Chhattisgarh: मुठभेड़ में मारे गए छह नक्सली, जंगल में दो घंटे में कैसे बदला सीन? सुरक्षाबलों पर उठे सवाल
पुलिस महानिरीक्षक (बस्तर रेंज) सुंदरराज पी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि नक्सली, मुठभेड़ को फर्जी बताने का प्रयास करते हैं। इसके पीछे यह कारण होता है कि वे अपने हिंसक कृत्यों से पुलिस प्रशासन और लोगों का ध्यान भटकाना चाहते हैं। नक्सलियों का प्रयास होता है कि किसी भी तरह से सुरक्षा बलों की विश्वसनीयता को कम किया जाए...
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छत्तीसगढ़ में बीजापुर के गांव चिपुरमाटी में 27 मार्च को हुई कथित मुठभेड़ पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसमें छह नक्सली मारे गए थे। निकटवर्ती ग्रामीण भी इस मुठभेड़ के बारे में सटीक तरीके से जानकारी नहीं दे पा रहे। जिस जगह पर मुठभेड़ होने का दावा किया जा रहा है, वहां पर भी कुछ ठोस सबूत नजर नहीं आ रहे। हालांकि पुलिस ने मुठभेड़ होने की बात कही है।
विश्वस्त सूत्रों का कहना है, सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ की बात सही नहीं है। जंगल में 120 मिनट के भीतर सीन बदल जाता है। सुरक्षा बलों ने जिस नक्सली को जिंदा पकड़ा था, दो घंटे बाद वह भी उन नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में मारा जाता है। इस मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस का खास दस्ता और केंद्रीय बलों की एक विशेष इकाई, सवालों के घेरे में है।
'आईईडी' तैयार करने का सामान था
सूत्रों के मुताबिक, इस मुठभेड़ में केंद्रीय बलों की एक विशेष इकाई के जवान शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा नक्सलियों का मुकाबला करने के लिए तैयार की गई, राज्य पुलिस का खास दस्ता भी मुठभेड़ के दौरान केंद्रीय बलों के साथ था। सुरक्षा बलों ने जिन लोगों को पकड़ा था, उनकी संख्या करीब दस बताई गई है। आरोप है कि उनके पास इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस 'आईईडी' तैयार करने का सामान था। मुठभेड़ के बाद माओवादियों की दक्षिण बस्तर डिवीजनल कमेटी द्वारा एक बयान जारी किया गया। कमेटी के सचिव गंगा के हवाले से कहा गया कि 27 मार्च को छह लोगों की हत्या की गई है। उनमें से दो संगठन के लोग थे और बाकी ग्रामीण थे। हालांकि इस मामले में ग्रामीणों ने पांच नक्सलियों के होने की बात कही है। पहले उन सभी को पकड़ा गया और उसके बाद उन्हें कथित मुठभेड़ में मार गिराया। माओवादियों की तरफ से यह दावा किया गया कि कथित मुठभेड़ में कोई भी सशस्त्र कैडर मौजूद नहीं था।
स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल कैसे?
इस मुठभेड़ को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं, उसके पीछे एक नक्सली की तस्वीर का सोशल मीडिया पर आना रहा है। घटना वाले दिन सुबह साढ़े बजे जो तस्वीर आई थी, उसमें एक युवक को बंधक बनाकर रखा गया है। करीब दो घंटे बाद वही नक्सली मारा जाता है। घटना स्थल से किसी बड़े हथियार की बरामदगी नहीं हुई है। जंगल में भी मुठभेड़ के निशान नहीं दिख रहे। पुलिस की तरफ से बरामदगी के सामान में दो भरमार बंदूक और कुछ पिस्तौल बताई गई हैं। बंदूकों के बारे में बताया जाता है कि उनसे फायर हुए लंबा वक्त हो चुका है। मुठभेड़ के दौरान कहा गया था कि दोनों तरफ से स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल हुआ है। इस मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों को खरोंच तक नहीं आई। ग्रामीणों के अनुसार, छह में से पांच नक्सली हैं। मुठभेड़ के बाद पुलिस, करीब दर्जनभर ग्रामीणों को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। पुलिस का कहना है कि मारे गए नक्सलियों पर भारी इनाम था।
सुरक्षा बलों की विश्वसनीयता को कम करने की कोशिश
दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ पुलिस ने मुठभेड़ को सही बताया है। पुलिस महानिरीक्षक (बस्तर रेंज) सुंदरराज पी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि नक्सली, मुठभेड़ को फर्जी बताने का प्रयास करते हैं। इसके पीछे यह कारण होता है कि वे अपने हिंसक कृत्यों से पुलिस प्रशासन और लोगों का ध्यान भटकाना चाहते हैं। नक्सलियों का प्रयास होता है कि किसी भी तरह से सुरक्षा बलों की विश्वसनीयता को कम किया जाए। सुंदरराज पी ने माओवादियों द्वारा जारी बयान का खंडन किया है। हालांकि ऐसे मामले की जांच होती है। मुठभेड़ को लेकर मौजूद तथ्यों और उनकी प्रामाणिकता को देखा जाएगा। फरवरी में भी एक मुठभेड़ को फर्जी बताया गया था। कांकेर 'छत्तीसगढ़' में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में तीन लोग मारे गए थे। उनके परिवारों ने दावा किया था कि वे नक्सली नहीं थे। उस वक्त भी पुलिस ने परिवार वालों के आरोप को नकार दिया था। कांकेर के पुलिस अधीक्षक इंदिरा कल्याण एलेसेला ने कहा था, पुलिस ने कुछ गलत नहीं किया है। इस तरह की मुठभेड़ के बाद स्थानीय लोग, नक्सलियों के दबाव में आकर ऐसा दावा करते हैं।