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Chenab Bridge: ब्लास्ट प्रूफ स्टील से बना है चिनाब पुल, DRDO की अचूक प्लानिंग से इस पर नहीं होगा धमाके का असर

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 06 Jun 2025 01:41 PM IST
सार

एफिल टावर से ज्यादा ऊंचे व ब्लास्ट प्रूफ स्टील से बने रेल पुल को आतंकवादी कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकेंगे। अगर उनके पास कोई 40-50 किलोग्राम टीएनटी यानी ट्राई नाइट्रो टोल्यून (विस्फोटक सामग्री) है तो भी वे पुल को क्षतिग्रस्त नहीं कर पाएंगे।

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Chenab Bridge is made of blast proof steel due to DRDO perfect planning it will not be affected by the blast
Chenab Baridge, PM Modi - फोटो : PTI

विस्तार

दुनिया का सबसे ऊंचा मेहराब (आर्क) के आकार में चिनाब नदी पर बना रेल पुल, जिसकी लंबाई 1315 मीटर और ऊंचाई 359 मीटर है, उसे ब्लास्ट प्रूफ स्टील से तैयार किया गया है। इसके चलते पुल को विस्फोटकों की मदद से नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकेगा। ब्रिज के पिलर भी इसी पैटर्न पर तैयार किए गए हैं। इस ब्रिज के निर्माण में डीआरडीओ की अचूक प्लानिंग शामिल रही है। पुल के निर्माण में 28,660 मीट्रिक टन स्टील का इस्तेमाल हुआ है। इतना कहा जा सकता है कि एफिल टावर से ज्यादा ऊंचे व ब्लास्ट प्रूफ स्टील से बने रेल पुल को आतंकवादी कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकेंगे। चिनाब पुल की आयु लगभग 125 साल बताई गई है।

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Chenab Bridge - फोटो : PTI

चिनाब रेल पुल निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले 'कोंकण रेलवे' के डिप्टी चीफ इंजीनियर आरआर मलिक ने 2020 के दौरान पुल की साइट पर अमर उजाला डॉट कॉम के साथ खास बातचीत की थी। तब उन्होंने कहा था कि जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में बक्कल और कौड़ी के बीच 'चिनाब' नदी पर बना यह पुल भारतीय इंजीनियरिंग का एक नायाब मॉडल है। परियोजना के क्रियान्वयन की बड़ी जिम्मेदारी संभालने वाले मलिक का कहना था कि इस पुल की सुरक्षा को लेकर लंबे समय तक मंथन चला है। इसमें केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की राय भी शामिल रही है। हर तरह के खतरे को दिमाग में रखते हुए पुल का बेस तैयार किया गया है।

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Chenab Bridge - फोटो : PTI

डीआरडीओ ने पुल की ड्राइंग में अपने अहम सुझाव दिए। पुल को किसी भी तरह के हमले से कैसे महफूज रखा जाए, इसके लिए डीआरडीओ ने अचूक प्लानिंग की। हालांकि, तब इतना ही कहा गया था कि सुरक्षा के लिहाज से इस बारे में ज्यादा कुछ सार्वजनिक करना ठीक नहीं है। इतना कहा जा सकता है कि एफिल टावर से ज्यादा ऊंचे व ब्लास्ट प्रूफ स्टील से बने रेल पुल को आतंकवादी कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकेंगे। अगर उनके पास कोई 40-50 किलोग्राम टीएनटी यानी ट्राई नाइट्रो टोल्यून (विस्फोटक सामग्री) है तो भी वे पुल को क्षतिग्रस्त नहीं कर पाएंगे।

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Chenab Bridge - फोटो : PTI

चिनाब नदी पर बने इस पुल के हर एक पिलर की सुरक्षा का खास इंतजाम किया गया है। रेलवे एवं दूसरी एजेंसियां, ब्रिज बनाने के प्रारंभ से ही इसकी सुरक्षा को लेकर खासे सचेत रहे हैं। बतौर मलिक, आतंकी घटनाओं का कोई समय नहीं होता। किसी मानवीय भूल के चलते कभी ऐसा हो जाए कि आतंकी समूह इस पुल के करीब आ जाएं तो भी घबराने की आवश्यकता नहीं है।पहली बात तो यह है कि वे इतनी भारी मात्रा में टीएनटी यहां तक नहीं ला सकेंगे। अगर वे ले भी आते हैं तो पुल को कुछ नहीं होगा। हां, थोड़ा बहुत नुकसान होने की संभावना बनी रहेगी। कुछ परतें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, लेकिन उससे रेल यातायात बाधित नहीं होगा। रेल को कम स्पीड पर पुल से गुजारा जा सकता है। पचास किलोग्राम तक का टीएनटी चाहे पुल के उपरी हिस्से में लगा हो या नीचे पिलर के आसपास, वह कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यह पुल भारतीय इंजीनियरिंग का बेजोड़ मॉडल है।

Chenab Bridge is made of blast proof steel due to DRDO perfect planning it will not be affected by the blast
Chenab Bridge - फोटो : PTI

पुल के 16 स्तंभों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किया गया है। स्टील के  पिलर भी हैं। हर एक पिलर का सुरक्षा घेरा बनाया गया है। सिक्योरिटी को लेकर और भी बहुत सी बातें हैं, जिनका खुलासा करना ठीक नहीं होगा। डिप्टी चीफ इंजीनियर ने कहा था, वे इतना भरोसा तो दिला सकते हूं कि यह पुल बड़े से बड़ा आतंकी हमला और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा को झेलने की स्थिति में रहेगा। भूकंप के लिहाज से यह क्षेत्र सेसमिक जोन-4 में आता है। इस पुल को सेसमिक जोन-5 के हिसाब से तैयार किया गया है। सात-आठ रिक्टर स्केल पर भूकंप आता है तो भी यह पुल सुरक्षित रहेगा। खास बात है कि यह पुल 265 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं का सामना कर सकता है। पुल में ऐसी तकनीक स्थापित की गई है कि कोई भी खतरा होने पर वार्निंग अलार्म खुद ही बजने लगेगा।

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