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कोरोना के खिलाफ केंद्र सरकार का बड़ा ऑपरेशन, प्रभावित जिलों में पहुंचाए जाएंगे दस हजार वेंटिलेटर

Thu, 18 Jun 2020 07:48 AM IST
श्रीधर मिश्रा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: श्रीधर मिश्रा Updated Thu, 18 Jun 2020 07:48 AM IST
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Central government's big operation against Corona, ten thousand ventilators will be delivered in affected districts
फाइल फोटो - फोटो : PTI

कोविड अस्पतालों में वेंटिलेटर की कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने अब राज्यों की मदद करना शुरू कर दिया है। पहली खेप में तीन हजार वेंटिलेटर भेजे जा चुके हैं। वहीं, अब दूसरी खेप के जरिए सात हजार वेंटिलेटर उपलब्ध कराने जाने की तैयारी है। जल्द ही कोरोना प्रभावित जिलों में ये उपलब्ध हो सकेंगे। हालांकि केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस से सर्वाधिक प्रभावित जिलों को सबसे पहले वेंटिलेटर उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। जानकारी के अनुसार पीएम केयर्स फंड से 50 हजार वेंटिलेटर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

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सोशल मीडिया पर भी इन वेंटिलेटर्स की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। एक अध्ययन का हवाला देते हुए बीते 70 साल में पहली बार एक साथ देश में 50 हजार वेंटिलेटर उपलब्ध कराए जाने का दावा किया जा रहा है।
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इसी अध्ययन में बताया गया है कि कोरोना महामारी से पहले देश में करीब 47,481 वेंटिलेटर थे, जिनमें से सरकारी अस्पतालों में 17,850 और प्राइवेट क्षेत्र में 29,631 थे। हालांकि, एक सच यह भी है कि देश में कभी भी वेंटिलेटर की सटीक संख्या सरकारी आंकड़ों में नहीं बताई गई है।
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स्वदेशी वेंटिलेटर का उत्पादन तेजी से बढ़ा

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि कोरोना महामारी के वक्त वेंटिलेटर की कमी को देखते हुए करीब 70 हजार नए वेंटिलेटर खरीदने की तैयारी की गई थी जिसमें से 50 हजार वेंटिलेटर को अब उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि, वेंटिलेटर इससे पहले भारत में विदेशों से ही आयतित होते थे। लेकिन बीते कुछ माह में भारत में स्वदेशी वेंटिलेटर का उत्पादन तेजी से बढ़ा है। उन्होंने बताया कि मेक इन इंडिया के तहत तीन हजार स्वदेशी वेंटिलेटर भेजे जा चुके हैं। करीब दो हजार करोड़ रुपये की लागत से स्वदेशी 50 हजार वेंटिलेटर को खरीदा जा रहा है।

इन शहर/राज्यों को मिलेंगे पहले

जानकारी के अनुसार जहां सबसे ज्यादा कोरोना के मरीज सामने आ रहे हैं वहां के अस्पतालों में सबसे पहले वेंटिलेटर की कमी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल देश में 65.14 फीसदी कोरोना संक्रमित मरीज केवल चार राज्य में मिले हैं। महाराष्ट्र में 32.04, तमिलनाडु में 13.56, दिल्ली में 12.62 और गुजरात में 6.94 फीसदी मरीज मिल चुके हैं। ऐसे में सबसे पहले यहां के अस्पतालों की कमी को ध्यान में रखा जा रहा है।


कोविड मरीजों को कम जरूरत

दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया के मुताबिक, ज्यादातर मरीज बिना लक्षण वाले हैं। करीब 20 फीसदी ऐसे हैं, जिन्हें ऑक्सीजन या आईसीयू केयर की जरूरत है। इनमें से 3 से 5 फीसदी को वेंटिलेटर पर रखा जा रहा है। शुरूआत से ही वेंटिलेटर बढ़ाने पर जोर था। एम्स के ही पल्मोनरी विभागाध्यक्ष डॉ. अनंत मोहन का कहना है, स्वदेशी वेंटिलेटर्स का निर्माण होने से मजबूत संदेश मिल रहा है। मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत कम पड़ रही है लेकिन महामारी के बाद इनका इस्तेमाल अन्य मरीजों के लिए किया जा सकेगा, जो कमी के चलते काफी चुनौतीपूर्ण होता है।

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