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सुप्रीम कोर्ट: केंद्र सरकार ने कहा, राज्य सरकारें भी धार्मिक या भाषाई समुदाय को अल्पसंख्यक घोषित कर सकती हैं

Sun, 27 Mar 2022 10:54 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 27 Mar 2022 10:54 PM IST
सार

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने कहा है कि राज्यों की सरकारें भी अपनी सीमा के अंदर एक धार्मिक या भाषाई समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा प्रदान कर सकती हैं।

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Centre tells Supreme Court that States too can declare religious or linguistic community as minority news in Hindi
Supreme Court - फोटो : PTI (File)

विस्तार

केंद्र  सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि राज्यों की सरकारों भी अपनी सीमा के अंदर किसी धार्मिक या भाषाई समुदाय को अल्पसंख्यक घोषित कर सकती हैं। केंद्र ने यह बात अधिवर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दाखिल एक याचिका पर कही। इस याचिका में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान अधिनियम 2004 के लिए राष्ट्रीय आयोग के सेक्शन 2(एफ) की वैधता को चुनौती दी गई है। 

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अश्विनी कुमार उपाध्याय ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि यह सेक्शन केंद्र सरकार को बेलगाम शक्ति देता है। उन्होंने इसे मनमाना, तर्कहीन और अपमाननक करार दिया है। इस याचिका को लेकर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा कि राज्यों की सरकारें भी अपनी सीमा के अंदर एक धार्मिक या भाषाई समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा प्रदान कर सकती हैं।
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मंत्रालय ने आगे कहा कि उदाहरण के तौर पर महाराष्ट्र सरकार ने यहूदियों को अपने राज्य की सीमा के अंदर अल्पसंख्यक समुदाय के तौर पर अधिसूचित किया है। इसके अलावा कर्नाटक सरकार की ओर से भी उर्दू, तमिल, तेलुगू, मलयालय, मराठी, तुलू, लमानी, हिंदी, कोंकणी और गुजराती भाषाओं को भी अपने राज्य की सीमा के अंदर-अंदर अल्पसंख्यक भाषाओं का दर्जा प्रदान किया है।
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मंत्रालय ने कहा कि यह देखते हुए कि राज्य अल्पसंख्यक समुदाय की घोषणा कर सकते हैं, याचिकाकर्ता का यह आरोप पूरी तरह गलत है कि यहूदी धर्म, बहावाद और हिंदू धर्म के अनुयायी जो लद्दाख, मिजोरम, लक्षद्वीप, कश्मीर, नगालैंड, मेघायल, अरुणाचल प्रदेश, पंजाब और मणिपुर में असल में अल्पसंख्यक हैं, वह अपनी इच्छानुसार शिक्षण संस्थानों की स्थापना या संचालन नहीं कर सकते।

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