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केंद्र ने ई-वाहनों पर अपनी ही नीति नहीं मानी, सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्ते में मांगा जवाब

Fri, 17 Jan 2020 09:36 PM IST
देव कश्यप अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Fri, 17 Jan 2020 09:36 PM IST
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Central Government not accept own policy on e-vehicles, Supreme court asked answers in four weeks
supreme court - फोटो : फाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने के लिए दायर जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने शुक्रवार को नोटिस जारी कर केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय को चार हफ्ते का वक्त दिया है। इसके बाद मामले पर सुनवाई होगी।

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सीजेआई बोबडे ने कहा कि हम एक समिति बनाने पर विचार कर रहे हैं जो वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल पर गौर करेगी। याचिका में वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन पर लगाम लगाने के लिए सार्वजनिक वाहनों और सरकारी वाहनों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने की केंद्र की नीति के क्रियान्वयन की अपील की गई है।
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इसमें आरोप लगाया गया है कि सरकार ने सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने की अपनी ही नीति का पालन करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए। एक गैर सरकारी संगठन द्वारा दायर याचिका पर कोर्ट में दलील रखते हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा,पिछले साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर केंद्र से जवाब मांगा था, लेकिन अभी तक केंद्र ने जवाब नहीं दिया। भूषण ने कहा, इलेक्ट्रिकल वाहनों के निर्माण के साथ-साथ पेट्रोल पंप की तर्ज पर चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएं।

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एक एनजीओ ने दी थी याचिका

सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि सरकार ने 2012 में इलेक्ट्रिक वाहन नीति बनाई थी ताकि वायु प्रदूषण पर रोक लगाई जा सके। इसके साथ ही हाइब्रिड व इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण को लेकर भी नीति बनी थी। याचिका में कहा गया है कि नीति तो बनी, मगर अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है। इससे ग्लोबल वार्मिंग का स्तर भी लगातार बढ़ता जा रहा है।

नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान, 2020

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए भारी उद्योग मंत्रालय ने 2015 में नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान, 2020 (एनईएमएमपी-2020) तैयार किया था। याचिका में एनईएमएमपी-2020 की सिफारिशों को लागू करेन के लिए केंद्र को निर्देश देने की अपील की गई है। साथ ही नीति आयोग की शून्य उत्सर्जन वाहन नीति ढांचा को अपनाए जाने की जरूरत पर बल दिया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि 2020 तक देश में तकरीबन 70 लाख हाइब्रिड वाहनों की बिक्री का लक्ष्य रखा गया था, मगर अब तक सिर्फ 2.63 लाख इलेक्ट्रिक वाहन ही अपनाए जा सके हैं।

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