चेन्नई में पसरे सन्नाटे के बीच लोगों को मुफ्त खाना खिला रही है अम्मा कैंटीन
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मुख्यमंत्री जयलिलता के मंगलवार को अंतिम संस्कार से पहले ही चेन्नई में दुकानें, रेस्टोरेंट और सड़क किनारे के सभी भोजनालय बंद हैं। लेकिन गम में डूबे चेन्नई में अभी भी कुछ दुकानें ऐसी हैं जो खुली हैं। ये साधारण दुकानें नहीं हैं बल्कि जयललिता की गरीबों के लिए शुरू की गई अम्मा कैंटीन (अम्मा अनावगम्स) हैं।
इन कैंटीन को तमिलनाडु में राजकीय शोक के बावजूद खोलने का मकसद पैसा कमाना नहीं है। यहां अम्मा कैंटीन में आने वाले हर व्यक्ति को मुफ्त खाना परोसा जा रहा है, प्रिय मुख्यमंत्री को श्रद्धांजलि देने का यह अनुठा तरीका है।
अंग्रेजी अखबार द हिंदू के मुताबिक 407 अम्मा कैंटीन में से तकरीबन 350 खुलीं हैं और इन्हें निर्देश दिया गया है कि कैंटीन में आने वाले लोगों को फ्री में खाना दिया जाए, उनसे पैसे न लिए जाएं। डिजिटल उद्यमी और पोडकास्टर किरुबा शंकर मंगलवार को विरुगमबाक्कम की एक ऐसी ही अम्मा कैंटीन में गए जहां शाम के 7 बजे करीब 20 लोग खाना खा रहे थे। शंकर ने बताया कि अम्मा कैंटीन खुली है और लोगों को खाना खिलाया जा रहा है। आमतौर पर यहां पैसे लिए जा जाते हैं लेकिन मुख्यमंत्री जयललिता को श्रद्धांजलि देने का यह बेहतर तरीका है।
'पांच किलोमीटर चलकर यहां खाना खाई हूं'
थिरुवनमियुर की अम्मा कैंटीन में लंच के लिए आईं मेरी एंटोनिया ने बताया,'मैं दिहाड़ी मजदूर हूं और पांच किलोमीटर चलकर यहां खाना खाने के लिए आई हूं।' हालांकि कई जगहों पर लोगों ने अम्मा कैंटीन के बंद रहने की भी शिकायत की।
प्रोफेसर एमएसी स्वामीनाथन ने कहा कि जयललिता का ध्यान केवल आधुनिक तकनीक पर नहीं था बल्कि उन्होंने गरीबों के पोषण का भी ख्याल रखा। इसीलिए उन्होंने गरीबों को कम कीमत पर खाने की व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए अम्मा कैंटीन जैसा विशाल नेटवर्क स्थापित किया।
जयलिला की अम्मा कैंटीन ने दुनिया का ध्यान भी अपनी ओर खींचा। 2014 में अम्मा कैंटीन से प्रभावित होकर इजिप्ट का एक प्रतिनिधिमंडल इस मॉडल की खासियत जानने के लिए और अपने यहां लागू करने के मकसद से भारत आया था।