Organic Cotton: 'कांग्रेस के आरोप बेबुनियाद, प्रक्रिया सख्त और पारदर्शी', जैविक कपास प्रमाणन पर केंद्र का जवाब
मध्य प्रदेश में जैविक कपास को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार आमने-सामने हैं। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सामान्य कपास को जैविक बताकर बेचे जाने का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की, वहीं केंद्र सरकार ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि जैविक प्रमाणन प्रक्रिया पारदर्शी और सख्त है।
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मध्य प्रदेश में जैविक कपास को लेकर कांग्रेस और केंद्र के बीच जारी तनातनी ने आरोप-प्रत्यारोप के बाजार में हलचल मचा दी है। इसी बीच केंद्र सरकार ने कांग्रेस के उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें मध्य प्रदेश में सामान्य कपास को जैविक कपास बताकर बेचे जाने की कथित गड़बड़ी का मामला उठाया गया था। मामले में वाणिज्य मंत्रालय ने रविवार को कहा कि जैविक उत्पादों के प्रमाणन को लेकर लगाए गए आरोप बेबुनियाद और भ्रामक हैं।
बता दें कि मामले में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने शनिवार को आरोप लगाया था कि इस कथित घोटाले से भारत की जैविक उत्पादों की साख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित हो रही है। उन्होंने इसकी जांच सीबीआई से करवाने की मांग की थी। इसके जवाब में मंत्रालय ने कहा कि यह आरोप राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) जैसे मजबूत नियामक ढांचे को कमजोर करने की कोशिश है।
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आरोपों पर मंत्रालय ने दी सफाई
मंत्रालय ने कहा कि एपीडा (एपीईडीए) जैविक प्रमाणन प्रक्रिया को पारदर्शी, स्पष्ट और सख्त बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने बताया कि जहां भी प्रमाणन में गड़बड़ी या नियमों की जानबूझकर अनदेखी सामने आई है, वहां जांच कर उचित कार्रवाई की गई है। नियम तोड़ने वाले प्रमाणन निकायों और ऑपरेटरों को सजी दी जाती है।
इसके साथ ही केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों को एनपीओपी के तहत जैविक खेती के लिए कोई सब्सिडी नहीं दी जाती है और 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर का आंकड़ा पूरी तरह गलत है। सरकार का कहना है कि बेबुनियाद आरोप लगाकर देश की विश्वसनीय संस्थाओं और जैविक कृषि अभियान की साख को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
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क्या है एनपीओपी, जानें
गौरतलब है कि एनपीओपी की शुरुआत 2001 में हुई थी, ताकि जैविक उत्पादों का निर्यात बढ़ाया जा सके। इसके बाद 2005 में छोटे किसानों के लिए ग्रुप सर्टिफिकेशन की शुरुआत की गई। भारत में फिलहाल 37 सक्रिय सर्टिफिकेशन एजेंसियां हैं, जिनमें 14 राज्य एजेंसियां शामिल हैं। भारत के जैविक प्रमाणन मानकों को यूरोपीय संघ, स्विट्ज़रलैंड, ब्रिटेन और ताइवान ने मान्यता दी है।