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भत्ते में दो फीसदी बढ़ोतरी को कर्मचारियों ने बताया सरकार का मजाक, विरोध में जंतर मंतर पर करेंगे रैली

Thu, 30 Aug 2018 06:10 PM IST
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 30 Aug 2018 06:10 PM IST
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Central employees told junk to increase the two percent dearness allowance

केंद्र सरकार के कर्मचारियों एवं पेंशनरों को महंगाई भत्ते के मद में एक बार फिर से दो फीसदी की बढ़ोतरी का फैसला कर्मचारियों को रास नहीं आया है। कर्मचारी संगठनों ने इसे उपहास बताते हुए आंदोलन पर उतारू हैं। ऑल इंडिया कंफेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट इम्पलायीज एंड वर्कर्स ने तो इसके विरोध में आगामी पांच सितंबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर रैली करने की तैयारी शुरू कर दिया है। 

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रेलवे के 10 लाख से भी ज्यादा कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन -एनएफआईआर- के महासचिव एम राघवैया ने अमर उजाला से बातचीत में महंगाई भत्ते में महज दो फीसदी की बढ़ोतरी के फैसले को कर्मचारियों का उपहास बताया। उनका कहना है कि इससे पहले जब यूपीए की सरकार थी तो महंगाई भत्ते में कभी भी पांच फीसदी से कम बढ़ोतरी नहीं होती थी। 
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उस समय तो कभी सात या आठ फीसदी की बढ़ोतरी आम थी। एक बार तो इसमें नौ फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। अब, जबसे एनडीए का शासन आया है, कभी भी इसमें दो फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी नहीं हुई है। आयकर कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष और ऑल इंडिया कंफेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट इंपलायी एंड वर्कर्स के उपाध्यक्ष अशोक कन्नोजिया का कहना है कि इस समय पेट्रोल-डीजल की कीमतें रोज रिकार्ड बना रही हैं। 
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डॉलर के मुकाबले रुपया गर्त में चला गया है। डीजल के दाम में रोज बढ़ोतरी होने से बाजार में सभी सामान महंगे हो गए हैं, लेकिन सरकार के लिए महंगाई कुछ है ही नहीं। तभी तो कर्मचारियों को महंगाई भत्ते के मद में महज दो फीसदी की राहत दी गई है। उन्होंने बताया कि केन्द्र की कर्मचारी विरोधी नीतियों के विरोध में कंफेडरेशन आगामी पांच सितंबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर रैली करने वाले हैं, जिसमें देश के हर हिस्से से प्रतिनिधि शामिल होंगे।  
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मजदूर इकाई भारतीय मजदूर संघ -बीएमएस- के महासचिव वृजेश उपाध्याय ने भी कर्मचारियों की मांग का समर्थन किया है। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि बीएमएस पहले से ही इस मांग को उठाती रही है कि महंगाई भत्ते की गणना के लिए सरकार ने जो फार्मूला तय किया है, वही दोषपूर्ण है। इसमें महंगाई की सही दर परिलक्षित नहीं होती है। इसलिए सरकार को फार्मूला बदल कर कर्मचारियों की जायज मांगे मान लेनी चाहिए।  


एनएफआईआर के प्रेस सचिव एस एन सचिव के मुताबिक सरकार ने कर्मचारियों से बात करने के लिए संयुक्त सलाहकार मशीनरी -जेसीएम- का गठन किया है लेकिन पिछले चार साल में इसकी एक बैठक तक नहीं हो सकी है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से वैसे ही कर्मचारी ठगा महसूस कर रहे हैं, ऊपर से महंगाई भत्ते में महज दो फीसदी की बढ़ोतरी का फैसला ऐसा लगता है जैसे कोई जले पर नमक छिड़क रहा हो। 

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