Chhattisgarh Election: मां बगलामुखी के दर पर नेता, शिफ्ट में हो रहे अनुष्ठान, रोज दी जा रहीं 25 हजार आहुतियां
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बिलासपुर के सरकंडा में पीतांबरा पीठ की मां बगलामुखी को शत्रुहंता के साथ-साथ राजसत्ता की देवी माना जाता है। वैसे तो सालभर यहां राजनेताओं की कतार लगी रहती है। लेकिन विधानसभा चुनाव के चलते नेताओं की कतार मां के मंदिर में बढ़ गई है। 17 नवंबर तक अनुष्ठानों की बुकिंग फुल हो गई है। छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश के नेता भी यहां हाजिरी लाग रहे है। मंदिर में 36 लाख आहुतियों का संकल्प लिया गया है।
मंदिर पीठाधीश्वर डॉ. दिनेश महाराज ने बताया कि श्री पीतांबरा हवनात्मक महायज्ञ में श्री ब्रह्म शक्ति बगलामुखी देवी मंत्र द्वारा प्रतिदिन 25 हजार आहुतियां दी जा रही हैं। रात आठ से देर रात डेढ़ बजे तक यज्ञ हो रहे हैं। यह यज्ञ 17 नवंबर तक चलेंगे। इसके लिए बुकिंग की प्रक्रिया पूरी हो गई है। चुनाव को देखते हुए यहां हो रहे सभी यज्ञ यजमान के नाम से किए जा रहे हैं। जबकि मां के दरबार में मत्था टेकने के लिए छत्तीसगढ़ ही नहीं मध्यप्रदेश से भी नेता पहुंच रहे हैं।
डॉ. दिनेश महाराज बताते हैं कि यज्ञ के लिए पंडितों को रात भर जागना पड़ रहा है। इसलिए दो शिफ्टों में पंडितों की सेवा ली जा रही है। कुछ लोग सुबह और शाम में मां की सेवा कर रहे हैं। जबकि अन्य पंडित रात में यज्ञ कर रहे हैं। मंदिर में हर वर्ष 108 मनोकामना ज्योति जलाई जाती है। इस वर्ष मंदिर में जगह नहीं होने के बावजूद 111 ज्योति जलानी पड़ी हैं।
मध्यप्रदेश के दतिया में अनुष्ठान की बुकिंग हुई फुल
इधर, एमपी के दतिया में पीतांबरा पीठ में फरवरी तक अनुष्ठानों की बुकिंग हो फुल हो चुकी है। मंदिर में इतनी संख्या में अनुष्ठान हो रहे हैं कि पीठ में स्थान की कमी पड़ने लगी है। मंदिर प्रबंधन से जुड़े पुजारी बताते हैं कि विधानसभा चुनाव को देखते हुए आसपास बने होटलों में पूजा पाठ का क्रम चल रहा है। करीब 100 पंडित इसमें जुटे हुए हैं। मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि मध्यप्रदेश के करीब 15 मंत्री और 60 विधायकों ने नवरात्रि में अनुष्ठान की बुकिंग करवा ली थी। कुछ ने बाकायदा ट्रस्ट में आवेदन देकर बुकिंग करवाई है, तो कुछ ने अपने परिचित पंडितों को ही पूजा पाठ और हवन का जिम्मा सौंपा है। इसमें अधिकांश हवन शत्रु दमन और दावेदारी में सफलता और सत्ता प्राप्ति से जुड़े हैं।
पीतांबरा पीठ मंदिर से जुड़े साधकों का कहना है कि मध्यप्रदेश और राजस्थान के मंत्री और विधायक यहां बड़ी संख्या में हवन-पूजा करवा रहे हैं। जनवरी-फरवरी तक उनके यहां शतचंडी और नवचंडी यज्ञ अनुष्ठान आदि की बुकिंग फुल है। ऐसे में अब जो साधक अनुष्ठान के लिए आवेदन दे रहे हैं, उन्हें आगे की तिथि के बारे में जानकारी दी जा रही है। पीठ पर अनुष्ठान के लिए स्थान न मिल पाने की स्थिति में अब पुजारियों ने अपने यजमान राजनेताओं के अनुष्ठान के लिए पीठ के आसपास बने होटलों में पूजा पाठ की व्यवस्था करा दी है। इसके अलावा दतिया में पीठ से जुड़े पुजारी और साधकों ने अपने निवास स्थानों पर भी पूजा स्थान बना रखे हैं। जहां बाहरी यजमानों के जप तप के साथ अनुष्ठान नवरात्रि में कराए जाएंगे। राजनीतिक लोग इन साधकों के संपर्क में हैं।
नेता मोबाइल पर ले रहे संकल्प
जानकारों का कहना है कि चुनाव के चलते करीब 100 पंडित पूजा-पाठ में जुटे हुए हैं। नवरात्र के चलते प्रत्येक पंडित के पास रोज चार से पांच अनुष्ठान का जिम्मा है। नियमित रूप से आने वाले नेता अनुष्ठान के लिए मोबाइल पर ही संकल्प करते हैं। वे जहां भी होते हैं, वहां से अपने पंडित को फोन लगाकर हाथ में पूजा की सुपारी दक्षिणा रख लेते हैं। पंडित यहां से संकल्प करवा देते हैं। इसके बाद पंडित अनुष्ठान में जुट जाते हैं। हवन के अंतिम दिन यजमान उपस्थिति होते हैं।