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Chhattisgarh: सीएम बघेल की काट में भाजपा का दांव, अरुण साव के सहारे ओबीसी वोटरों को साधने की कवायद

Thu, 11 Aug 2022 03:41 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Thu, 11 Aug 2022 03:41 PM IST
सार

Chhattisgarh: प्रदेश की राजनीति पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में ओबीसी मतदाता भाजपा से कांग्रेस की ओर चले गए हैं। पार्टी को इसी कारण से राज्य की सत्ता खोनी पड़ी। अब भाजपा को फिर से सत्ता पर आने के लिए प्रदेश में मजबूत ओबीसी चेहरे की जरूरत थी...

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Chhattisgarh: To counter Bhupesh Baghel OBC vote bank, BJP replaced appoint Arun Sao its unit chief
Chhattisgarh: अरुण साव - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

छत्तीसगढ़ में भाजपा ने संगठन को मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए पार्टी राज्य के ओबीसी वर्ग को साधने की रणनीति के काम में जुट गई है। प्रदेश में करीब 2.5 करोड़ की आबादी का लगभग 47 फीसदी ओबीसी वर्ग है। सांसद अरुण साव को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपने के पीछे सीधे तौर पर एक बड़ा वोट बैंक को साधने की रणनीति माना जा रहा है।  

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नए प्रदेश अध्यक्ष बने अरुण साव साहू समाज से ताल्लुक रखते हैं, जो प्रदेश में ओबीसी वर्ग में सबसे ज्यादा है। ओबीसी की आबादी 47 फीसदी है, जो राज्य के हर चुनाव में किंगमेकर की भूमिका में होते हैं। इन सभी कारणों को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने ओबीसी चेहरे पर दांव खेला हैं। भाजपा ने साव को जिम्मा सौंपकर प्रदेश में गुटबाजी रोकने की कोशिश भी की है।

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कभी भाजपा के रहे ओबीसी, अब कांग्रेस के हुए

प्रदेश की राजनीति पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में ओबीसी मतदाता भाजपा से कांग्रेस की ओर चले गए हैं। पार्टी को इसी कारण से राज्य की सत्ता खोनी पड़ी। अब भाजपा को फिर से सत्ता पर आने के लिए प्रदेश में मजबूत ओबीसी चेहरे की जरूरत थी। इसलिए पार्टी ने अरुण साव को प्रदेश अध्यक्ष के लिए चुना। साव का नाम भाजपा के नए अध्यक्ष के रूप में सामने आना यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि पार्टी अब प्रदेश के ओबीसी मतदाताओं को साधने में लगी है। साहू मूल रूप से तेली हैं जो छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख ओबीसी वर्ग है। प्रदेश का एक अन्य प्रमुख वर्ग कुर्मी है, जिससे सीएम भूपेश बघेल आते हैं। राज्य के साहू मतदाता ज्यादातर भाजपा समर्थक हैं, लेकिन पिछले चुनाव में वे स्थानांतरित हो गए, जिसकी वजह से भाजपा को सत्ता गंवानी पड़ी।

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किसी खेमे के नहीं हैं साव

अमर उजाला से चर्चा में प्रदेश भाजपा से जुड़े सूत्रों ने कहा कि पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह प्रदेश में डेढ़ दशक तक भाजपा का चेहरा रहे। वे जाति से राजपूत हैं। कांग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ओबीसी समाज से ताल्लुक रखते हैं। इसी ओबीसी वर्ग को साधने के लिए भाजपा ने अपने संगठन में बदलाव किया है।


सूत्र कहते हैं कि भाजपा नेतृत्व अब राज्य में ओबीसी नेताओं की दूसरी पंक्ति पर फोकस कर रही है, जिसकी बेहद कमी है। अधिकांश ओबीसी नेता प्रभावशाली उच्च जाति के नेताओं द्वारा निर्देशित होते हैं। इसलिए पार्टी को एक मजबूत चेहरे की जरूरत है। दूसरे ओबीसी नेता गुटों में फंसे हुए हैं, इसके चलते वे ज्यादा प्रभावशाली नहीं हैं। बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र से पहली बार सांसद बने साव भाजपा के किसी खेमे में नहीं हैं और संगठन के प्रति वफादार भी हैं।

आदिवासियों पर भाजपा का रहा है कब्जा

साल 2000 में छत्तीसगढ़ के राज्य बनने के बाद भाजपा ने प्रदेश में पार्टी का नेतृत्व करने ज्यादातर आदिवासी चेहरों पर अपना विश्वास रखा था। नंदकुमार साय, शिवप्रताप सिंह, रामसेवक पैकरा, विक्रम उसेंडी और विष्णुदेव साय जैसे आदिवासी नेताओं ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व संभाला। वर्तमान विपक्ष के नेता धरमलाल कौशिक भी भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इससे पहले पूर्व सांसद दिवंगत ताराचंद साहू भी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे। छत्तीसगढ़ में ओबीसी समाज की आबादी लगभग 47 फीसदी है। आदिवासी लगभग 33 फीसदी और अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 13 फीसदी है। राज्य में सामान्य की संख्या 10 फीसदी से भी कम है।

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