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25,000 टन प्याज भंडारण की तैयारी में केंद्र सरकार, बरसात में कीमत बढ़ने की आशंका को लेकर उठाया कदम

Thu, 05 Jul 2018 05:51 AM IST
पीयूष पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
पीयूष पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 05 Jul 2018 05:51 AM IST
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Central Government in preparation of 25,000 tonnes of onion storage

बरसात के मौसम में प्याज की कीमत बढ़ने की आशंका के मद्देनजर केंद्र सरकार ने अभी से कमर कस ली है। सरकार महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात सहित अन्य राज्य सरकारों के साथ मिलकर 25,000 टन का भंडारण करने की तैयारी में है। बाजार में प्याज की कीमत बढ़ने पर इस प्याज को उतारा जाएगा। केंद्रीय उपभोक्ता एवं खाद्य मंत्रालय मुनाफाखोरी और बिचौलियों द्वारा मानसून के दौरान प्याज के दाम बढ़ाने की कवायदों पर रोक लगाने के उपायों पर भी विचार कर रहा है।

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माना जा रहा है कि अगले सप्ताह मंत्रालय के अधिकारी प्याज उत्पादक राज्यों के शीर्ष अधिकारियों के साथ भंडारण को लेकर चर्चा करेंगे। इसमें राज्यों से भंडारण के लिए सहयोग करने को कहा जाएगा। मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक, 25,000 टन प्याज का भंडारण किए जाने से मानसून के दौरान दामों को नीचे लाने में मदद मिलेगी।
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फिलहाल मंत्रालय सीधे तौर पर इसका बफर स्टॉक नहीं बनाना चाहता है। इसी के मद्देनजर चार राज्यों की सरकारों के साथ मिलकर इसका भंडारण किए जाने पर विचार चल रहा है।
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गौरतलब है कि मानसून आने से पहले ही सब्जियों के दाम बढ़ने लगे हैं और बारिश के मौसम में खासतौर पर प्याज के दाम लोगों की आंखों से आंसू निकाल देते हैं।

राज्यों से रख-रखाव में मदद की जरूरत
अधिकारी के मुताबिक, राज्यों से हमें सिर्फ प्याज के भंडारण और रख-रखाव की सहायता चाहिए होगी। इसकी खरीद में पूरा खर्च केंद्र की ओर से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान प्याज की आवक में भारी कमी आती है। इसकी पहली वजह तो मौसम रहता है, जबकि दूसरी वजह निजी मुनाफाखोरी और बिचौलियों का खेल होता है। एक तरफ हम भंडारण करेंगे और अन्य कदम उठाएंगे। इसके लिए संबंधित राज्य सरकारों से फौरी तौर पर चर्चा की गई है। मंत्रालय के अधिकारी इस पर एकमत हैं और अब राज्यों से बात कर इस पर कदम उठाया जाएगा।

पूर्वोत्तर व बंगाल में बढ़ी कीमत
पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में प्याज के दाम बढ़ने लगे हैं। फिलहाल इसकी वजह आवक में कमी बताई जा रही है। लेकिन लगातार बारिश होने की स्थिति में इसकी कीमतों में तेज उछाल आएगा। अगर सरकार इससे पहले राज्यों के साथ मिलकर उपाय कर लेती है, तो आम उपभोक्ता को ज्यादा परेशानी नहीं झेलनी पड़गी, जबकि विफल रहने पर प्याज के दाम लोगों को परेशान करेंगे।


गौरतलब है कि सरकार ने पिछले साल मार्च, 2018 तक व्यापारियों के लिए तय सीमा से अधिक प्याज भंडारण पर रोक लगाई थी। यह निर्णय प्याज की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए किया गया है। यह फैसला कम आवक के चलते राष्ट्रीय राजधानी में प्याज के दाम 55 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने पर लिया गया था। पिछले साल की घटना के मद्देनजर सरकार इस बार पहले से सतर्क है और कदम उठाने की तैयारी कर रही है।

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