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भूस्थानिक सुविधाओं और सेवाओं के लिए राष्ट्रीय रणनीति बनाए केंद्र: थिंक टैंक समूह
Wed, 04 Dec 2019 02:34 PM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Published by: Priyesh Mishra
Updated Wed, 04 Dec 2019 02:34 PM IST
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थिंक टैंक
- फोटो : Social Media
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देश के बड़े थिंक टैंक समूह ने यह मांग रखी है कि देश में भूस्थानिक सुविधाओं (Geospatial Services) को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) या नीति आयोग के नेतृत्व में एक एजेंसी बनाई जाए। यह एजेंसी भूस्थानिक सुविधाओं और सेवाओं को लेकर एक राष्ट्रीय रणनीति बनाए।
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थिंक टैंक के इस समूह का नेतृत्व नैसकॉम के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बीवीआर मोहन रेड्डी और पूर्व इसरो चीफ डॉ एएस किरन कुमार करते हैं। उन्होंने कहा कि भूस्थानिक सेवाओं और सुविधाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर की रणनीति बनाई जानी चाहिए ताकि देश में जियोस्पेशियल इंडस्ट्री को आगे बढ़ाया जा सके।
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डॉ मोहन रेड्डी ने कहा कि हमें सार्वजनिक क्षेत्र की डाटा पैदा करने वाली एजेंसियों, केंद्र एवं राज्य सरकार, निजी जियोस्पेशियल कंपनियों और सिविल सोसाइटी को एकसाथ लाना होगा, जिससे नए भारत के लिए नई भूस्थानिक रणनीति बना सकें। इस मौके पर जियोस्पेशियल स्ट्रैटेजी फॉर न्यू इंडिया नाम से एक दस्तावेज भी जारी किया गया।
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स्वतंत्र जियोस्पेशियल एजेंसी की जरूरत
इस दस्तावेज में इस बात का जिक्र किया गया है कि कैसे हम भूस्थानिक सेवाओं और सुविधाओं के जरिए देश में और तेजी से विकास ला सकते हैं। इसके साथ ही इससे रोजगार और इनोवेशन के नए अवसर पैदा होंगे।
इससे निर्णय लेने की गति भी बढ़ेगी, साथ ही विकास कार्यों के लिए धन और समय की बचत होगी। लेकिन, यह सब तभी संभव होगा जब भूस्थानिक सेवाओं और सुविधाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक स्वतंत्र एजेंसी बनाई जाए। साथ ही वह जियोस्पेशियल को लेकर रोडमैप तैयार करे।
नाविक की पहुंच आम लोगों तक बढ़ाई जाए
इस दस्तावेज में मांग की गई कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की तरफ से लॉन्च किए गए इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (IRNSS) या नाविक का सार्वजनिक रूप से इस्तेमाल शुरू हो। जिससे आम लोगों के पास भारतीय जीपीएस (स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) की सेवा पहुंच सके। इसमें रेलवे और जहाजरानी मंत्रालय को भी जोड़ा जा सकता है। इसके साथ ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट और इमरजेंसी सेवाओं को भी जोड़ सकते हैं।
एक मीटर रिजोल्यूशन वाले मैप मिले
दस्तावेज में यह मांग भी की गई है कि भूस्थानिक सेवाओं की बेहतरी और सुविधाओं में इजाफे के लिए जरूरी है कि हम बेहतर सैटेलाइट मैप हासिल करें। हमें ऐसे मैप चाहिए जो एक मीटर रिजोल्यूशन के हो। ताकि हम सही और बेहतर नक्शे पर काम कर सकें। इससे डेटा कि निजता बनी रहेगी और साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा नहीं होगा।
जियोस्पेशियल से होने वाली राष्ट्रीय योजनाएं
स्मार्ट सिटी परियोजना, अम्रुत (AMRUT), RURBAN क्लस्टर, नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट, भारतमाला, सागरमाला, नेशनल वाटरवेज प्रोजेक्ट, नमामि गंगे आदि।