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Char Dham Mahamarg Vikas Pariyojana: चीन की सीमा तक सैनिकों और हथियारों की आवाजाही आसान, पर्यटन से सीमा सुरक्षा तक कैसे जुड़ती गई कड़ी
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सार
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केंद्र सरकार की चार धाम परियोजना
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social Media
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की चार धाम परियोजना को मंगलवार को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना का उद्देश्य सड़कों को 10 मीटर तक चौड़ा करना है। ऑल वेदर राजमार्ग परियोजना में सड़क की चौड़ाई बढ़ाने और डबल लेन हाइवे बनाने के लिए केंद्र को अब अनुमति मिल गई है। अब चारधाम परियोजना के तहत भारत की चीन तक पहुंच और आसान हो जाएगी और किसी भी मौसम में भारतीय सेना चीन से सटी सीमाओं पर पहुंच सकेगी। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि हाईवे निर्माण के लिए सड़क की चौड़ाई बढ़ाने में रक्षा मंत्रालय की कोई दुर्भावना नहीं है। अदालत सशस्त्र बलों की ढांचागत जरूरतों का अनुमान नहीं लगा सकती है।मामला सुप्रीम कोर्ट में क्यों पहुंचा था?
केंद्र सरकार परियोजना के तहत सड़कों की चौड़ाई 10 मीटर तक करना चाहती है। इसके लिए केंद्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, जिसके तहत कोर्ट से मांग की गई थी कि वह आठ सितंबर, 2020 को दिए अपने आदेश में संशोधन करे। इस आदेश के तहत सड़कों की चौड़ाई 5.5 मीटर तक सीमित करने का आदेश दिया गया था।
परियोजना की कल्पना कब की गई?
केंद्र की करीब 12,000 करोड़ रुपये की राजमार्ग विस्तार परियोजना की परिकल्पना 2016 में की गई थी, जिसमें उत्तराखंड के चार प्रमुख मंदिरों- बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को कवर करते हुए चार धाम सर्किट में सभी मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए 889 किलोमीटर पहाड़ी सड़कों को चौड़ा किया गया था। दिसंबर 2016 में पीएम नरेंद्र मोदी ने इस की आधारशिला रखी थी।
केंद्र सरकार की चार धाम परियोजना
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विवाद क्या था
2018 में, पेड़ों की कटाई, पहाड़ियों को काटने और डंपिंग (खुदाई गई सामग्री) के कारण हिमालयी पारिस्थितिकी पर इसके संभावित प्रभाव के लिए एक गैर सरकारी संगठन ने सड़क-विस्तार परियोजना को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मुद्दों की जांच के लिए पर्यावरणविद् रवि चोपड़ा के तहत एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) का गठन किया। समिति में कुल 21 सदस्य थे।
सड़कों के चौड़ीकरण को लेकर समिति में असहमति होने पर जुलाई 2020 में एचपीसी ने दो रिपोर्ट प्रस्तुत की। एचपीसी के 21 सदस्यों में जो 14 सरकारी अधिकारी थे, उन्होंने बहुमत से रिपोर्ट ने परियोजना में परिकल्पित 12 मीटर की चौड़ाई का समर्थन किया। सितंबर में, सुप्रीम कोर्ट ने चोपड़ा सहित चार एचपीसी सदस्यों की सिफारिश को बरकरार रखा और सड़क को 5.5 मीटर (1.5 मीटर ऊंचे फुटपाथ के साथ) तक सीमित करने की बात कही।
कहा गया कि सड़क की चौड़ाई के लिए अतिरिक्त ढलान काटने, ब्लास्टिंग, टनलिंग, डंपिंग और वनों की कटाई की जरूरत होगी जो हिमालयी इलाके को और अस्थिर कर देगी। इससे भूस्खलन बढ़ सकता है और क्षेत्र अचानक बाढ़ की चपेट में भी आ सकता है। एचपीसी के अध्यक्ष चोपड़ा ने अगस्त 2020 में पर्यावरण मंत्रालय को एक पत्र लिखा। जिसमें उन्होंने यह जिक्र किया कि वैधानिक मानदंडों का उल्लंघन करके परियोजना को कैसे लागू किया जा रहा है?
2018 में, पेड़ों की कटाई, पहाड़ियों को काटने और डंपिंग (खुदाई गई सामग्री) के कारण हिमालयी पारिस्थितिकी पर इसके संभावित प्रभाव के लिए एक गैर सरकारी संगठन ने सड़क-विस्तार परियोजना को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मुद्दों की जांच के लिए पर्यावरणविद् रवि चोपड़ा के तहत एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) का गठन किया। समिति में कुल 21 सदस्य थे।
सड़कों के चौड़ीकरण को लेकर समिति में असहमति होने पर जुलाई 2020 में एचपीसी ने दो रिपोर्ट प्रस्तुत की। एचपीसी के 21 सदस्यों में जो 14 सरकारी अधिकारी थे, उन्होंने बहुमत से रिपोर्ट ने परियोजना में परिकल्पित 12 मीटर की चौड़ाई का समर्थन किया। सितंबर में, सुप्रीम कोर्ट ने चोपड़ा सहित चार एचपीसी सदस्यों की सिफारिश को बरकरार रखा और सड़क को 5.5 मीटर (1.5 मीटर ऊंचे फुटपाथ के साथ) तक सीमित करने की बात कही।
कहा गया कि सड़क की चौड़ाई के लिए अतिरिक्त ढलान काटने, ब्लास्टिंग, टनलिंग, डंपिंग और वनों की कटाई की जरूरत होगी जो हिमालयी इलाके को और अस्थिर कर देगी। इससे भूस्खलन बढ़ सकता है और क्षेत्र अचानक बाढ़ की चपेट में भी आ सकता है। एचपीसी के अध्यक्ष चोपड़ा ने अगस्त 2020 में पर्यावरण मंत्रालय को एक पत्र लिखा। जिसमें उन्होंने यह जिक्र किया कि वैधानिक मानदंडों का उल्लंघन करके परियोजना को कैसे लागू किया जा रहा है?
चीन सीमा पर वैली ब्रिज बनाने के बाद बीआरओ की टीम (फाइल फोटो)
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अमर उजाला
रक्षा का कोण कब जुड़ा
परियोजना कई तरह की बाधाओं से जूझ रही थी तभी इसे रक्षा मंत्रालय का समर्थन हासिल हुआ। मंत्रालय ने नवंबर में सुप्रीम कोर्ट के सामने एक अपील दायर की, जिसमें सेना की जरूरतों के हिसाब से डबल-लेन सड़क की मांग की गई। केंद्र ने कहा कि चीन की सीमा तक सैनिकों और हथियारों की आवाजाही आसान बनाने के लिए इस परियोजना का सामरिक महत्व बढ़ जाता है।
केंद्र सरकार ने बताया क्यों है चौड़ी सड़कों की आवश्यकता
शुरूआत में इस परियोजना को मुख्य रूप से चार धाम यात्राओं (तीर्थयात्रा) को सुविधाजनक बनाने और पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से किया जा रहा था। लेकिन बाद में इसमें रक्षा कोण जुड़ गया और मंत्रालय ने दलील दी कि इस परियोजना से चीन सीमा के करीब के क्षेत्रों में सैनिकों की आवाजाही की सुविधा मिलेगी। अचानक चौड़ी सड़कों के निर्माण का यही एकमात्र औचित्य बन गया। केंद्र सरकार ने अलग-अलग सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट को बताया कि चीन ने तिब्बत क्षेत्र में एक बड़ा निर्माण किया है और सेना को 1962 की युद्ध जैसी स्थिति से बचने के लिए भारी वाहनों को भारत-चीन सीमा तक ले जाने के लिए चौड़ी सड़कों की जरूरत है।
केंद्र सरकार ने स्विट्जरलैंड के अंतरराष्ट्रीय सलाहकारों के साथ चर्चा की है और समस्याओं का विश्लेषण करने की कोशिश की है। नई डीपीआर बनाई गई। रणनीतिक दृष्टि से इस कदम को अहम मानते हुए सरकार ने पर्यावरण का भी ध्यान रखने की बात कही है। पर्यावरण की देखभाल के लिए एक पेड़ को बराबर संख्या में लगाने की बात कही गई है जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचे।
परियोजना कई तरह की बाधाओं से जूझ रही थी तभी इसे रक्षा मंत्रालय का समर्थन हासिल हुआ। मंत्रालय ने नवंबर में सुप्रीम कोर्ट के सामने एक अपील दायर की, जिसमें सेना की जरूरतों के हिसाब से डबल-लेन सड़क की मांग की गई। केंद्र ने कहा कि चीन की सीमा तक सैनिकों और हथियारों की आवाजाही आसान बनाने के लिए इस परियोजना का सामरिक महत्व बढ़ जाता है।
केंद्र सरकार ने बताया क्यों है चौड़ी सड़कों की आवश्यकता
शुरूआत में इस परियोजना को मुख्य रूप से चार धाम यात्राओं (तीर्थयात्रा) को सुविधाजनक बनाने और पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से किया जा रहा था। लेकिन बाद में इसमें रक्षा कोण जुड़ गया और मंत्रालय ने दलील दी कि इस परियोजना से चीन सीमा के करीब के क्षेत्रों में सैनिकों की आवाजाही की सुविधा मिलेगी। अचानक चौड़ी सड़कों के निर्माण का यही एकमात्र औचित्य बन गया। केंद्र सरकार ने अलग-अलग सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट को बताया कि चीन ने तिब्बत क्षेत्र में एक बड़ा निर्माण किया है और सेना को 1962 की युद्ध जैसी स्थिति से बचने के लिए भारी वाहनों को भारत-चीन सीमा तक ले जाने के लिए चौड़ी सड़कों की जरूरत है।
केंद्र सरकार ने स्विट्जरलैंड के अंतरराष्ट्रीय सलाहकारों के साथ चर्चा की है और समस्याओं का विश्लेषण करने की कोशिश की है। नई डीपीआर बनाई गई। रणनीतिक दृष्टि से इस कदम को अहम मानते हुए सरकार ने पर्यावरण का भी ध्यान रखने की बात कही है। पर्यावरण की देखभाल के लिए एक पेड़ को बराबर संख्या में लगाने की बात कही गई है जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचे।