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Vinod Tawde: बिहार में विनोद तावड़े के सामने फडणवीस का प्रदर्शन दोहराने की चुनौती, संगठन कौशल की भी परीक्षा

Mon, 12 Sep 2022 10:16 AM IST
शक्तिराज सिंह सुरेन्द्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई
सुरेन्द्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई Published by: शक्तिराज सिंह Updated Mon, 12 Sep 2022 10:16 AM IST
सार

विनोद तावड़े महाराष्ट्र भाजपा के दूसरे बड़े नेता हैं जिन्हें बिहार भाजपा का प्रभार सौंपा गया है। इससे पहले साल 2020 में महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता रहे देवेन्द्र फडणवीस को बिहार विधानसभा चुनाव प्रभारी बनाया गया था।

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Challenge of repeating Fadnavis's performance in front of Vinod Tawde in Bihar, also a test of organizational
विनोद तावड़े और देवेन्द्र फडणवीस - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

महाराष्ट्र भाजपा के मराठा नेता कहे जाने वाले विनोद तावड़े को बिहार का प्रभारी बनाकर भाजपा ने बड़ा दांव चला है। राजनीतिक रूप से जागरूक राज्य का प्रभारी बनाए जाने के बाद भाजपा महासचिव विनोद तावड़े के सामने बिहार के पूर्व चुनाव प्रभारी रहे देवेन्द्र फडणवीस के साल 2020 के प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती है। साथ ही, यह अवसर राष्ट्रीय राजनीति में उनके संगठन कौशल की परीक्षा का भी है।  
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विनोद तावड़े महाराष्ट्र भाजपा के दूसरे बड़े नेता हैं जिन्हें बिहार भाजपा का प्रभार सौंपा गया है। इससे पहले साल 2020 में महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता रहे देवेन्द्र फडणवीस को बिहार विधानसभा चुनाव प्रभारी बनाया गया था। फडणवीस के नेतृत्व में न केवल वहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की दुबारा सरकार बनी बल्कि नीतीश कुमार की पार्टी जदयू की 43 सीटों के मुकाबले में भाजपा ने 74 सीटें जीती थी। उसके बाद भाजपा के सहयोग से मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार अब लालू प्रसाद की राजद के साथ सत्ता में हैं, जबकि भाजपा सत्ता से बेदखल हो चुकी है। इसलिए बिहार जैसे बड़े राज्य में तावड़े को साल 2024 के लोकसभा चुनाव में केंद्रीय नेतृत्व की कसौटी पर खरा उतरना होगा।
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महाराष्ट्र में फडणवीस से तावड़े का रहा है छत्तीस का आंकड़ा
मुंबई भाजपा के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष रहे विनोद तावड़े को कुशल संगठनकर्ता माना जाता है। वह विधान परिषद में विपक्ष के नेता भी रहे हैं। इसलिए महाराष्ट्र में साल 2014 में देवेन्द्र फडणवीस की सरकार में उन्हें उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री बनाया गया था। उस दौरान तावड़े का मुख्यमंत्री फडणवीस से छत्तीस का आंकड़ा सूबे की राजनीति में चर्जा का विषय था। साल 2019 में उनका टिकट कट गया। इससे कुछ दिनों तक तावड़े को राजनीतिक वनवास झेलना पड़ा। लेकिन उसके बाद उन्होंने जोरदार वापसी की। अब बिहार जैसे राज्य का प्रभारी बनाकार पार्टी ने उन्हें बड़ा उत्तरदायित्व सौंपा है। इसलिए तावड़े की तूलना फडणवीस से की जा रही है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति से परिचित हैं तावड़े
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के महासचिव रहते हुए विनोद तावड़े 90 के दशक में कुछ वर्षों तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में सक्रिय रहे हैं। इसलिए उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीतिक परिस्थिति से वे बखूबी परिचित हैं। बिहार राज्य का प्रभार मिलने से पहले तावड़े हरियाणा भाजपा के प्रभारी थे। पिछले साल तीन कृषि कानूनों के खिलाफ शुरू हुए किसान आंदोलन के दौरान हरियाणा के किसानों के बीच विश्वास बहाल करने में उनकी उल्लेखनीय भूमिका रही। वहीं, चंडीगढ़ नगर निगम के चुनाव में कम सीटें होने के बावजूद भाजपा का महापौर बनाकर उन्होंने नेतृत्व कौशल का परिचय दिया है। महाराष्ट्र भाजपा के नेताओं को भरोसा है कि तावड़े बिहार में कामयाब होंगे।
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