स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से कम होना चाहिए।

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डब्ल्यूएचओ और भारत के मानक में अंतर
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2023 में पीएम2.5 का स्तर 2022 से ज्यादा था और यह डब्ल्यूएचओ मानक से आठ गुना ऊपर था। डब्ल्यूएचओ ने 2021 में गाइडलाइन जारी की थी, जिसमें पीएम2.5 की सालाना सीमा पांच माइक्रोग्राम और पीएम10 की सीमा 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तय की गई थी। जबकि भारत के मानक पीएम2.5 के लिए 40 और पीएम10 के लिए 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की अनुमति देते हैं। अगर भारत इन मानकों को WHO स्तर तक ले आए, तो औसतन हर भारतीय की उम्र 3.5 साल तक बढ़ सकती है। 


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