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यात्रियों के लिए चार धाम पहुंचना होगा बड़ा ही आसान, इस प्लान पर सरकार ने तेज किया काम
Sun, 08 Sep 2019 06:44 AM IST
संदीप भट्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नवनीत शरण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नवनीत शरण
Published by: संदीप भट्ट
Updated Sun, 08 Sep 2019 06:44 AM IST
सार
- ऋषिकेश-कर्ण प्रयाग रेल ट्रैक पर ट्रेन की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे तय की गई
- पहले फेज का काम वीरभद्र-न्यू ऋषिकेश के बीच इसी वित्तीय वर्ष में पूरा हो जाएगा
- स्विट्जरलैंड व ऑस्ट्रिया तकनीक पर सुरंग का निर्माण
- तीन सेक्शन में 2025 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट
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विस्तार
जल्द ही चार धाम यात्रा के आधार कैंप कर्णप्रयाग तक श्रद्धालु रेल मार्ग के जरिए पहुंच सकेंगे। रेल मंत्रालय ने उत्तराखंड में तैयार हो रहे 125 किलोमीटर लंबे ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल ट्रैक के निर्माण की गति बढ़ा दी है।
इस ट्रैक पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ेगी। दूसरे चरण में रेलवे गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ तक भी रेलवे ट्रैक तैयार करेगा। इसके सर्वेक्षण का काम इसी वित्तीय वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद 327 किलोमीटर रेल ट्रैक दुर्गम पहाड़ियों में बिछाया जाएगा।
रेल रूट तैयार होने के बाद ऋषिकेश-कर्णप्रयाग की दूरी महज डेढ़ से दो घंटे में पूरी हो जाएगी। शुरुआत में इस रूट पर डीजल इंजन से ट्रेन चलेगी। बाद में पर्यावरण के मद्देनजर बिजली के इंजन से ट्रेन चलाई जाएंगी। जिससे ट्रेनों की रफ्तार और तेज हो जाएगी।
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वंदे भारत एक्सप्रेस की तरह सेल्फ प्रोपेल्ड ट्रेन सेट भी इस रूट पर चलाई जा सकेंगी। उधर, चार धाम की यात्रा के लिए अभी श्रद्धालुओं को करीब 15 दिन लग जाते है। रेल मार्ग बन जाने से दुर्गम इलाकों की जगह रेल मार्ग से यह यात्रा महज तीन-चार दिनों की रह जाएगी।
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इस ट्रैक पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ेगी। दूसरे चरण में रेलवे गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ तक भी रेलवे ट्रैक तैयार करेगा। इसके सर्वेक्षण का काम इसी वित्तीय वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद 327 किलोमीटर रेल ट्रैक दुर्गम पहाड़ियों में बिछाया जाएगा।
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रेल रूट तैयार होने के बाद ऋषिकेश-कर्णप्रयाग की दूरी महज डेढ़ से दो घंटे में पूरी हो जाएगी। शुरुआत में इस रूट पर डीजल इंजन से ट्रेन चलेगी। बाद में पर्यावरण के मद्देनजर बिजली के इंजन से ट्रेन चलाई जाएंगी। जिससे ट्रेनों की रफ्तार और तेज हो जाएगी।
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वंदे भारत एक्सप्रेस की तरह सेल्फ प्रोपेल्ड ट्रेन सेट भी इस रूट पर चलाई जा सकेंगी। उधर, चार धाम की यात्रा के लिए अभी श्रद्धालुओं को करीब 15 दिन लग जाते है। रेल मार्ग बन जाने से दुर्गम इलाकों की जगह रेल मार्ग से यह यात्रा महज तीन-चार दिनों की रह जाएगी।
स्विट्जरलैंड व ऑस्ट्रिया तकनीक पर सुरंग का निर्माण
स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया के बर्फीले पहाड़ों में जिस न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग (एनएटीएम) तरीके से रेल सुरंग बनाई गई है। उसी तकनीक पर ऋषिकेश-कर्णप्रयाग के बीच 17 सुरंग का निर्माण किया जाएगा। सबसे बड़ी सुरंग 15.1 किलोमीटर की होगी जो ऋषिकेश से 47.6 किलोमीटर की दूरी पर होगी।
हिमालय की पारिस्थितिकी के हिसाब से रेलवे ने इस तरह से ट्रैक को डिजाइन किया है, जिससे तेजी से दौड़ती ट्रेन सुरक्षित अपनी मंजिल तक पहुंच सके। इस तकनीक का प्रयोग आंध्र प्रदेश में सुरंग निर्माण में किया जा चुका है।
2023-2024 में न्यू ऋषिकेश-देव प्रयाग रेल ट्रैक
2024-2025 में देव प्रयाग-कर्णप्रयाग रेल ट्रैक
हिमालय की पारिस्थितिकी के हिसाब से रेलवे ने इस तरह से ट्रैक को डिजाइन किया है, जिससे तेजी से दौड़ती ट्रेन सुरक्षित अपनी मंजिल तक पहुंच सके। इस तकनीक का प्रयोग आंध्र प्रदेश में सुरंग निर्माण में किया जा चुका है।
तीन सेक्शन में 2025 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट
2019-20 में वीरभद्र-न्यू ऋषिकेश रेलवे लाइन 5.7 किलोमीटर तैयार किया जाएगा2023-2024 में न्यू ऋषिकेश-देव प्रयाग रेल ट्रैक
2024-2025 में देव प्रयाग-कर्णप्रयाग रेल ट्रैक