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Budget 2023: 157 नर्सिंग कॉलेज होंगे शुरू, फार्मा में अनुसंधान को बढ़ावा, एनीमिया के खिलाफ राष्ट्रीय अभियान

Thu, 02 Feb 2023 05:36 AM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Thu, 02 Feb 2023 05:36 AM IST
सार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि 2019 की तुलना में इस बार स्वास्थ्य क्षेत्र को कुल जीडीपी का 2.1 फीसदी आवंटित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। 2019 के बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को कुल जीडीपी का 1.40 फीसदी आवंटित हुआ था।

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central government in its 10th budget emphasized on better medical service to the patients
Medical Insurance - फोटो : iStock

विस्तार

सरकार ने अपने 10वें बजट में स्वास्थ्य को चार बड़ी सौगात देते हुए मरीजों की बेहतर चिकित्सा सेवा पर जोर दिया है। बजट में एक ओर  157 नए नर्सिंग कॉलेज शुरू करने की घोषणा की है। वहीं सिकलसेल एनीमिया के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर  पर अभियान शुरू करने का भी संकल्प दिलाया है।  
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कोरोना महामारी में विकसित स्वास्थ्य ढांचा भी सरकार ने जनता यानी सरकारी और निजी दोनों ही क्षेत्रों को उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा है। विश्व स्तर पर भारत को 'वर्ल्ड ऑफ फार्मेसी' का दर्जा दिलाने के लिए सरकार ने फॉर्मा क्षेत्र में अनुसंधान बढ़ाने के लिए जल्द ही एक नया राष्ट्रीय कार्यक्रम लॉन्च करने की घोषणा भी की।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि 2019 की तुलना में इस बार स्वास्थ्य क्षेत्र को कुल जीडीपी का 2.1 फीसदी आवंटित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। 2019 के बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को कुल जीडीपी का 1.40 फीसदी आवंटित हुआ था। पिछले वर्ष 2022 के बजट में स्वास्थ्य मंत्रालय को कुल 83 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया, जो वित्त वर्ष 2020-21 में 73,932 करोड़ की तुलना में लगभग 14 से 15% की वृद्धि थी। इस बार 2023-24 के बजट में स्वास्थ्य मंत्रालय को कुल 86,175 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से 1.04 लाख करोड़ रुपये की मांग रखी गई थी। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में कई सुधार की जरूरत है। इसलिए नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जाएगी, साथ ही मेडिकल कॉलेज में ज्यादा से ज्यादा प्रयोगशालाओं की व्यवस्था की जाएगी।
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सेहत के लिए चार खास खुराक
साल 2047 तक सिकलसेल और एनीमिया की बीमारी को जड़ से खत्म कर दिया जाएगा, क्योंकि खून की कमी के कारण हर साल कई लोगों की मौत हो जाती है। उन्होंने बताया कि सिकलसेल प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में 40 साल तक के सात करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग यानी जांच की जाएगी। वित्त मंत्री ने कहा कि हम देश की अर्थव्यवस्था के माध्यम से उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं। अमृत काल में हमारा लक्ष्य सर्वांगीण विकास का है।

अब खुद के शोध कर सकेंगे फार्मा उद्योग
सरकार ने फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में अनुसंधान के लिए कार्यक्रम तैयार करने की घोषणा की है। सरकार का मानना है कि अनुसंधान में निवेश के लिए प्रोत्साहन जरूरी है। नई दिल्ली स्थित केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन से जानकारी मिली है कि आगामी दिनों में फार्मा उद्योग खुद के शोध कर सकेंगे। इनके लिए प्रयोगशाला से लेकर अन्य सभी तरह के संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगें। ऐसा करने की सबसे बड़ी वजह गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना भी है।

आईसीएमआर लैब का प्रयोग निजी क्षेत्र में भी
आईसीएमआर की प्रयोगशालाओं का इस्तेमाल निजी क्षेत्र में भी किया जाएगा। नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने जानकारी दी है कि जल्द ही वे इस दिशा में कार्य शुरू करेंगे। उनके नेटवर्क में शामिल करीब 60 से अधिक प्रयोगशालाओं में से करीब 30 से 40 फीसदी का चयन किया जाएगा। इसके बाद, जिस किसी संस्थान या फिर शोधार्थियों को शोध करने के लिए इसकी आवश्यकता होगी, वे सीधे तौर पर आईसीएमआर से संपर्क कर सकेंगे। प्रयोगशालाओं में मौजूद सभी संसाधनों का इस्तेमाल वे कर सकेंगे।  

उपकरण बनेंगे भरोसेमंद युवा ले सकेंगे प्रशिक्षण
सरकार ने स्वदेशी चिकित्सा उपकरणों को बढ़ावा देने के लिए बड़ी घोषणा की है। सरकार जल्द ही युवाओं को ऐसे कोर्स उपलब्ध कराएगी जिनके जरिये वे चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता को लेकर शिक्षा हासिल कर सकेंगे। इसका एक फायदा रोजगार सृजन के रूप में भी रहेगा। वित्त मंत्री ने कहा, मौजूदा संस्थानों में चिकित्सा उपकरणों के लिए पूर्ण समर्पित बहुविषयक पाठ्यक्रम को बढ़ावा दिया जाएगा।

डिजिटल सेहत : हेल्थ आईडी पर 341 करोड़ होंगे खर्च
देश में डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा को एकीकृत करने और आवश्यक सहयोग प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन  का गठन किया। इस योजना के तहत देश के सभी अस्पतालों को एक ऐसे प्लेटफॉर्म पर लेकर आ रहे हैं जहां रोगियों को एक हेल्थ आईडी मिलेगी जिसका इस्तेमाल वे किसी भी अस्पताल में कर सकेंगे। अस्पताल में हेल्थ आईडी दिखाने से उक्त रोगी के सभी चिकित्सा दस्तावेज डॉक्टर के पास उपलब्ध कंप्यूटर पर मौजूद रहेंगे। इस योजना पर सरकार ने 341 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा है जो 2022 में 200 करोड़ रुपये था। सरकार प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज के लिए छह हजार करोड़ रुपये खर्च कर सकती है।

50% हिस्सा केंद्रीय योजनाओं के लिए  
बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को 86 हजार करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव है। कुल 86 में से 47 हजार करोड़ रुपये केंद्रीय स्वास्थ्य योजनाओं पर खर्च किए जाएंगे जिसके तहत राज्यों को सहयोग प्राप्त होगा। इसमें सरकार की चर्चित आयुष्मान भारत योजना भी शामिल है जिसके लिए सरकार ने सात हजार करोड़ रुपये स्वीकृत करने का प्रस्ताव रखा है। इसी तरह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं पर सरकार पूरे वर्ष में 29 हजार करोड़ रुपये खर्च कर सकती है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से 1.04 लाख करोड़ रुपये की मांग सरकार को मिली थी।

 बढ़ाआयुष का बजट
सरकार ने इस बार आयुष मंत्रालय का कुल बजट 20 फीसदी बढ़ाकर 3,647.50 करोड़ रुपये आवंटित किया है। वहीं, राष्ट्रीय आयुष मिशन को 1200 करोड़ रुपये मिले हैं जो 2022 की तुलना में करीब 50 फीसदी अधिक है। इस बजट के जरिए आयुष अस्पताल और औषधालयों में चिकित्सा सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। इसके अलावा बजट में भारतीय पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति की ताकत पर विचार किया है।

बजत और नर्सिंग कॉलेज बेहतर, कर में छूट की भी दरकार
पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव के सुजाता राव ने कहा कि कम बजट में कई घोषणाओं के बावजूद स्वास्थ्य की झोली में बहुत कुछ नहीं आया है। अगर महिलाओं की बात करें तो दो साल में दो लाख रुपये की बचत एक अच्छा निर्णय है। नर्सिंग कॉलेजों की आवश्यकता भी देश को लंबे समय से बनी हुई है क्योंकि छोटे छोटे अस्पताल खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में नर्सिंग कर्मचारियों की काफी कमी बनी हुई है। 

उन्होंने कहा कि इन दो बिंदुओं को छोड़ बाकी कुछ खास दिखाई नहीं दिया। अगर आप सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को लेकर इस बजट को देखें तो आपको पता चलेगा कि बीमारी के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए बजट पर्याप्त नहीं है। अभी कोरोना महामारी खत्म नहीं हुई है। दो साल में महामारी के चलते स्वास्थ्य को काफी कुछ मिला लेकिन सरकार ने इस साल चुनावी बजट पेश करने के चक्कर में समझौता किया है। सरकार को स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। यहां लोगों को नैदानिक चिकित्सा जांच की सुविधा मिलनी चाहिए जिसके लिए उन लोगों को कई किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ता है।
कई बार तो एक जांच कराने या फिर उसकी रिपोर्ट लेने के लिए ग्रामीणों को दो से तीन बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। नीति आयोग की 2021 में जारी रिपोर्ट बताती है कि देश की 50 फीसदी आबादी के पास मात्र 35 फीसदी अस्पतालों के बिस्तर उपलब्ध हैं।

कोरोना का बजट दूसरी तरफ ले गई सरकार
स्वास्थ्य, अनुसंधान और फार्मा पर ध्यान देने की सख्त जरूरत है। भविष्य में बेहतर स्वास्थ्य प्रणाली चाहते हैं तो जरूरी है कि आज सरकार को स्वास्थ्य सेवा के लिए कर में छूट देनी चाहिए थी। इसका सीधा फायदा स्वास्थ्य देखभाल के खर्च और आम मरीजों की जेब पर पड़ने वाले खर्च में कटौती के रूप में दिखाई देता। कोरोना के दौरान आवंटित पूरा बजट सरकार अब दूसरी तरफ ले गई।



प्रगति, उन्नति और नई गति का बजट। समाज के हर वर्ग को समर्पित स्वास्थ्य, शिक्षा, युवा उत्थान व आम आदमी को राहत देने वाला बजट है। -मनसुख मांडविया

इस वर्ष का बजट भी कुछ ज्यादा अलग नहीं। पिछले साल की कमियां कोई सरकार नहीं बताती और नए वादों की फिर से झड़ी लगा देती है, जबकि जमीनी हकीकत में 100 करोड़ से अधिक जनता का जीवन वैसे ही दांव पर लगा रहता है जैसे पहले था। लोग उम्मीदों के सहारे जीते हैं, लेकिन झूठी उम्मीदें क्यों?-मायावती, बसपा प्रमुख


महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने एवं उन्हें प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया है। बजट महिलाओं के जीवन को आसान बनाएगा और नेतृत्व के लक्ष्य को विकसित करने में मदद मिलेगी। -स्मृति ईरानी
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