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जम्मू-कश्मीर में एकतरफा संघर्ष विराम के पक्ष में नहीं केंद्र सरकार

Thu, 10 May 2018 10:52 PM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Thu, 10 May 2018 10:52 PM IST
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Central government is not in favor of unilateral ceasefire violation in Jammu and Kashmir
- फोटो : PTI

 केंद्र सरकार पवित्र रमजान माह के दौरान जम्मू-कश्मीर में एकतरफा संघर्ष विराम के ऐलान को लेकर उत्सुक नजर नहीं आ रही है। इसकी मुख्य वजह राज्य के हालातों का अनुकूल न होना और वर्ष 2000 में इसके वांछित परिणाम सामने न आना है। यह जानकारी अधिकारियों ने दी। 

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अधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार के संघर्ष विराम के अनुरोध पर यदि केंद्र सहमत हो जाता है तो इसकी कोई गारंटी नहीं है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी गुट भी इसका पालन करेंगे। लड़ाकू अभियानों की शुरुआत नहीं करने के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 2000 में की गई घोषणा का भी अधिकारियों ने जिक्र किया।
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उन्होंने कहा कि 18 साल पहले इस एलान के चार महीनों के दौरान आतंकियों ने श्रीनगर एयरपोर्ट पर बड़ा हमला किया था। लश्कर ए ताइबा के छह आतंकियों के हमले में दो जवान और दो नागरिक मारे गए थे। उस दौरान घाटी में सक्रिय सभी आतंकी गुटों ने सरकार के प्रस्ताव को ठुकराया दिया था। उस दौरान आतंकी कश्मीर में खुलेआम घूम रहे थे। क्या कोई इसकी गारंटी लेगा कि ऐसे हालात फिर से नहीं दोहराए जाएंगे। उन्होेंने कहा कि इस वक्त संघर्ष विराम की घोषणा कमजोरी समझी जाएगी। 
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एक अन्य अधिकारी ने कश्मीर के मौजूदा हालात को अशांत करार दिया। उन्होंने कहा कि पिछले साल माह के दौरान करीब 80 फीसदी हिंसा की घटनाएं हुई हैं और ज्यादातर मुठभेड़ स्थलों पर आतंकियों के बचाव के लिए नागरिकों के ढाल बनते देखा गया है। ऐसी परिस्थितियों में संघर्ष विराम का एलान किया जाना सरकार और सुरक्षा बलों की कमजोरी को दिखाएगा। उन्होंने पिछले साल आठ अमरनाथ यात्रियों की आतंकी हमले में मौत को भी याद दिलाया। हालांकि उन्होंने कहा कि यह एक राजनीतिक फैसला होगा और इसे सरकार के उच्चस्तर से लिया जाएगा।  


सभी दलों की बैठक के बाद जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार से रमजान की शुरुआत से अमरनाथ यात्रा के पूरे होने तक एकतरफा संघर्ष विराम पर विचार करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि संघर्ष विराम से लोगों को राहत मिलेगी और राज्य में बेहतर माहौल बनाने में मदद होगी। इस साल अब तक 55 से अधिक आतंकी और 27 नागरिकों की मौत हो चुकी है। 

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