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Budget: नई कर प्रणाली में बदलाव से परिवारों की बढ़ेगी बचत, मांग व खपत में वृद्धि की उम्मीद

Wed, 24 Jul 2024 05:50 AM IST
विशांत श्रीवास्तव अमर उजाला, ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला, ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: विशांत श्रीवास्तव Updated Wed, 24 Jul 2024 05:50 AM IST
सार

मध्य वर्ग व नौकरीपेशा को राहत देने के साथ के साथ उन निवेशकों का भी ध्यान रखा गया है, जो घरेलू बचत को सट्टेबाजी में लगा रहे हैं।

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Changes in the new tax system will increase the savings of families
Tax - फोटो : Istock

विस्तार

लगातार बढ़ रही महंगाई और घरेलू बचत में कमी के बीच सरकार ने आम बजट 2024-25 में नई कर व्यवस्था में संशोधन कर मध्य वर्ग और नौकरीपेशा को राहत देने की कोशिश की है। इन बदलावों से नई व्यवस्था अपनाने वाले करदाताओं को 17,500 रुपये तक की बचत होगी। नई व्यवस्था में तीन लाख रुपये तक की आय पर कर छूट मिलती रहेगी। इसके अलावा, स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये करने से भी नौकरीपेश और मध्य वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, पुरानी कर व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं है।
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एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरूआ का कहना है कि सरकार के इस कदम से मध्य वर्ग की जेब में पैसा बचेगा। इससे न सिर्फ डिस्पोजेबल आय में वृद्धि होगी बल्कि खपत और मांग बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। साथ ही, परिवारों की घरेलू बचत में भी इजाफा होगा, जो 2022-23 में घटकर पांच साल के निचले स्तर पर आ गई। उन्होंने कहा, मध्य वर्ग व नौकरीपेशा के लिहाज से सरकार ने इस फैसले के जरिये उस मध्य वर्ग को भी साधने की कोशिश की है, जो चुनावों के दौरान नाखुश था।
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आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 के आयकर रिटर्न (आईटीआर) भरने वाले कुल आयकरदाताओं में से दो तिहाई ने नई कर व्यवस्था का चुनाव किया। इस अवधि में कुल 8.61 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए गए। 
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अब आयकर कानून को समझने में होगी आसानी
आयकर अधिनियम-1961 की व्यापक समीक्षा का प्रस्ताव है। इसे छह माह में पूरा किया जाएगा। इसका मकसद अधिनियम को संक्षिप्त, स्पष्ट, पढ़ने और समझने में आसान बनाना है। विवाद और मुकदमेबाजी भी घटेगी।

उम्मीदों पर पानी... पुरानी व्यवस्था में कोई राहत नहीं
पुरानी कर व्यवस्था अपनाने वाले करदाताओं को कोई राहत नहीं दी गई है। इसमें आयकर कानून की धारा 80सी के तहत मिलने वाली 1.50 लाख तक की छूट को बढ़ाकर दो लाख करने की मांग की गई थी। साथ ही, करदाताओं की उम्मीद थी कि होम लोन के ब्याज पर छूट की सीमा को दो लाख रुपये बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जा सकता है। लेकिन, ऐसी कोई राहत नहीं मिली।  

कैपिटल गेन्स: म्यूचुअल फंड व शेयर में निवेश पर अधिक कर
शेयर बाजार व सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को अब पहले से अधिक टैक्स भरना पड़ेगा। दरअसल, सरकार ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) की दर को बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया है, जो पहले 10 फीसदी था। इसी तरह, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (एसटीसीजी) टैक्स को भी 15 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया गया है। सरकार का यह कदम उन घरेलू निवेशकों के लिए झटका है, जिन्होंने तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय शेयर बाजारों को थामे रखा है। यह फैसला इसलिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि देश की करीब 20 फीसदी आबादी शेयर बाजार में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर निवेश कर रही है। वहीं, जून 2024 में लोगों ने इक्विटी म्यूचुअल फंड में 40,608.19 करोड़ का निवेश किया, जो मासिक आधार पर 17 फीसदी ज्यादा है।

कैपिटल गेन्स टैक्स को दो हिस्सों में बांटा गया है। शार्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स। एक साल के भीतर शेयर बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। एक साल बाद ऐसा करने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। 

एफएंडओ : निवेशकों की भागीदारी घटाने के लिए एसटीटी में बढ़ोतरी
वायदा एवं विकल्प (एफएंडओ) कारोबार में प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) की दर बढ़ाया जा सकता है। इस फैसले का मकसद जोखिम भरे कारोबार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी को कम करना है। प्रतिभूतियों में विकल्प की बिक्री पर एसटीटी की दर को विकल्प प्रीमियम के 0.0625 फीसदी से बढ़ाकर 0.1 फीसदी करने और प्रतिभूतियों में वायदा की बिक्री पर इसे वायदा कारोबार की कीमत के 0.0125 फीसदी से बढ़ाकर 0.02 फीसदी करने का प्रस्ताव है। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सेबी ने चिंता जताई है कि घरेलू बचत सट्टेबाजी में जा रही है। युवा ऐसे कारोबार में ढेर सारा पैसा खो रहे हैं। इससे घरेलू बचत का इस्तेमाल पूंजी निर्माण के लिए नहीं हो पा रहा है।

इक्विटी नकदी खंड कारोबार में खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी 2023-24 में 35.9 फीसदी पहुंच गई। डिपॉजिटरी के पास डीमैट खातों की संख्या 2023-24 में बढ़कर 15.14 करोड़ पहुंच गई, जो 2022-23 में 11.45 करोड़ थी। एनएसई में पंजीकृत निवेशकों की संख्या मार्च, 2020 के मुकाबले लगभग तीन गुना बढ़कर 31 मार्च, 2024 तक 9.2 करोड़ पहुंच गई। 

शेयर पुनर्खरीद: लाभांश के समान लगाया जाएगा टैक्स
शेयरों की पुनर्खरीद पर शेयरधारकों को मिलने वाले लाभांश के समान कर लगाया जाएगा। यह नियम एक अक्तूबर से लागू होगा। इस कदम से निवेशकों पर कर का बोझ बढ़ जाएगा। इसके अलावा, इन शेयरों को हासिल करने के लिए शेयरधारक जिस राशि का भुगतान करेंगे, उसे उनके पूंजीगत लाभ या हानि की गणना में जोड़ा जाएगा। वर्तमान व्यवस्था के तहत इसे कंपनियों को हुई अतिरिक्त आमदनी मानकर इस पर आयकर लगाया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के इस कदम से निवेशकों पर कर का बोझ बढ़ सकता है।

कर एवं परामर्श फर्म एकेम ग्लोबल के कर भागीदार अमित माहेश्वरी ने कहा, पुनर्खरीद पर लाभांश के रूप में कर से निवेशकों पर टैक्स का बोझ बढ़ सकता है। अभी तक इस पर 20 फीसदी कर लगता है, अब उच्च कर दायरे वाले करदाताओं को अधिक कर देना होगा।

कंपनियां अब इसका इस्तेमाल सिर्फ वहीं करेंगी, जहां उन्हें वास्तव में पूंजी में कमी की जरूरत महसूस होगी, न कि मुनाफा बांटने के लिए।

इंडक्सेशन खत्म...अब पुराना मकान बेचना घाटे का सौदा
बिक्री और खरीद मूल्य के अंतर पर सीधे 12.5% टैक्स भरना होगा। बजट में पुरानी संपत्ति बेचने पर लागू होने वाला इंडक्सेशन खत्म कर दिया गया है।

पहले : पुरानी संपत्ति को बेचने पर जो मूल्य मिलता है उसमें से खरीद मूल्य और संपत्ति खरीद से अब तक महंगाई का असर जोड़कर घटाया जाता था। तब जो राशि विक्रेता को प्राप्त होती है, उस पर 20 फीसदी कैपिटल गेन टैक्स लगता था।

अब : रियल एस्टेट संपत्ति खरीदने में इंडेक्सेशन खत्म कर दिया है। अब सीधे-सीधे विक्रय मूल्य में से खरीद मूल्य को घटाकर जो राशि आएगी, उसपर 12.5 फीसदी कैपिटल गेन टैक्स लगेगा।


इसे ऐसे समझ सकते हैं : कोई संपत्ति 8 या 10 वर्ष पहले 100 रुपये में खरीदी गई। अब 500 रुपये में बेची गई, तो पहले 100 रुपये पर बीच के वर्षों के अनुसार महंगाई दर समायोजित की जाती। इस तरह यह राशि करीब 325 रुपये होती है। इसे 500 में से घटाने पर शेष राशि 175 रुपये होगी, जिसपर 20 फीसदी के दर से 35 रुपये कर बनता। लेकिन अब 500 में से सीधे 100 रुपये घटाया जाएगा। शेष 400 रुपये पर 12.5 फीसदी की दर से 50 रुपये टैक्स वसूला जाएगा।

 
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