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केंद्र का पक्ष: ममता ने तोड़ा प्रोटोकॉल, सीएस विवाद पर फैलाया भ्रम...जानें विवाद की पूरी कहानी

Wed, 02 Jun 2021 02:16 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 02 Jun 2021 02:16 AM IST
सार

पीएम नरेंद्र मोदी के साथ समीक्षा बैठक में सीएम ममता बनर्जी करीब 30 मिनट की देरी से पहुंची थीं। इस दौरान मुख्य सचिव अल्पन बंद्योपाध्याय भी उनके साथ थे और वापस भी तुरंत चले गए थे। लेकिन ममता बनर्जी का कहना है कि वो इजाजत लेकर वापस गई थीं। 

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central government replied over cm mamata allegation on meeting dispute
ममता बनर्जी और पीएम मोदी - फोटो : Amar ujala

विस्तार

केंद्रीय सूत्रों ने मंगलवार को दावा किया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में चक्रवात के बाद की स्थिति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली समीक्षा बैठक से बिना इजाजत लिए गायब रहकर तय प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है।

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साथ ही सूत्रों ने यह भी कहा कि मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय को लेकर उपजे विवाद में भी ममता गुमराह कर रही हैं। पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री के कलईकुंडा में लैंड करने के बाद ममता बनर्जी उनसे छोटी सी मुलाकात कर दीघा के लिए निकल गई थीं और उन्होंने राज्य में चक्रवात से हुए नुकसान की समीक्षा बैठक में भाग नहीं लिया था।
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ममता का कहना है कि उन्होंने जाने से पहले प्रधानमंत्री की इजाजत ली थी, लेकिन केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि पीएम मोदी ने बनर्जी को बैठक से जाने की इजाजत नहीं दी थी। सूत्रों ने कहा, यह स्पष्ट है कि ममता बनर्जी का इंतजार करने के लिए मजबूर होने का बयान पूरी तरह झूठा है। इसके उलट उन्होंने पीएम को इंतजार कराया था।
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सूत्रों ने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री ने बैठक में शामिल होने की सहमति दी थी, लेकिन नेता विपक्ष शुभेंदु अधिकारी के भी शामिल होने की जानकारी मिलने पर अपना मन बदल लिया था। यह बात ममता ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में भी मानी है।

सूत्रों ने यह भी कहा कि बंगाल की सीएम ने अन्य अधिकारियों को भी बैठक में शामिल होने से रोका था और इसके चलते प्रधानमंत्री की तरफ से तय समीक्षा बैठक रद्द करनी पड़ी थी। सूत्रों ने कहा कि ममता ने ऐसा इसलिए किया था, क्योंकि उन्हें अहसास हो गया था कि उन्हें बैठक खत्म होने तक इंतजार करना होगा।

सूत्रों ने कहा कि ममता बनर्जी ने नेता विपक्ष की मौजूदगी के कारण समीक्षा बैठक का बहिष्कार किया। इसे केंद्र सरकार ने कोई मुद्दा नहीं बनाया, क्योंकि यह मामला चक्रवात राहत गतिविधि का था। उन्हें सलाह दी गई थी कि पीएम बैठक के तत्काल बाद उनसे मिलेंगे, क्योंकि इसके लिए ही वह राज्य के दौरे पर आए हैं।

सूत्रों ने मुख्य सचिव बंद्योपाध्याय को लेकर ममता के विरोध को असांविधानिक और अनूठा बताया। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव के अखिल भारतीय सेवा का अधिकारी होने के चलते उनका स्थानांतरण आदेश पूरी तरह सांविधानिक था।

उन्होंने कहा, मुख्य सचिव ने अपने सांविधानिक कर्तव्यों की उपेक्षा करने का चयन करते हुए पीएम के सामने कोई प्रजेंटेशन नहीं रखा और न ही पश्चिम बंगाल सरकार का कोई अधिकारी उनकी समीक्षा बैठक में शामिल हुआ।

सूत्रों ने इस पर भी जोर दिया कि अखिल भारतीय सेवा के किसी अधिकारी से राजनीति का हिस्सा बनने की उम्मीद नहीं की जाती और ममता यह सब जानती थीं, इसलिए बंद्योपाध्याय की सेवानिवृत्ति उन्हें बचाने की आखिरी कोशिश थी।

सूत्रों ने कहा, मुख्य सचिव की सेवानिवृत्ति दिखाती है कि ममता बनर्जी बैकफुट पर हैं। वह जानती हैं कि इस मामले में तथ्य मुख्य सचिव के खिलाफ हैं और अखिल भारतीय सेवा का अधिकारी होने के नाते उनके व्यवहार के चलते कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई संभव है। बैठक को तय कार्यक्रम के लिहाज से सुनिश्चित कराना बंद्योपाध्याय की जिम्मेदारी थी।

सूत्रों ने कहा, इसी कारण ममता बनर्जी ने पीएम से बंद्योपाध्याय का कार्यकाल तीन महीने बढ़ाने की स्वीकृति लेने के कुछ ही घंटे के अंदर यू-टर्न लेकर उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया।

गृह मंत्रालय ने बंद्योपाध्याय को भेजा नोटिस, तीन दिन में मांगा जवाब
पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। बंद्योपाध्याय को आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51-बी के तहत कारण बताओ नोटिस सौंपा है, जिसका उन्हें तीन दिन में जवाब देना है।


केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की और बताया कि यह नोटिस सोमवार को बंद्योपाध्याय के सेवानिवृत्त होने से कुछ ही घंटे पहले उन्हें सौंप दिया गया था, यानी उन्हें केंद्र सरकार के आदेश का पालन करने से इनकार करने का जवाब देना ही होगा।

अधिकारी के अनुसार, केंद्र सरकार के आदेश का पालन से इनकार करना आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51-बी का उल्लंघन होता है।

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