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SC: मुस्लिमों के खिलाफ भीड़ हिंसा पर केंद्र-छह राज्यों को नोटिस, फेडरेशन ऑफ इंडियन वुमेन की याचिका स्वीकार

Sat, 29 Jul 2023 06:35 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 29 Jul 2023 06:35 AM IST
सार

याचिका में कहा गया कि भीड़ हिंसा व लिंचिंग के पीड़ितों को तत्काल राहत सुनिश्चित करने के लिए, दिए जाने वाले मुआवजे की कुल राशि का एक हिस्सा अंतरिम मुआवजे के रूप में घटना के तुरंत बाद पीड़ितों या उनके परिवारों को दिया जाना चाहिए।

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Centre and six states got notice on mob violence against Muslims from Supreme court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिमों के खिलाफ लिंचिंग, भीड़ हिंसा मामलों में चिंताजनक वृद्धि को लेकर दाखिल नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वुमेन (एनएफआईडब्ल्यू) की जनहित याचिका पर केंद्र के साथ छह राज्यों को नोटिस जारी किया है। इनमें ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, मध्य प्रदेश और हरियाणा शामिल हैं। जनहित याचिका में कहा गया कि तहसीन पूनावाला फैसले (2018) में शीर्ष अदालत के स्पष्ट दिशा-निर्देश के बावजूद मुसलमानों के खिलाफ लिंचिंग और भीड़ हिंसा के मामलों में चिंताजनक वृद्धि हो रही है।

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जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल ने कहा, विभिन्न हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल करना व्यर्थ होगा। अगर याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट में जाने के लिए कहा जाता है तो कुछ नहीं होगा और इस प्रक्रिया में पीड़ितों को कुछ नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा, तहसीन पूनावाला फैसले के बावजूद घटनाएं हो रही हैं। हम कहां जाएं? यह बहुत गंभीर मामला है।

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तहसीन पूनावाला मामले में दिया था यह फैसला
2018 के पूनावाला फैसले में शीर्ष अदालत ने लिंचिंग और भीड़ हिंसा को रोकने के लिए केंद्र व राज्य सरकारों को व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए थे। वकील सुमिता हजारिका और रश्मि सिंह के माध्यम से दायर एनएफआईडब्ल्यू की याचिका में कई घटनाओं को उजागर किया गया है जो लिंचिंग और भीड़ हिंसा के खतरे को रोकने में राज्य के तंत्र की लगातार विफलता को दर्शाती हैं। याचिका में कहा गया कि लिंचिंग और भीड़ हिंसा की वर्तमान घटनाओं को झूठे प्रचार के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदायों के बहिष्कार की कहानी के परिणाम के रूप में देखा जाना चाहिए।

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मुआवजे का एक हिस्सा तुरंत पीड़ित परिवारों को देने की मांग
याचिका में कहा गया कि भीड़ हिंसा व लिंचिंग के पीड़ितों को तत्काल राहत सुनिश्चित करने के लिए, दिए जाने वाले मुआवजे की कुल राशि का एक हिस्सा अंतरिम मुआवजे के रूप में घटना के तुरंत बाद पीड़ितों या उनके परिवारों को दिया जाना चाहिए।

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