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शेरदिल मुखी: जंग जीतकर ढाई साल की हुई देश में जन्मी पहली मादा चीता, पहले तीनों भाई-बहनों की हो गई है मृत्यु

Tue, 30 Sep 2025 05:18 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 30 Sep 2025 05:18 AM IST
सार

कूनो नेशनल पार्क में जन्मी मादा चीता मुखी अब ढाई साल की हो गई है। जन्म के दो महीने बाद ही उसने अपने तीन भाई-बहनों को खो दिया और मां ने भी उसे नहीं अपनाया। लेकिन चुनौतियों से जूझते हुए मुखी ने जीवन की जंग जीत ली। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने उसे साहस और सफलता की प्रतीक बताया।

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Cheetah Mukhi who has survived death and is now two and a half years old was left alone after birth
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI Image- Freepik

विस्तार

मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में 29 मार्च 2023 को नामीबियाई चीता ज्वाला से पैदा हुई मादा शावक मुखी सोमवार को वयस्क हो गई। वह 915 दिन या 30 महीने की होगी। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने मुखी को सफलता व साहस की प्रतीक बताया। भूपेंद्र ने सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि देश में पैदा होने वाली पहली मादा चीता मुखी अब ढाई साल की हो गई है, लेकिन जिंदगी की शुरुआत में ही उसे बड़ी त्रासदी का सामना करना पड़ा। जब वह महज दो महीने की ही थी तो भीषण गर्मी के चलते उसके तीन भाई-बहनों ने दम तोड़ दिया। ठीक इसी दिन मुखी भी कमजोर और थकी हुई मिली और उसे स्वास्थ्य जांच के लिए ले जाना पड़ा।

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मां ने भी नहीं अपनाया
भाई-बहनों की मौत के बाद मुखी को मां ज्वाला ने नहीं अपनाया। इसके बाद से कुनो नेशनल पार्क की प्रबंधन टीम ने मुखी की बहुत सावधानीपूर्वक देखभाल की और उस पर इंसानी प्रभाव ज्यादा न पड़े, इसका पूरा ध्यान रखा। उसका यह सफर आसान नहीं था। मुखी को कई बार स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों और अन्य दूसरी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन हर बार वह और मजबूत बनकर उभरी।
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मुखी सच्ची योद्धा
भूपेंद्र यादव ने कहा कि मुखी का जिंदा बचना न सिर्फ प्रेरणा है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कूनो स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों और मुश्किल हालात से भी बेहतर तरीके से निपट सकता है। मुखी एक सच्ची योद्धा है और वह साहस और उम्मीद का जीवंत प्रतीक है।

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20 चीते छोड़े गए थे..

गौरतलब है  कि केंद्र सरकार की ओर से चीता परियोजना के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाकर 20 चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़े गए थे। इनमें नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर, 2022 को अपने जन्मदिन पर कूनो के बाड़ों में छोड़ा था।

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