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FCI Rice Price: चावल की कीमत ₹550 प्रति क्विंटल घटी, बढ़ेगी बिक्री; खाद्य सुरक्षा उपायों को भी समर्थन मिलेगा
Fri, 17 Jan 2025 11:50 PM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Fri, 17 Jan 2025 11:50 PM IST
सार
बिक्री बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा उपायों का समर्थन के लिए केंद्र सरकार ने एक नई पहल की शुरुआत की है। इसके तहत राज्यों और इथेनॉल उत्पादकों के लिए ओपन मार्केट सेल स्कीम (ओएमएसएस) के तहत एफसीआई चावल के आरक्षित मूल्य में 550 रुपये प्रति क्विंटल घटाकर 2,250 रुपये कर दिया गया है।
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चावल (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्र ने शुक्रवार को बिक्री बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा उपायों का समर्थन के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है। इसके तहत राज्यों और इथेनॉल उत्पादकों के लिए ओपन मार्केट सेल स्कीम (ओएमएसएस) के तहत एफसीआई चावल के आरक्षित मूल्य में 550 रुपये प्रति क्विंटल घटाकर 2,250 रुपये कर दिया गया है।
सस्ते में मिल सकेंगे चावल
इसका मतलब है कि राज्य सरकारें और इथेनॉल निर्माता सस्ते में चावल खरीद सकेंगे। मामले में खाद्य मंत्रालय के आदेश के अनुसार राज्य सरकारें और राज्य संचालित निगम 12 लाख टन तक खरीद सकते हैं, जबकि इथेनॉल डिस्टिलरी को कम दर पर 24 लाख टन तक खरीदने की अनुमति है।
बता दें कि पहले, राज्य सरकारों और इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों के लिए चावल का आरक्षित मूल्य 2,800 रुपये प्रति क्विंटल था। अब, केंद्र सरकार ने इसे घटाकर 2,250 रुपये कर दिया है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) जो चावल का भंडारण और वितरण करता है, वह इस चावल का प्रबंधन साप्ताहिक ई-नीलामी के जरिए करता है और यह नई नीति 30 जून, 2025 तक लागू रहेगी।
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इन कंपनियों को मिल सकेगा फायदा
केंद्र सरकार के इस कदम के बाद अब निजी व्यापारी और सहकारी समितियां चावल के लिए वही पुराना मूल्य, यानी 2,800 रुपये प्रति क्विंटल ही चुकाएंगी। लेकिन कुछ केंद्रीय सहकारी समितियां जैसे नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार भारत ब्रांड के तहत चावल बेचने के लिए 2,400 रुपये प्रति क्विंटल चुकाएंगी, जो कि थोड़ा कम है।
साथ ही सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि अगले वित्तीय वर्ष (2024-25) में 110 करोड़ लीटर इथेनॉल बनाने के लिए एफसीआई से चावल खरीदा जाएगा। बयान में कहा गया कि अगर संभव हो तो पुराने चावल के स्टॉक को पहले उपयोग में लाने की कोशिश की जाएगी।
इतने टन खरीद सकेंगे चावल
देखा जाए तो इस नीति के तहत राज्य सरकारें और राज्य-निर्मित निगम कुल 12 लाख टन तक चावल खरीद सकते हैं, जबकि इथेनॉल बनाने वाली कंपनियां 24 लाख टन तक खरीद सकती हैं। यह चावल सरकारी भंडारण से खरीदा जाएगा, और इसे ई-नीलामी के माध्यम से बेचा जाएगा।
एक नजर नीति के उद्देश्य पर
बात अगर इस नीति के उद्देश्य की करें तो खाद्य सुरक्षा को बढ़ाना और चावल के वितरण को बेहतर बनाना है। सरकार चाहती है कि चावल के अधिकतम स्टॉक का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने के लिए किया जाए, ताकि इथेनॉल उत्पादन बढ़े।
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सस्ते में मिल सकेंगे चावल
इसका मतलब है कि राज्य सरकारें और इथेनॉल निर्माता सस्ते में चावल खरीद सकेंगे। मामले में खाद्य मंत्रालय के आदेश के अनुसार राज्य सरकारें और राज्य संचालित निगम 12 लाख टन तक खरीद सकते हैं, जबकि इथेनॉल डिस्टिलरी को कम दर पर 24 लाख टन तक खरीदने की अनुमति है।
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बता दें कि पहले, राज्य सरकारों और इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों के लिए चावल का आरक्षित मूल्य 2,800 रुपये प्रति क्विंटल था। अब, केंद्र सरकार ने इसे घटाकर 2,250 रुपये कर दिया है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) जो चावल का भंडारण और वितरण करता है, वह इस चावल का प्रबंधन साप्ताहिक ई-नीलामी के जरिए करता है और यह नई नीति 30 जून, 2025 तक लागू रहेगी।
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इन कंपनियों को मिल सकेगा फायदा
केंद्र सरकार के इस कदम के बाद अब निजी व्यापारी और सहकारी समितियां चावल के लिए वही पुराना मूल्य, यानी 2,800 रुपये प्रति क्विंटल ही चुकाएंगी। लेकिन कुछ केंद्रीय सहकारी समितियां जैसे नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार भारत ब्रांड के तहत चावल बेचने के लिए 2,400 रुपये प्रति क्विंटल चुकाएंगी, जो कि थोड़ा कम है।
साथ ही सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि अगले वित्तीय वर्ष (2024-25) में 110 करोड़ लीटर इथेनॉल बनाने के लिए एफसीआई से चावल खरीदा जाएगा। बयान में कहा गया कि अगर संभव हो तो पुराने चावल के स्टॉक को पहले उपयोग में लाने की कोशिश की जाएगी।
इतने टन खरीद सकेंगे चावल
देखा जाए तो इस नीति के तहत राज्य सरकारें और राज्य-निर्मित निगम कुल 12 लाख टन तक चावल खरीद सकते हैं, जबकि इथेनॉल बनाने वाली कंपनियां 24 लाख टन तक खरीद सकती हैं। यह चावल सरकारी भंडारण से खरीदा जाएगा, और इसे ई-नीलामी के माध्यम से बेचा जाएगा।
एक नजर नीति के उद्देश्य पर
बात अगर इस नीति के उद्देश्य की करें तो खाद्य सुरक्षा को बढ़ाना और चावल के वितरण को बेहतर बनाना है। सरकार चाहती है कि चावल के अधिकतम स्टॉक का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने के लिए किया जाए, ताकि इथेनॉल उत्पादन बढ़े।