CBI: भगोड़ों की वापसी पर सरकार की सख्ती, सीबीआई प्रमुख बोले- एजेंसियां साझा करें डेटा, बढ़ाएं तालमेल
विदेश भागे अपराधियों की वापसी के लिए केंद्र ने कार्रवाई तेज की है। सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद ने सभी एजेंसियों से बेहतर तालमेल और डेटा साझा करने की अपील की। वहीं 'भगोड़े अपराधियों का प्रत्यर्पण' विषय पर सम्मेलन में गृह सचिव गोविंद मोहन ने कहा कि मजबूत दस्तावेजी साक्ष्य से ही अंतरराष्ट्रीय जांच में सफलता मिलेगी।
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देश से बाहर भाग गए अपराधियों को पकड़ने के लिए केंद्र सरकार ने एक्शन तेज कर दिए है। ऐसे में अब सीबीआई के निदेशक प्रवीण सूद ने शुक्रवार को देश की सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों से अपील की कि वे भगोड़े अपराधियों को विदेशों से वापस लाने के लिए आपस में बेहतर तालमेल बनाएं और डेटाबेस साझा करें। सूद ने यह बात 'भगोड़ों का प्रत्यर्पण चुनौतियां और रणनीतियां' विषय पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में कही, जहां देशभर के राज्य पुलिस प्रमुखों और केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
मामले में सीबीआई के प्रवक्ता के अनुसार, सूद ने कहा कि अगर सभी एजेंसियां मिलकर काम करें और सूचनाएं साझा करें, तो भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई और तेज हो सकती है। सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने कहा कि इस सम्मेलन में हुई चर्चा आने वाली रणनीति का खाका तैयार करेगी। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत की ओर से भेजे गए प्रत्यर्पण अनुरोधों में दस्तावेजी साक्ष्य मजबूत होने चाहिए, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय कानूनी जांच में टिक सकें।
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नई आपराधिक कानूनी प्रावधानों पर भी चर्चा
एनआईए के महानिदेशक सदानंद दाते ने कहा कि नई आपराधिक कानूनों, खासकर 'ट्रायल इन एब्सेंटिया' (अनुपस्थिति में मुकदमा) जैसे प्रावधानों का इस्तेमाल फरार आरोपियों पर किया जा सकता है। गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा था कि देश से भागे भगोड़ों को वापस लाने के लिए समन्वित प्रयास बेहद जरूरी हैं।
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200 से ज्यादा अफसरों ने किया मंथन
सम्मेलन में देशभर की 45 केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के 200 से अधिक अधिकारी शामिल हुए। इसमें गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, सीबीआई, एनआईए, ईडी, एनसीबी, एफआईयू, इंटरपोल समेत अन्य एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल थे।
वहीं कुल 25 अधिकारियों ने प्रस्तुतियां दीं, जिनमें प्रमुख मुद्दे रहे, जिसमें विदेश से सहयोग लेने के मौजूदा चैनलों का बेहतर इस्तेमाल, भगोड़ों की लोकेशन ट्रैकिंग में तकनीक का इस्तेमाल, वित्तीय लेन-देन की जांच से भगोड़ों तक पहुंच और नारकोटिक्स, आतंकवाद, साइबर क्राइम और आर्थिक अपराधियों पर विशेष चर्चा शामिल है।