Chandrayaan 3: क्या है चंद्रयान के 'गोल्डन वीक' की कहानी? महज 14 दिन में ही खोजे जाएंगे चांद के अनसुलझे रहस्य
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चंदा रे...चंदा रे...कभी तो जमीन पर आ...बैठेंगे बातें करेंगे... अब चांद तो जमीन पर उतरने से रहा, लेकिन चांद पर पहुंचने की हमारी तैयारियां मुकम्मल रूप से आगे बढ़ गईं। देश के प्रमुख वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक ही रहा तो अगले चालीस दिन बाद चांद पर जो होगा, वह देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अंतरिक्ष में की जाने वाली शोध की दशा और दिशा को बदल देगा। दरअसल भारत के मिशन चंद्रयान 3 को चांद की जिस जगह पर उतारा जा रहा है, वहां पर अब तक किसी को भी सफलता नहीं मिली है। अमेरिका के नासा और बाद में इसरो के साथ काम कर चुके देश के प्रमुख वैज्ञानिक प्रोफेसर संजीव सहजपाल कहते हैं कि इस बार का चंद्रयान 3 पिछली बार लांच हुए चंद्रयान 2 के मुकाबले कई गुना ज्यादा बेहतर तरीके से लांच हुआ है। वह कहते हैं कि चांद पर होने वाली सॉफ्ट लैंडिंग के बाद 14 दिन तक रोवर और लैंडर जो हमें सूचनाएं देने वाला है, उससे पूरी दुनिया में चांद के अनुसुलझे रहस्य पता चलेंगे।
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सॉफ्ट लैंडिंग के बाद सिर्फ 14 दिन ही मिलेंगी सूचनाएं
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संजीव सहजपाल कहते हैं कि योजना के मुताबिक 23 से 24 अगस्त के बीच में चंद्रयान की सॉफ्ट लैंडिंग चांद पर हो जाएगी। इसरो के वैज्ञानिकों की योजना के मुताबिक सॉफ्ट लैंडिंग के साथ ही लैंडर और रोवर चांद की सतह पर अपना काम करना शुरू कर देंगे। प्रोफेसर सहजपाल कहते हैं कि लैंडर के साथ ही चांद की सतह पर उतरने वाले रोवर अपने पहियों वाले उपकरण के साथ वहां की सतह की पूरी जानकारी इसरो के वैज्ञानिकों को देना शुरू कर देगा। वह कहते हैं कि सॉफ्ट लैंडिंग के बाद रोवर और लैंडर से जो जानकारी इसरो को मिलेगी, वह 14 दिनों तक ही होगी। उनका कहना है कि रोवर से मिलने वाली जानकारी बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण इसलिए मानी जाती है, क्योंकि वह चांद की सतह पर जाकर आगे बढ़ता रहता है।
इसरो के डाटा सेंटर को मिलेगी पल-पल की जानकारी
उनका कहना है कि 14 दिनों के भीतर रोवर चांद पर अपने तय रास्ते को न सिर्फ पूरा करेगा, बल्कि उसकी पूरी सूचनाएं भी इसरो के डाटा सेंटर को भेजता रहेगा। संजीव सहजपाल का कहना है कि सिर्फ रोवर ही नहीं बल्कि लैंडर के माध्यम से भी सूचनाएं और पूरी तकनीकी जानकारियां मिलती रहेंगी। वह बताते हैं कि लैंडर और रोवर 14 दिनों तक पूरी सक्रियता के साथ हमें सूचनाएं भेजेगा। उनका कहना है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के लिए तैयार किए जाने वाले लैंडर और रोवर के पावर बैकअप की क्षमता 14 दिनों तक सबसे ज्यादा होती है। उसके बाद की सूचनाएं या तो मिलनी बंद हो जाएंगी या उनकी स्पीड न के बराबर हो जाएगी। हालांकि अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का मानना है कि 14 दिनों के भीतर मिलने वाली सूचनाएं अंतरिक्ष में चांद पर की जाने वाली तमाम संभावनाओं की सबसे महत्वपूर्ण जानकारियां होंगी।
इस बार पांच की जगह पर चार इंजन वाला लैंडर
नासा से संबंधित रहे देश के वरिष्ठ वैज्ञानिक संजीव सहजपाल कहते हैं कि शुक्रवार का दिन तो महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके साथ-साथ वह 23 और 24 अगस्त का भी दिन सबसे महत्वपूर्ण होगा, जिस दिन सॉफ्ट लैंडिंग चांद की सतह पर की जाएगी। संजीव कहते हैं कि चंद्रयान 2 की तुलना में चंद्रयान 3 के लैंडर का इंजन भी बदला है। संजीव सहजपाल कहते हैं कि इस बार चांद की सतह पर उतरने वाले लैंडर का इंजन पांच की तुलना में चार इंजन के साथ ही उतरने वाला है। वह कहते हैं कि इसरो के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान 3 के लिए न सिर्फ कड़ी मेहनत की है, बल्कि चंद्रयान 2 की असफलता के बाद बहुत कुछ नई योजना और तकनीकों के साथ उसको चांद के अनसुलझे रहस्य को खोजने के लिए भेजा गया है।
धरती के भूकंपों की तरह चंद्रमा पर भी आ रहे मूनक्वैक
वरिष्ठ वैज्ञानिक संजीव सहजपाल कहते हैं कि जिस तरीके से धरती पर भूकंप आते हैं, उसी तरीके से चंद्रमा पर मूनक्वैक आते हैं। वह कहते हैं कि मिशन चंद्रयान के तहत चांद के तमाम अनसुलझे रहस्य की खोजबीन की जाएगी उसमें इन मूनक्वैक के बारे में भी बहुत महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने वाली हैं। उनका कहना है कि वैसे तो चांद पर आने वाले मूनक्वैक की धरती पर आने वाले भूकंप की तीव्रता बहुत ज्यादा नहीं होती है। लेकिन ये मूनक्वैक ऐसे होते हैं जो कि चांद की सतह पर सूरज के रेडिएशन से बहुत कुछ हलचल पैदा करते हैं। संजीव सहजपाल कहते हैं कि जब चांद की सतह पर लैंडर या रोवर उतरता है, तो उसको चांद की सतह पर होने वाली हलचलों से दो चार होना पड़ता है। यही वजह है कि जब चांद पर मिशन चंद्रयान के लैंड रोवर उसकी सतह पर उतरेंगे, तो ऐसी तमाम चुनौती होंगी, जिनसे जीतकर मिशन चंद्रयान देश के अंतरिक्ष में होने वाले इस मिशन को कामयाबी की ओर ले जाएंगे।
चंद्रयान 1 ने अंतरिक्ष की दुनिया में लगाई थी बड़ी छलांग
वरिष्ठ वैज्ञानिक संजीव सहजपाल कहते हैं कि चंद्रयान 3 की आज सफलतापूर्वक उड़ान के बाद यह कहा जा सकता है कि अंतरिक्ष की दुनिया में भारत की बादशाहत और बढ़ने वाली है। संजीव सहजपाल कहते हैं कि चांद पर भेजे गए हमारे मिशन चंद्रयान 3 से भारत की ताकत अंतरिक्ष की दुनिया में तो मजबूत होगी, लेकिन हमारे इस मिशन से मिलने वाली जानकारी से समूची दुनिया को चांद के अनसुलझे रहस्य को समझाने में फायदा मिलने वाला है। वह कहते हैं कि जब चंद्रयान 1 भारत में लांच किया था, तो उससे मिली हुई तमाम जानकारियों को दुनिया ने अपने चांद के मिशन को आगे बढ़ाने में उपयोग किया। सहजपाल कहते हैं कि चांद पर मिलने वाले पानी की अहम जानकारी भारत के चंद्रयान 1 से ही मिली थी। जिसे कि अमेरिका ने अपने अगले मिशन में और आगे बढ़ाकर उसे एक्सप्लोर करने की तैयारियां कीं। उनका कहना है कि जैसे हमारा मिशन चांद की सतह पर सफलतापूर्वक लैंड कर जाएगा, उसके बाद मिलने वाली जानकारियां चांद की उन तमाम अनसुलझे रहस्य को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ेंगी, जिस पर दुनिया इस वक्त काम कर रही है।