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चिंता: प्लास्टिक में इस्तेमाल केमिकल हृदय रोगों से मौत की वजह; दुनिया में 3.56 लाख दिल के मरीजों की इससे मौत

Wed, 23 Jul 2025 03:56 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Wed, 23 Jul 2025 03:56 AM IST
सार

एनवाईयू लैंगोन हेल्थ (अमेरिका) के नेतृत्व में हुए इस शोध में कहा गया है कि डीईएचपी के संपर्क से वर्ष 2018 में 3,56,238 मौतें हुईं, जो 55 से 64 वर्ष आयु वर्ग में वैश्विक हृदय रोग मृत्यु दर का 13 प्रतिशत है। भारत में सबसे अधिक 1,03,587 मौतें दर्ज की गईं, उसके बाद चीन और इंडोनेशिया का स्थान रहा।

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Chemicals used in plastic are a major cause of death from heart diseases
हृदय रोग - फोटो : adobe stock photos

विस्तार

प्लास्टिक को लचीला बनाने वाले रसायन डाई-2 एथिलहेक्सिल फ्थैलेट (डीईएचपी) से 2018 में अकेले भारत में 1.03 लाख से अधिक और दुनियाभर में 3.56 लाख लोगों की मौतें दिल की बीमारियों के कारण हुईं। लैंसेट ईबायोमेडिसिन में प्रकाशित शोध ने यह चौंकाने वाला खुलासा किया है।
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प्लास्टिक पाइप, खाद्य पैकेजिंग, सौंदर्य प्रसाधन और चिकित्सा उपकरणों को अधिक लचीला और टिकाऊ बनाने में उपयोग किए जाने वाले रसायनों फ्थैलेट से जुड़े गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों पर वर्षों से चर्चा होती रही है। अब एक अंतरराष्ट्रीय शोध ने इस बहस को ठोस सबूतों में बदलते हुए स्पष्ट किया है कि इन रसायनों के संपर्क से दुनियाभर में दिल की बीमारियों से लाखों मौतें हो रही हैं और सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ा है।
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एनवाईयू लैंगोन हेल्थ (अमेरिका) के नेतृत्व में हुए इस शोध में कहा गया है कि डीईएचपी के संपर्क से वर्ष 2018 में 3,56,238 मौतें हुईं, जो 55 से 64 वर्ष आयु वर्ग में वैश्विक हृदय रोग मृत्यु दर का 13 प्रतिशत है। भारत में सबसे अधिक 1,03,587 मौतें दर्ज की गईं, उसके बाद चीन और इंडोनेशिया का स्थान रहा। शोधकर्ताओं ने दुनियाभर के 200 देशों से पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों, मूत्र में पाए गए डीईएचपी अवशेषों और हृदय रोग से संबंधित मृत्यु दर को आधार बनाकर यह विश्लेषण किया। अमेरिका के इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर निष्कर्ष निकाला गया कि इस रसायन से जुड़ी हृदय रोग से होने वाली मौतों का आर्थिक बोझ लगभग 510 अरब डॉलर आंका गया है जो बढ़कर 3.74 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
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वैज्ञानिकों ने चेताया
शोधकर्ताओं ने साफ किया है कि विश्लेषण यह साबित करने के लिए नहीं है कि डीईएचपी अकेले हृदय रोग का कारण है। बल्कि यह केमिकल शरीर में पहुंचता है तब आमतौर पर सांस, भोजन या त्वचा के संपर्क से यह हृदय और धमनियों पर बुरा असर डालता है। इसके साथ यह भी माना गया कि अन्य प्रकार के फ्थैलेट और अन्य आयु वर्ग की मृत्यु दर को इसमें शामिल नहीं किया गया, जिससे वास्तविक प्रभाव और अधिक व्यापक हो सकता है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि प्लास्टिक उत्पादों के निर्माण और उनके उपयोग से जुड़े इन अदृश्य रसायनों का वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बड़ा प्रभाव है।
 
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