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Supreme Court: वन रैंक वन पेंशन का बकाया चुकाने की अवधि बढ़वाने केंद्र पहुंचा SC, पढें सुप्रीम कोर्ट की खबरें

Thu, 15 Dec 2022 10:37 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 15 Dec 2022 10:37 PM IST
सार

शीर्ष अदालत ने 16 मार्च को केंद्र के अपनाए गए ओआरओपी सिद्धांत को बरकरार रखते हुए कहा था कि यह किसी भी ‘संवैधानिक दुर्बलता’ से ग्रस्त नहीं है और बिलकुल भी मनमाना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से तीन महीने के भीतर बकाया का भुगतान करने को कहा था। पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें...

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Centre moves SC seeking 3 months more to clear OROP arrears Supreme Court news update
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

विस्तार

केंद्र सरकार ने सशस्त्र बलों के सभी पात्र पेंशनभोगियों को वन रैंक-वन पेंशन (ओआरओपी) योजना के बकाए के भुगतान की समय सीमा 15 मार्च, 2023 तक बढ़ाने की मांग करते हुए फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। यह दूसरी बार है जब सरकार ने समय बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी है। इससे पहले जून में सरकार ने बकाए की गणना और भुगतान के लिए तीन महीने का समय मांगा था। 

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शीर्ष अदालत ने 16 मार्च को केंद्र के अपनाए गए ओआरओपी सिद्धांत को बरकरार रखते हुए कहा था कि यह किसी भी ‘संवैधानिक दुर्बलता’ से ग्रस्त नहीं है और बिलकुल भी मनमाना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से तीन महीने के भीतर बकाया का भुगतान करने को कहा था। केंद्र ने अपने नए आवेदन में कहा, 16 मार्च 2022 के फैसले के तुरंत बाद रक्षा मंत्रालय के भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग (डीईएसडब्ल्यू) ने रक्षा लेखा महानियंत्रक (सीजीडीए) कार्यालय से मार्च 2022 में पेंशन के अगले संशोधन के लिए टेबल तैयार करने का अनुरोध किया था। 
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केंद्र ने कहा कि सीजीडीए कार्यालय ने कुछ मुद्दे उठाए थे और विभाग से स्पष्टीकरण मांगा था। मुद्दों को जल्दी से हल करने के लिए, विभाग ने संबंधित हितधारकों के साथ एक बैठक बुलाई और अप्रैल, 2022 में आवश्यक स्पष्टीकरण जारी किए गए। दोनों हितधारकों से प्राप्त टिप्पणियों को शामिल करने के बाद, एक अंतिम कैबिनेट नोट तैयार किया गया था। कैबिनेट की मंजूरी के बाद, सीजीडीए को विभिन्न प्रकार की पेंशन टेबल तैयार करने की आवश्यकता होती है, जो स्वयं में समय लेने वाली प्रक्रिया है और इसे 15 मार्च, 2023 तक और बढ़ाने की आवश्यकता है।

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया हलफनामा
पंजाब में बढ़ रहे अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाई के बारे में पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर जानकारी दी है। गुरुवार को पंजाब सरकार ने शीर्ष कोर्ट में बताया कि राज्य में आबकारी विभाग अवैध देशी शराब के निर्माण और इस्तेमाल के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चला रहा है। इन नियमित अभियानों के क्रम में राज्य में लोगों को अवैध शराब को लेकर जागरुक किया जा रहा है। सरकार ने यह भी बताया कि सरकार ही स्टेट एक्साइज फोर्स में खाली पदों को भरने जैसे कुछ अन्य दीर्घकालिक कदम भी उठा रही है। 

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में बढ़ते अवैध शराब के कारोबार पर चिंता व्यक्त की थी। इसके साथ ही सरकार से इस कारोबार पर लगाम लगाने के संबंध में उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देने को भी कहा था। गुरुवार को न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अजय पाल के साथ राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने इस संबंध में उठाए गए कदमों का उल्लेख किया। 

सुप्रीम कोर्ट में राज्य के आबकारी और कराधान विभाग के हलफनामे में कहा गया है कि शराब के अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान शुरू चलाया जा रहा है। इसमें विभाग की पहले से मौजूद इनाम योजना को लोकप्रिय बनाने सहित अन्य माध्यमों से घर में बनी अवैध शराब के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाई जा रही है। हलफनामे में कहा गया है कि केबल टीवी सहित स्थानीय प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से जागरूकता युद्ध स्तर पर की  जाएगी। जहां भी आवश्यक होगा, सोशल मीडिया का भी उपयोग किया जाएगा। 

शीर्ष अदालत में दायर एक अलग हलफनामे में बताया कि पंजाब आबकारी अधिनियम, 1914 के तहत दर्ज मामलों की जांच की निगरानी के लिए राज्य स्तर पर एक अधिकारी को नामित किया गया है। यह अधिकारी महानिरीक्षक रैंक के पुलिस अधिकारी होगा।
 

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
चुनावी बॉन्ड योजना के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई जनवरी में
सुप्रीम कोर्ट चुनावी बॉन्ड योजना के जरिए राजनीतिक दलों के वित्तपोषण की अनुमति देने वाले कानूनों को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर जनवरी के अंतिम सप्ताह में सुनवाई करेगा। राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाने के प्रयासों के तहत राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले नकद चंदे के विकल्प के रूप में चुनावी बॉन्ड को पेश किया गया है। न्यायमूर्ति बीआर गवई और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने कहा कि इस मामले पर सुनवाई की जरूरत है। यह 2015 का मामला है। छुट्टी की शुरुआत से ठीक पहले ऐसी कोई आपात स्थिति नहीं हो सकती। अभी कोई चुनाव भी नहीं है। हम इस पर जनवरी 2023 के अंतिम सप्ताह में सुनवाई करेंगे।
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